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निम्स की टीम ने फार्मासिस्ट और चिकित्सकों से जानी कार्यक्रम की स्थिति

  • राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम को लेकर सुझाव भी लिए
  • पिछले वर्षों के मुकाबले बदलाव के बारे में जानने का प्रयास किया
  • टीबी उन्मूलन के संकेतक दिलाएंगे हापुड़ जनपद को ब्रॉंज मेडल
    हापुड़।
    क्षय रोग उन्मूलन के लिए सरकारी स्तर पर नित नए प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जनपद में 20 दिन का सब-नेशनल सर्टिफिकेशन सर्वे चल रहा है। सर्वे की निगरानी और जनपद में राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) की समीक्षा करने के लिए सेंट्रल टीबी डिवीजन के निर्देशन में एक टीम पांच दिवसीय दौरे पर है। टीम में नोएडा इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल सांइसेज (निम्स) से कम्युनिटी मेडिसिन विभाग प्रमुख डा. रंजना सिंह और असिस्टेंट प्रोफेसर डा. रमाशंकर के अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाहकार डा. स्टेफी भी शामिल हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डा. राजेश सिंह ने बताया कि टीम ने जनपद में पांच फार्मासिस्ट और पांच प्राइवेट प्रैक्टिशनरों (चिकित्सकों) से मिलकर राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) की हकीकत जानने का प्रयास किया। टीम ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि पिछले पांच- सात वर्षों में क्षय रोग को लेकर क्या बदलाव सामने आए हैं? टीम ने फार्मासिस्टों से पूछा कि टीबी की दवा को लेकर जिले में क्या स्थिति है? क्या टीबी की दवा की बिक्री कुछ कम हुई है? टीम ने यह भी जानने का प्रयास किया कि जो लोग दवा खरीदते हैं, वह छह माह का कोर्स पूरा करते हैं।
    जिला पीपीएम समन्वयक सुशील चौधरी ने बताया कि टीम ने निजी चिकित्सकों से मिलकर टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के बारे में जाना? चिकित्सकों से यह भी पूछा गया कि क्या टीबी उन्मूलन के लिए कार्यक्रम में कोई बदलाव करने की जरूरत है? क्या आपको लगता है कि टीबी के बारे में जागरूकता की कमी है? टीम में शामिल निम्स के असिस्टेंट प्रोफेसर ने बताया – जिला क्षय रोग विभाग की ओर से टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में ब्रॉंज मेडल के लिए आवेदन किया गया है। राज्य स्तर पर जनपद को इस श्रेणी के लिए सूचीबद्ध कर लिया गया है। इस सर्वेक्षण के आधार में टीम राज्य को अपनी सिफारिशें भेजेगी।

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