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गऊ माता है -हत्या पर रोक लगे!

गऊ हमारी माता है इससे जन्म-जन्म का नाता है l उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बुलंद आवाज़ में दिया गया यह नारा आज कल मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है देश के हर बड़े टीवी चैनल पर यह नारा रह-रह कर सुनाया जा रहा है और इस पर बड़े स्तर पर राजनीतिक बहस भी छिड़ गयी है l अभी हाल में बकरा ईद से पहले कुछ मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने सयुंक्त रूप से अपने समुदाय के लोगो से अपील की थी कि वो इस बार ईद पर कुर्बानी सिर्फ बकरें की ही करें और साथ ही सरकार से यह अपील भी करे की गाय को राष्ट्रिय पशु घोषित किया जाए ताकि देश में कोई भी गाय की हत्या न करें l इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने ब्यान दिया कि जो लोग गाय को पशु मानते है वो खुद पशु हैं और गाय तो हमारी माता के समान है l हालांकि गऊ हत्या पर पाबन्दी लगाने की अपील शंकराचर्या अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती भी कई बार कर चुके हैं l अब अगर हम उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के बुलंद आवाज़ में दिए गए नारे को मान्यता देकर पूरी निष्ठां और सम्मान से यह मान ले की गऊ हमारी माता है और सनातन धर्म और हिन्दू समाज में पहले से ही बड़े सम्मान पूर्वक माना जाता रहा है कि गाय हमारी माता है ऐसे में पूरे भारत में गाय को गऊ माता का दर्जा मिलना ही चाहिए l अब अगर गाय हमारी माता है तो पूरे देश में इसे माता का सम्मान देकर ही माना जाना चाहिए l इस पर केंद्र सरकार अब गंभीरता से विचार करके पूरे देश के लिए यह कानून बना ही देना चाहिए की गाय हमारी माता है और देश के किसी भी कोने में गाय की हत्या किये जाने पर जघन्य अपराध की श्रेणी में ही आँका जायेगा l हम इस तरह की पाबन्दी और कानून अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार कैसे लागू कर सकते हैं l जबकि देश के उत्तरी-पूर्वी राज्यों सहित गोवा और अन्य कुछ स्थानों पर गाय की हत्या करने और उसके खाने पर पूरी स्वतंत्रता है और कोई भी केंद्र सरकार ऐसे स्थानों पर गौ हत्या किये जाने पर कोई रोक नहीं लगा पा रही है l अब अगर हम इस बात पर भी गंभीरता से गौर करें की गाय को कसाइयों के हाथों तक पहुंचता कौन है l देश से बाहर मांस निर्यात करने वाली फैक्ट्रियों तक गाय पहुंच कैसे जाती हैं l इसका ईमानदारी से अध्ययन करने पर यही सामने आएगा कि ऐसा सब काम हमारे हिन्दू भाई ही कर रहे हैं l दूध देने से हट जाने पर हम हिन्दू भाई ही जिन गायों को रात के अंधेरें में सड़को पर छोड़ आते थे और वो झुँड बना कर कई जगह सड़को पर बैठी रहती थी तो उन्हें किसी रात अंधेरें में इंजेक्शन लगा कर बेहोश करके कसाई उठा कर ले जाते थे l अब तो हमने ही दूध से हटी ऐसी गायों को सड़क पर छोड़ने की बजाय खुद से उनकी कीमत लगवा कर कसाइयों को बेचना शुरू कर दिया है l कृषि मंत्रालय की नज़र में तो गाय अन्य दूध देने वाले पशुओ की श्रेणी में आंकी जाती है और इस मंत्रालय के नियमानुसार “एपीडा ” कानून में शामिल की जाती है l राजनीतिक बयान देने मात्र से हम गाय माता को वो आदर, सम्मान या स्थान नहीं दे सकते जो हम अपनी माता को देते हैं l गाय को गऊ माता का दर्ज़ा देने के लिए हमें अपनी राजनीतिक नियत और कानून में परिवर्तन लाने ही होंगें l

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