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“ट्रांसजेंडर” बना रहें है नई पहचान !

हमारे देश में ट्रांसजेंडर श्रेणी में आने वाले लोगो के लिए 5 अगस्त 2019 में लोक सभा में और 26 नवंबर 2019 में राज्य सभा में ट्रांसजेंडर वर्ग में आने वालो के लिए एक नया कानून पारित किया गया थाl जिसके मुताबिक देश के सभी ट्रांसजेंडर लोगो को एक अलग पहचान देकर देश के अन्य नागरिको की तरह, हर तरह की नागरिक अधिकार इस वर्ग को दिए गएl मतदान करने, चुनाव लड़ने, सरकारी नौकरियों में स्थान पाने, शिक्षा क्षेत्र में सभी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पाने के साथ-साथ अन्य सभी सुविधाएं भी सामान्य नागरिकों की तरह ही देने की बात कही गई हैl देश की सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने तो इन्हें सभी अधिकार देकर एक अलग पहचान तो बना दी लेकिन हमारे समाज ने इन्हें अलग-अलग नज़रिये से देखने का अपना दृष्टिकोण नहीं बदलाl हम एक तरफ तो इन्हें बगला-मुखी परिवार का अंश मानते हुए अपने सभी शुभ कार्यों में इनकी भागीदारी और आशीर्वाद को भाग्यशाली मानते हुए अपने हर शुभ अवसर पर इनकी उपस्थिति को अनिवार्य मानते हैं l इसके साथ ही हमारा एक नजरिया इनके प्रति यह भी बनता है कि ये लोग मात्र नाचने-गाने वाले ही हैं और कभी भी हमारे निवास या व्यवसाय पर आ कर भौंडा प्रदर्शन करके हमसे जबरन पैसा उगाई करके ले जाते हैंl बदलते समय के साथ जब हमनें बहु मंजिली इमारतों वाली सोसाइटीज़ में रहना आरम्भ कर दिया तब तो हमारे घरों पर इनका प्रवेश भी वर्जित हो गया l दिन प्रतिदिन इनकी निरन्तर घटती आय ने इनमें से कइयों को सड़को पर भीख मांगने पर भी मजबूर कर दिया l अभी हाल में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के गेट नंबर 2 के बाहर पहाड़ गंज के निकट कुछ ट्रांसजेंडर लोगो ने मिलकर एक बड़ी चाय की दुकान खोली जिसमें समोसे, छोले भठूरे तथा और भी कई खाने की चीजें बनाई जा रही थी l दिल्ली के इन ट्रांसजेंडर लोगो की इस नयी पहल को प्रोत्साहित करने के लिए देश के कई शहरों से इस वर्ग के लोग उदघाट्न समारोह में पहुंचे और इस अवसर की शोभा बड़ाई l सबसे बड़ी प्रोत्साहित करने वाली बात यह देखी गयी की इस छोटे समारोह में जो दूर-दूर से इस वर्ग के लोग आये उनमें से कई तो बहुत ही शिक्षित थे और सरकार व निजी क्षेत्र में बड़े-बड़े पदों पर कार्यरत भी थे l इन ट्रांसजेंडर वर्ग के लोग जिन्हें हम अपनी पूरानी भाषा में किन्नर शब्द से संबोधित करते थे और जो इस छोटे से आयोजन में हज़ारो किलोमीटर दूर से भी आये थे उनमें कई डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टेड अकॉउंटेंट और डिग्री कॉलेज के प्रोफ़ेसर भी थे l एक छोटी सी चाय की दुकान के खुलने पर इतनी दूर से इतने शिक्षित इस वर्ग के लोग केवल इस लिए आये थे कि वो अपने वर्ग विशेष की एकता दिखाने के साथ-साथ जो छोटी पहल उनके कुछ साथियों ने की वो सब मिलकर उस प्रयास को प्रोत्साहित कर रहे थे l उन्होंने वहाँ अपने छोटे-छोटे संबोधनों में यह कहा की हम वो भाग्यशाली है कि हमें अच्छे परिवारों में पैदा हो कर शिक्षित माँ-बाप का सहयोग और प्रोत्साहन मिला और हमनें जो आयाम छूने चाहें वो हम छू पाएl लेकिन हमारे लाखो भाई बहन ऐसे हैं जो गरीब परिवारों में पैदा होते हैं या फिर अशिक्षित माँ-बाप के साए में पालते हैं वो या तो बचपन से ही भीख मांगने लगते हैं या फिर बड़े हो कर तालियां बजा-बजा कर नाच-गाना करके अपना जीवन चलाते हैं l उनका कहना था की हम जो सम्पन्न ट्रांसजेंडर समाज के लोग हैं वो ऐसे वंचित लोगो को हर तरह का सयोंग देकर प्रोत्साहित करना चाहते हैं ताकि वो भीख मांग कर अपना पेट न पाले बल्कि ऐसे छोटी चाय या अन्य व्यवसाय की दुकानें खोलकर अपना सम्मान पूर्वक जीवन निर्वाह करें l नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के बाहर इस छोटी चाय की दुकान के उदघाटन समारोह को जिसने देखा और यहाँ उपस्थित ट्रांसजेंडरों के विचार सुनें वो वास्तव में भाव-विभोर हुए बिना नहीं रह पायाl इस मौके पर बनाई गयी एक लघु फ़िल्म भी बताया जाता है सोशल मीडिया पर देखी जा सकती है l

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