चर्चा-ए-आमराष्ट्रीयस्लाइडर

घाटी में हुए नरसंहार से देश दुखी

  • हम भारत में जनशांति बनाए रखे
  • सरकार देगी कठोरतम मुंहतोड़ जवाब
  • आवाम ना डाले सरकार पर कार्रवाई का दबाव

कमल सेखरी

बीते दिन कश्मीर घाटी के पहलगाम में दरिंदगी और हैवानियत की जो घटना घटी उस नरसंहार के मामले को लेकर पूरा देश पीड़ा में हैं, दुखी है और क्रोधित भी है। पहलगाम कश्मीर का वो हिस्सा है जहां पर्यटक बड़ी संख्या में प्राकृतिक सौन्दर्य के दृश्य, सुकून और शांति का आनंद लेने के लिए परिवार सहित जाते हैं और नवविवाहित दंपतियों के लिए तो पहलगांव दशकों से आकर्षण का एक केन्द्र बना हुआ है। बीते दिन बड़ी संख्या में पर्यटक पहलगाम में चहलकदमी का आनंद उठा रहे थे और अपने होटलों से बाहर निकलकर वहां बने एक विशेष पिकनिक स्पाट माडीज पर एकत्रित हुए थे, इस स्थान पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं और वहां खुले मैदान पर घुड़सवारी का आनंद लेकर प्राकृतिक सौन्दर्य को निहारते हैं। कल भी ऐसा हुआ। लगभग 400 की संख्या में पर्यटक अपने-अपने होटलों से निकलकर दूर ऊंचाई पर बने इस स्थान पर पहुंचे और वहां पहाड़ों और घने जंगलों के बीच घुड़सवारी का आनंद ले रहे थे कि अचानक चार से पांच की संख्या में सेना की वर्दी पहले आतंकी वहां जंगलों के रास्ते से पहुंचे और उन्होंने महिलाओं और बच्चों को एक तरफ करके वहां उपस्थित पुरुषों को एक तरफ खड़ा कर दिया और उनसे उनका नाम और धर्म पूछने के बाद उन पर ताबड़तोड़ गोलियों की बौछार कर दी। यह नरंसहार छोटे मासूम बच्चों और महिलाओं ने देखा जिनके पतियों और पिताओं ने तड़प-तड़पकर वहां जान दे दी। यह स्थान क्योंकि मुख्य पहलगांव से कुछ दूरी पर था लिहाजा पुलिस और सेना के जवानों को वहां पहुंचने में समय लगा इस दौरान कई घायल लोगों ने भी दम तोड़ दिया।
इस दुर्दांत और पीड़ाजनक घटना की खबर दिल्ली पहुंची तभी देश के गृहमंत्री श्रीनगर पहुंचे और प्रधानमंत्री जो यूएई की यात्रा पर थे वो भी अपनी यात्रा बीच में ही छोड़कर स्वदेश लौट आए। देररात तक श्रीनगर में सेना के उच्च अधिकारियों व गृहमंत्री के बीच बैठकें चलती रहीं और आज प्रधानमंत्री की उपस्थिति में सुरक्षा के सभी सेनाध्यक्षों, रक्षा मंत्री और गृहमंत्री की बैठक इस बात को लेकर चल रही है कि पाकिस्तान जिसका हाथ इस आतंकी घटना में हैं उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाए। बताया जाता है कि ब्लूचिस्तान में पिछले दिनों एक रेलगाड़ी और एक फौजियों की बस पर वहां की फौज ने हमला करकर बड़ी संख्या में पाक सैनिकों की हत्या की जिससे उभरे जनआक्रोश को नरमी पहुंचाने के लिए पाकिस्तान ने ये शर्मनाक नरसंहार की घटना की है। पिछले कुछ दिनों में पाक सेनाध्यक्ष आसिफ मुनीर ने कई उत्तेजक भाषण देकर वहां की जनता को यह संदेश दिया कि हम जल्द ही भारत से बदला लेंगे, ऐसा ही आतंकी भाषण लश्कर ए तोएबा के कमांडरों ने भी पाकिस्तान में दिया। अब कल की घटना को लेकर पूरे देश में आक्रोश में है। और देश सरकार से जल्द ही इसका बदला लेने की बात कर रही है, इसके लिए श्रीनगर और जम्मू की सड़कों पर सभी काम धंधे बंद करके लोग आंदोलन कर रहे हैं और सरकार से सीधी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अनुमान है कि कल की इस शर्मानाक नरसंहार की घटना ने आतंकियों के आकाओं ने कुछ बातों को ध्यान में रखते हुए इस घटना को अंजाम दिलाया है। 370 धारा के खत्म होने पर काश्मीर में जो स्थिति सामान्य हुई, व्यापार वापस लौट, लोगों में खुशहाली आई और पर्यटकों ने बड़ी संख्या में घाटी जाना शुरू कर दिया, उससे बौखलाकर कल की इस आतंकी घटना को अंजाम दिया गया। ब्लूचिस्तान की फौज द्वारा पाक सैनिकों के मारे जाने की दो घटनाओं से पाक में जो जनाक्रोश हुआ उसको संतुलित करने के लिए भी इस नरसंहार को कराया गया। इसके साथ एक मुख्य उददेश्य यह भी जोड़ा गया कि धर्म पूछकर हत्याएं की जाएं और हिन्दू-मुस्लिम का वो नेरेटिव इस घटना से भारत में फैलाने की कोशिश की जाए जिससे यहां हिन्दू-मुस्लिम के बीच चल रहा तनाव और उग्र हो और हिंसा में बदल जाए।
भारत सरकार सक्षम है अपने हिसाब से इस शर्मनाक घटना का जवाब देने के लिए, हमें सड़कों पर उतरकर जल्द ही जवाबी कार्रवाई करने का दबाव सरकार पर नहीं डालना चाहिए और यह विश्वास रखना चाहिए कि सरकार स्वयं अपने आपसे योजनाबद्ध तरीके से अपना समय और स्थान चुनकर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देगी। यह जवाब कठोर से कठोरतम भी हो सकता है। हमारे लिए यह जरूरी है कि हम सब मिलकर पूरे देश में आपसी सौहार्द और शांति कायम रखने के प्रयास करें जब तक सरकार जवाब कार्रवाई नहीं कर लेती है। खासतौर पर हमें इस दौरान धार्मिक उन्माद और जातीय मतभेद फैलाने की कोई ऐसी बात नहीं करनी चाहिए जिससे पाकिस्तान का उददेश्य पूरा हो और वो इस नरसंहार की घटना से अपने इस लक्ष्यपूर्ति के उददेश्य को पूरा कर सके।

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