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श्रीमद्जगद्गुरु रामानन्दाचार्य ने जाति-पाँति पूछे नहीं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई का संदेश दिया

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनपद वाराणसी में श्रीमद्जगद्गुरु रामानन्दाचार्य के 723वें जयंती समारोह में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि श्रीमद्जगद्गुरु रामानन्दाचार्य ने सात सौ साल पहले साधना की ऊंचाइयों को प्राप्त किया था। श्रीमद्जगद्गुरु ने सगुण व निर्गुण परम्परा को जोड़कर भक्ति के माध्यम से मध्यकाल के आक्रांताओं का प्रतिरोध किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पंचप्रण की बात की है। इनमें गुलामी के हर एक अंश से मुक्ति तथा अपनी विरासत के प्रति गर्व के प्रण सम्मिलित हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्जगद्गुरु रामानन्दाचार्य ने जाति-पाँति पूछे नहीं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई का संदेश दिया। श्रीमद्जगद्गुरु ने लोक कल्याण के लिए कार्य किया था। उस काल खंड में जब बर्बर हमले हो रहे थे, धर्म असुरक्षित था, समाज में वैमनस्यता के बीज बोए जा रहे थे, श्रीमद्जगद्गुरु ने भक्ति की सभी परंपराओं और समाज के अलग अलग समूहों को जोड़ने का अद्भुत कार्य किया था। अपने उत्कृष्ट शिष्यों के माध्यम से उन्होंने समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में समाज के हर तबके को लाभार्थीपरक योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव के पहुंचाया जा रहा है। भारत के सांस्कृतिक मूल्यों और आध्यात्मिक वैभव को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का कार्य हो रहा है। साथ ही, आतंकवाद, नक्सलवाद और अराजकता से देश को मुक्त करने का कार्य हो रहा है। जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर देश को तोड़ने का प्रयास करने वाले तत्वों से हमें सावधान रहना होगा। इस अवसर पर कार्यक्रम में श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, स्टाम्प तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)रवीन्द्र जायसवाल, आयुष, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर मिश्र दयालु सहित जनप्रतिनिधि, साधु-संत तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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