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नासा रोवर चैलेंज में अपना प्रभुत्व जमाकर भारत लौटी केआईईटी की इंटरस्टेलर्स टीम

गाजियाबाद। मुरादनगर स्थित केआईईटी ग्रुप आॅफ इंस्टीट्युशंस की टीम इंटरस्टेलर्स विदेशी सरजमीं पर भारत का नाम ऊँचा कर अपने देश वापस लौट आई है। टीम इंटरस्टेलर्स ने गत दिवस दो दिवसीय चलने वाले नासा ह्यूमन एक्सप्लोरेशन रोवर चैलेंज 2023 में भाग लिया था जिसमें उन्हें दुनिया भर से चयनित की गईं 61 टीस के साथ प्रतिभाग करना था। यह प्रतियोगिता हंट्सविले, अलबामा, यूएस (नासा के अंतरिक्ष और रॉकेट केंद्र) में संपन्न हुई जहां प्रत्यक्ष रूप से 61 में से कुल 48 टीस ही प्रतियोगिता में भाग लेने पहुँची थीं। इस प्रतियोगिता में विभिन्न प्रकार की अवार्ड श्रेणियाँ रखी गईं थीं जिसमें से काईट की टीम को सोशल मीडिया अवार्ड (कॉलेज/यूनिवर्सिटी डिवीजन) से नवाजा गया। हंट्सविले में हो रही अवार्ड सेरेमनी में बताया गया कि काईट की टीम डिजाईन, फेब्रिकेशन, रिपोर्ट इवैल्यूएशन आदि से सम्बंधित सभी अपडेट्स देने में बेहद एक्टिव थी, जिसके चलते उन्हें ये पुरस्कार मिला। जब टीम संस्थान पहुँची तो उनका ढोल नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया। यह ही नहीं एसएई काईट कार्यशाला में उपस्थित अन्य सदस्यों ने भी गर्मजोशी से इस टीम की जीत का जश्न मनाया। 27 अप्रैल को पूर्व मंत्री एवं गाजियाबाद सदर विधायक अतुल गर्ग, सरीश अग्रवाल व जीडी जैन, संस्थान के संस्थापक और ट्रस्टी, कैंपस में टीम का उत्साहवर्दन करने हेतु मौजूद थे। उन्होंने सभी छात्रों को भारत और काईट का नाम अमेरिका तक ले जाने हेतु ढेर सारी बधाई और आशीर्वाद दिया। इस मौके पर संस्थान के निदेशक डा ए. गर्ग ने सभी छात्रों को उनकी उपलब्धि पर बधाई दी और कहा कि मैं टीम के मेंटर, तुहिन श्रीवास्तव को सम्मानित करना चाहता हूँे। उन्होंने जिस तरह हर मुश्किल घड़ी में बच्चों का मनोबल बनाये रखा, उन्हें सही समय पर सही गाइडेंस दी, वह सराहनीय है। तुहिन श्रीवास्तव ने बताया कि भारत से कुल 6 टीम ने हिस्सा लिया जिनमें शिव नादर विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा, वेल्लोर इंस्टीट्यूट आॅफ टैक्नोलॉजी, चेन्नई, यंग टिंकर अकादेमी, ओड़िसा, जैसे नामी संस्थान शामिल थे। निदेशक ने टीम के सदस्यों को भी उनका अनुभव साझा करने हेतु प्रेरित किया। टीम के मेंटेनेंस हेड, एरिन सिंह ने बताया कि यूएस जाकर उन्हें बहुत अच्छा एक्सपोजर मिला, दुनिया भर से आई टीम के साथ नेटवर्क करने का मौका मिला और प्रोजेक्ट एवं टीम मैनेजमेंट सीखने का भी अवसर मिला। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत कड़ा कम्पटीशन है और अगले साल हम अपने रोवर को और बहतर तरीके से बनाकर इस प्रतियोगिता में फिर से भाग लेंगे। टीम के वाईस-कप्तान और ड्राईवर, यथार्थ वैश, ने बताया कि ड्राईवर होने के नाते इस प्रतोयोगिता में जीत या हार का सारा प्रेशर मेरे हिस्से था। इस बार ट्रैक भी एस्फाल्ट की जगह ग्रेवल का था, तो रोवर के लिए मुश्किलें और बढ़ गई थीं। मुझे खुशी है कि हमारा रोवर एक्सकर्शन करने में कामयाब रहा।
श्रुति जैन, टीम की इकलौती फीमेल सदस्य ने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान हमारी मुलाकात एक सज्जन से हुई जो कि हर साल नासा रोवर चैलेंज में आते हैं और अब वे जर्मनी में खुद का रोवर चैलेंज आयोजित करने जा रहे हैें। उन्होंने हमें समर ब्रेक में जर्मनी बुलाया है जहां हम अपना रोवर डिजाईन कर पाएंगे। संयुक्त निदेशक, डॉ मनोज गोयल, हेड मैकेनिकल डॉ. आशीष कर्नवाल व समूचे संस्थान ने भी पूरी टीम को बधाई दी।

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