काॅकरोच कभी मरता नही-सियासत अब सर्तक रहे !

काॅकरोच कभी मरता नही-सियासत अब सर्तक रहे! सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायधीश ने अपनी एक टिप्पणी में काॅकरोच शब्द का इस्तेमाल क्या किया कि यह शब्द भारत, क्या अन्य और कई देशो में भी चर्चा का विषय बन गया। मुख्य न्यायधीश महोदय ने यह शब्द देश के बेरोजगार युवाओं, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट और उन आलसी लोगो को लेकर कहे जो व्यवस्था में भीतर प्रवेश करके नुक्सान पंहुचा रहें हैं। अब उनका काॅकरोच शब्द के इस्तेमाल करने का अभिप्राय क्या रहा होगा ये तो वो जानें लेकिन वो भारत के मुख्य न्यायधीश हैं तो उन्होनें कुछ गहन चिंता करके ही इस शब्द का इस्तेमाल किया होगा हो सकता है यह वर्तमान सत्ता व्यवस्था पर भी प्रहार हो सकता है यह सोचकर कि व्यवस्था ने देश में कुछ ऐसी स्थिति बना दी है जिससे यह समस्या लाईलाज हो कर खड़ी हो गई हैं जिन्हें अब खत्म कर पाना सम्भव नजर नही आ रहा है। क्योंकि काॅकरोच धरती पर एक ऐसी प्रजाति है जो ना तो कभी खत्म हो सकती है और ना ही वो कभी खुद से मरती है। काॅकरोच को मारा तो जा सकता है लेकिन वो ना तो खुद से मरता है और ना ही उसकी प्रजाति को खत्म किया जा सकता है। काॅकरोच ही एक ऐसा प्राणी है जो धरती पर दुनिया के हर कोने में, हर देश में, जमीन से लेकर पहाड़ो के शिखर तक पाया जाता है। यह सर्दी में -60 गर्मी में $60 डिग्री यानि किसी भी तापमान में जीवित रहनें कि क्षमता रखता है। संभवतः मुख्य न्यायधीश का यही मतलब हो कि हमारें देश कि व्यवस्था ने इतने अधिक काॅकरोच देश में बना दिए जिन्हें अब खत्म किया जाना संभव नही है। यानि अब व्यवस्था इतनी बिगड़ गयी की उसे सुचारु कर पाना आसान नज़र नही आ रहा है। माननीय सुप्रिम कोर्ट की इस काॅकरोच वाली टिप्पणी का देश मेें ही नही बल्कि बाहर के कई देशो में भी असर पड़़ा। भारत में तो कुछ युवाओं ने मिलकर काॅकरोच जनता पार्टी का आनलाइन गठन कर दिया और देखते ही देखते कुछ घंटो में बडी संख्या में युवको और उम्र दराज़ लोगो ने भी इसकी सदस्यता ग्रहण कर ली। दो-तीन दिन के अन्दर ही सदस्यों की यह संख्या करोडों में पहुँच गयी। केंन्द्र सरकार ने काॅकरोच जनता पार्टी के तेजी से बढ़ते प्रभाव को देखकर उनके ट्विटर हैन्ड़ल को ही बन्द करा दिया। लेकिन वही हुआ कि काॅकरोच कभी मरता नही लिहाज़ा उन युवकों ने ”काॅकरोच इज़ बैक“ के नाम से नया एकाउन्ट खोल दिया और उसमें भी कुछ ही घंटो में कई लाख और नये सदस्य जुड़ गये। काॅकरोच जनता पार्टी नाम से फोरम बनाने वाले इन युवकों का कहना है कि अब वो एकत्र होकर देश की राजनीतिक और समाजिक परिस्थितियों में पर्रिवतन लानंे का काम करेंगें। उनका कहना है कि न्यायपालिका से रिटायर्ड कोई भी जज राजनीति में ना ही आयेंगें और ना ही उन्हें लाभ का कोई सरकारी पद दिया जायेगा। राजनेता यदि कोई भ्रष्टाचार करता है या सार्वजनिक मंचो से अश्लील भाषा का उपयोग करता है तो उस पर दस साल तक कोई चुनाव लड़ने पर रोक लगेगी। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त को निष्पक्ष हो कर कार्य करना होगा और किसी भी दल या आज़ाद उम्मीदवार के कुछ भी पूछे जाने पर उसकी जवाब देही होगी। इसके अलावा भी काॅकरोच जनता पार्टी ने राजनेताओं के आचरण पर कई सुधार किये जानें कि घोषणा अपने माध्यम से कि है। वैसे भी राजनीतिक मापदंडों को तोड़कर निरंकुश हो चुके राजनेताओं पर अंकुश लगाना बहुत जरूरी है एक पद पर रहते हुए चार या पांच पूर्व के पदों की मिल रही मुफ्त की पेंशन बन्द की जानी चाहिए। मुफ्त में मिल रहे राशन और मुफ्त की बिजली की सुविधा भी रोकी जानी चाहिए। संसद में मिल रहे सस्ते भोजन और वाहनों में डाले जा रहे असीमित पैट्रोल की मात्रा में भी कटौती की जानी चाहिए। प्रत्येक राजनीतिक दल को हर वर्ष आय-व्यय का पूरा हिसाब आयकर विभाग को लिखित में देना चाहिए। इसके अलावा इनके बच्चो की विदेश में हो रही शिक्षा का भी पूरा विवरण जनता के सामने रखना चाहिए। इनकी घुमने-फिरने और मौज मस्ती पर होने वाले अनाप-शनाप खर्चो पर भी अंकुश लगना चाहिए। काॅकरोच जनता पार्टी अगर किसी दल विशेष से नही जुड़ी और निस्वार्थ व निष्पक्ष भाव से राष्ट्र हित में सुधार लाने का काम करती है तो हम सब को खुले दिल से उसका स्वागत करना चाहिए। राजनेताओं को यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए काॅकरोच मरता नही है आप जितना इन्हें मारोगे यह उतनी संख्या में आपके सामने फिर से आ खडे़ होगें। भारत में अब काॅकारोच इन्सान की शक्ल में नजर आयेंगें। हमनें उनके नये रूप को जन्म दे दिया है।


