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अब टीबी के विरुद्ध भी सुरक्षा चक्र तैयार करेगी वैक्सीन

  • तीसरे फेज में पहुंचा टीबी वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल
  • साल के अंत तक मिल सकता है टीबी वैक्सीन का तोहफा
  • 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने में मिलेगा सहयोग
    हापुड़।
    टीबी वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल तीसरे फेज में पहुंच गया है। इस साल के अंत तक वैक्सीन मिल सकती है। यह वैक्सीन 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने में बड़ी मददगार साबित होगी। यह कहना है जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सिंह का। डॉ सिंह हाल ही में राष्ट्रीय टीबी संस्थान की ओर से बेंगलुरु में आयोजित 12 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम से लौटे हैं।जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त की दिशा में जहां एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) अभियान चलाकर अधिक से टीबी रोगियों को जल्द खोज कर उपचार शुरू किया जा रहा है वहीं इस बीमारी की वैक्सीन पर भी तेजी से काम चल रहा है।
    जिला क्षय रोग अधिकारी डा. राजेश सिंह ने बताया कि 23 मई से 5 जून तक बेंगलुरू में चले प्रशिक्षण में देश के हर सूबे का प्रतिनिधित्व था। प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। प्रशिक्षण में बताया गया कि टीबी की वैक्सीन का ट्रायल तीसरे फेज में पहुंच गया है, उम्मीद है कि साल के अंत तक यह वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी। वैक्सीन टीबी मुक्त भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण निभाएगी, हालांकि प्रशिक्षण कार्यक्रम में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के चल रहे प्रयासों को और बेहतर व कारगर बनाने के लिए भी चर्चा हुई। डीटीओ ने बताया अब आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी से जुड़े चिकित्सक भी क्षय रोगियों को नोटिफाई करने में क्षय रोग विभाग की मदद करेंगे। इसके लिए उन्हें भी एक नोटिफिकेशन पर पांच सौ रूपए की प्रोत्साहन राशि सरकार की ओर से दी जाएगी।
    डीटीओ ने बताया टीबी का संक्रमण रोकने के लिए जरूर है कि रोगियों की प्राथमिक अवस्था में ही पहचान कर उनका उपचार शुरू किया जाए। दरअसल भारत में सबसे ज्यादा मामले फेफड़ों की टीबी के हैं और फेफड़ों की टीबी का संक्रमण भी कोरोना की तरह मुंह से निकले ड्रापलेट के जरिए संपर्क में आने वाले अन्य लोगों को अपनी चपेट में लेता है। हालांकि उपचार शुरू होने के बाद इसकी आशंका काफी कम हो जाती है। इसलिए क्षय रोगी किसी के संपर्क में आए तो मॉस्क लगाकर रखें। इसके अलावा क्षय रोगी को खुले और हवादार कमरे में रखें। इसके साथ ही उसे प्रोटीन युक्त भोजन कराएं। प्रोटीन युक्त भोजन करने से उसे टीबी से लड़ने में मदद मिलती है।

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