क्या भारत बनेगा काॅकरोचों का देश

भारत के कुछ युवाओं ने मिलकर एक ऑनलाइन पार्टी बनाई है जिसका नाम रखा है काॅकरोच जनता पार्टी। इस पार्टी की सदस्यता कई लाख लोगो ने ऑनलाइन ग्रहण कर ली है और पिछले कुछ घंटो में ही इस काॅकरोच जनता पार्टी की सदस्यता संख्या कई लाखो में पहुंच गई है। देश के कई पत्रकारो, विचारकों और बडे़ राजनेताओं ने भी इस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। काॅकरोच जनता पार्टी का यकायक हुआ जन्म और तेजी से हुए विकास के पीछे कई रोचक तथ्य आधार बनें है। हुआ यूं कि देश की सर्वोच्च आदालत के मुखिया भारत के मुख्य न्यायधीश माननीय सूर्याकान्त ने एक बाद की सुनवाई के दौरान देश के बेरोजगार नवयुवकों पर टिप्पणी करते हुए उन्हें काॅकरोच जैसा बताया। इसके साथ ही उन्होने आरटीआई कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया पर टवीट करने वालो को भी काॅकरोच की इसी श्रेणी में जोडा। उनका कहना था कि इस तरह के लोग सिस्टम के भीतर प्रवेश करके सोशल मीडिया के माध्यम से व्यवस्था पर प्रहार करते हैं। मुख्य न्यायधीश की इस टिप्पणी के बाद एक युवक अभिजीत डिपके ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर एक पार्टी की शक्ल में एक आॅन लाइन फोरम बनाया और उसका नाम काॅकरोच जनता पार्टी रखा। इस फोरम के माध्यम से काॅकरोच जनता पार्टी का सदस्य बनने का अनुरोध यह कह कर किया गया कि जो लोग युवां है और बेराजगार हैं, आरटीआई कार्यकरता हैं, आलसी हैं और फर्जी डिग्री धारक है वो लोग उनकी काॅकरोच जनता पार्टी की सदस्यता ऑनलाइन प्राप्त करें और हमारे इस विचार को आगे बढ़ाए। इस फोरम के बनने के कुछ ही समय में देश के लाखो लोगो ने इसकी सदस्यता ग्रहण कर ली जिनमें कुछ विधायक और सांसद भी शामिल हैं।
मुख्य न्यायधीश माननीय सूर्यकान्त की इस टिप्पणी की चर्चा आज पूरे देश में हो रही है और काॅकरोच जनता पार्टी भी इन दिनों देश की सुर्खियों में बनी हुई है। अगर गम्भीरता से विचार किया जाए तो मुख्य नन्यायधीश की इस टिप्पणी के कई गम्भीर अर्थ निकलते है। हमारा देश दुनिया में एक मात्र ऐसा मुल्क है जिसमें नवयुवकों कि संख्या दुनिया के किसी भी देश के नवयुवकों की संख्या से कई गुणा अधिक है क्योंकि हमारे देश में लगभग 70 फीसदी आबादी का हिस्सा नौजवानों का है और उसमें भी लगभग 65 प्रतिशत नवयुवक बेरोजगार ह। ऐसे में अगर हम अपने बेरोजगार युवकों को काॅकरोच की संज्ञा देगें तो फिर देश में बचेगा ही क्या। इसी के साथ अगर हम सोशल मीडिया पर एक्टिविस्ट को भी देश का काॅरोच कह कर बुलाने लग जाएं तो शायद ही देश के शहरी क्षेत्रो में कोई ऐसा पुरूष या महिला नही मिलेगी जो इस टिप्पणी के अनुसार काॅकरोच की श्रेणी में ना आते हो। काॅकरोच जनता पार्टी में सदस्यता लेने वाले सदस्यों में कुछ का कहना है कि देश की न्याय व्यवस्था से जुडे न्यायधीश स्वयं और उनकी पत्नियां व बच्चे भी निसंदेह सोशल मीडिया एक्टिविस्ट भी होगें ही भले ही छोटे स्तर के हों या फिर बडे स्तर के। ऐसे ही देश के सभी राजनेता और उनके परिजन सोशल मीडिया का उपयोग कर ही रहें होगें। ऐसे में क्या हम इन सभी को देश के काॅकरोच कह कर बुला सकेगें। मुख्य न्यायधीश महोदय ने चन्द शब्दो की ये टिप्पणी करके देश में एक नयी बहस को जन्म दे दिया है। अगर जल्दि ही उनके इस काॅकरोच शब्द की कोई सार्थक व्याख्या शिर्घ ही न की गयी तो भारत को अन्तराष्ट्रिय स्तर पर उपहास के तौर पर लोग काॅकरोचों का देश कह कर भी पुकार सकतें हैं।


