युवा शक्ति को पहचाने बूढ़ा नेतृत्व

हमारा देश किस दिशा जा रहा है। विश्व गुरू बनने की राह पर चला भारत अचानक अपना रास्ता कैसे भटक गया। कोई एक दिन भी तो ऐसा नहीं जा रहा जब हमें जनहित का कोई शुभ संदेश दिखाई देता हो या राष्ट्रहित का कोई सार्थक संदेश हमारे कानो में पड़ रहा हो। लोकतन्त्र के उस सबसे बड़े मन्दिर लोक सभा में जहां जनहित के मुददे तय करने के लिए हम अपने प्रतिनिधियों को चुनकर भेजते हैं वो मन्दिर रह रह कर सियासी उन्माद का केन्द्र बन जाता है और जनहित के कोई ठोस फैसले लिए बिना ही संसद सत्र की अवधि शोर शराबे और हंगामें के बीच पूरी हो जाती है। इन दिनो नीट का पर्चा लीक होने का मामला संसद से सड़कों तक एक पुरजोर आन्दोलन की शक्ल लेकर देश के हर कोने में गूंज रहा है और समूचा देश अस्थिरता की एक पीड़ाजनक परिस्थिति से प्रभावित हो रहा है। इस वर्ष नीट परीक्षा में जो 22 लाख विद्यार्थी प्रवेश
के लिए परीक्षा देने आये उनका वो प्रष्नपत्र दो दिन पहले ही लीक हो गया और देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा को रदद करना पड़ गया। इस पर्चा लीक से पीड़ित परीक्षार्थियों में से 22 युवा छात्र छात्राआंे ने मायूसी की हालत में आकर आत्म हत्या कर ली। अब इस मामला मेें देश के छात्र सड़कों पर आन्दोलन करके अपने गुस्से का इजहार कर रहे है और पिछले 3 हफतों से यह मामला छात्रोें से जो शुरू हुआ उसने अब सियासी रंग ले लिया और कई विपक्षी दल छात्रोें के इस आन्दोलन में कूद पड़े। लेकिन इस बार की लोकसभा का मानसून सत्र जो विगत 20 जुलाई को आरम्भ हुआ वो पहले एक सप्ताह तो छात्रों के इसी आन्दोलन मे बिना किसी निष्कर्ष के पूरा हो गया। इस मानसून सत्र के अभी दो सप्ताह और बाकी है लेकिन लग नहीं रहा कि तीन सप्ताह का यह सत्र जनहित के किसी सार्थक निर्णय को देष के सामने रख पायेगा क्योंकि संसद में बहस के लिए आने वाले मुददे राष्ट्रहित से कम जुड़ें है और सियासी उलझनों में अधिक उलझे नजर आ रहे है। सत्ता दल भाजपा केअन्य मुददों के बीच वन्दे मातरम गीत को अनिवार्य बनाने का कानून पारित कराना पहली प्राथमिकता है अैार अगले संसदीय चुनाव से पहले
चुनावी क्षेत्रों का परीसीमन बदलने के नियम में संशोधन लाना दूसरी प्राथमिकता है। इस नये संशोधन के लिए दो तिहाई बहुमत का सत्तादल के पास होना चाहिए और इस 360 के जादुई आंकड़े को पार करने में भाजपा पूरा जोर लगाकर क्षेत्रीय दलों के सांसदों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है। दूसरी ओर विपक्षी दल नीट का पर्चा लीक होने पर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मंागनें के साथ-साथ राम मन्दिर मंे हुई चन्दा चोरी, ई-20 के मिलावटी पेट्रोल, सांसदोें की खरीद फरोख्त और अमेरिका के साथ हुए समझौते में किसी क्षेत्र के आयात को खोलने की अनुमति देने के खिलाफ सत्ता दल को लोकसभा में कटघरे में खड़ा करना चाहता है। लिहाजा इन सभी गंभीर और गर्माहट वालें मुददों पर पूरी तरह से बहस हो पाना संभव ही नजर नहीं आ रहा है। कुल मिलाकर वर्तमान की परिस्थितियों में सत्ता दल को छात्रों के इस आन्दोलन पर सहानुभूति और संवेदना के साथ व्यवहार करना चाहिए। देश की ये युवा पीढ़ी हमारे देश का भविष्य है, यही असली भारत है और विश्व गुरू बनाने के सपने को युवा पीढ़ी के सहयोग के बिना पार उतारना संभव नहीं है। इन जर्जर बूढ़े सियासी बैलों को युवा शक्ति को मान्यता देते हुए इन्हें आगे रखकर चलना चाहिए इनकी पीठ पर सींग मारकर इन्हें घायल करने की नाापाक कोशिश नहीं करनी चाहिए। दिल्ली में छात्रोें के साथ पुलिस ने दिल्ली में जो बर्बरता बरती है उसकी निंदा पूरा देश ही नहीें पूरा विश्व भी कर रहा है। युवा शक्ति अगर अपने रौद्र रूप में आकर आक्रोशीत हो उठी तो ये बू़ढ़े सियासी छल बल से संभाले नहीं संभलेगी।



