अध्यात्मगाजियाबादचर्चा-ए-आमविचार

क्यों अचानक टूटे ये सात नेता

जब भी जी चाहे नई दुनिया बसा लेते हैं लोग,

एक चेहरे पर कई चेहरे लगा लेते हैं लोग।

ये कहा जा सकता है अपने इन राजनेताओं के लिए जो रातों-रात दल बदल जाते हैं। आज किसी की उंगली पकड़ के चल रहे हैं, और कल किसी दूसरे की गोद में जाकर बैठ जाते हैं।जो दल, जो नेता ऐसे दल-बदलुओं को पालता-पोषता है, उसे रास्ता दिखाता है राजनीति का, उसे पहचान देता है, और उसका एक कद बनाता है, उसे विधानसभा, लोकसभा का सदस्य बनाता है, उसे मंत्रिमंडल में भी बिठा देता है, वो उसे राज्यसभा में सम्मान दिलाकर एक कुर्सी भी दिला देता है ऐसे लोग अचानक रातों-रात अपने उस राजनीतिक गुरु की पीठ में खंजर घोंप देते हैं।रात उसके साथ होते हैं, अगले दिन सुबह दूसरे दल की गोद में बैठे होते हैं।यह सब कहा जा रहा है आम आदमी पार्टी के उन सात राज्यसभा सदस्यों के बारे में, जो एक साथ दल बदल कर भाजपा मे गए। कई सालों से आम आदमी पार्टी की उंगली पकड़ के चल रहे थे। केजरीवाल ने उनको रास्ता दिखाया, उन्हें पाला-पोसा, बड़ा किया, और अचानक छोड़कर चल दिए और गए किधर? जिधर सूरज चमक रहा है, उधर अर्क लगाने पहुँच गए सूरजमुखी बन गए।इनका नेतृत्व किया राघव चड्ढा ने। राघव चड्ढा, जो पिछले 15 साल से आम आदमी पार्टी में थे, जिनकी पहचान ही आम आदमी पार्टी से थी, जिन्हें पंजाब का इंचार्ज बनाया गया, जिन्हें बहुत बड़ी-बड़ी ताकतें और शक्तियां दी गईं। पंजाब की सारी प्रशासनिक सेवाएं वो देख रहे थे किस अधिकारी को कहाँ भेजना है, कहाँ लगाना है वो सब उनके जरिए चल रहा था।उनके साथ संदीप पाठक, जो बड़ी ताकत बना दिए गए थे आम आदमी पार्टी में, जो सभी विधायकों के टिकट तक तय करते थे, वो भी साथ जुड़ लिए। अशोक मित्तल, जिस पर अभी दस-पंद्रह दिन पहले लवली यूनिवर्सिटी में ईडी का छापा डाला गया, ये कहकर कि सब बहुत भ्रष्ट हैं, बहुत गलत काम कर रहे हैं और वो भी दस दिन बाद वॉशिंग मशीन में धो दिए गए और भाजपा मे शामिल हो गए।सात लोग इसलिए गए कि जब दस में से सात जाएंगे, तो जो दो-तिहाई का बहुमत पूरा हो जाएगा, और ये विलय भाजपा मे आराम से हो जाएगा।लेकिन सबसे बड़ी हैरानी ये है कि वो पार्टी, यानी भाजपा, जिसके साथ ये सात आम आदमी पार्टी के सदस्य जाकर मिल गए और वो पंजाब का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं यानि भाजपा को अचानक पंजाब में सात राज्यसभा सदस्य मिल गए। और पार्टी मे एक बड़ा इजाफा हो गया।चुनाव आ रहे हैं, हो सकता है उसमें इन सातो से बड़ी मदद मिल जाए। लेकिन एक नजर से ये भी देखिए कि जिस पंजाब में भाजपा का सिर्फ एक विधायक है, उसी पंजाब में अब उसी पार्टी के सात राज्यसभा सदस्य हैं। ये समीकरण कितना अटपटा लगता है।राजनीति में सब चलता है आचरण कब, कहाँ, कैसे गिरता है, राजनीतिक चरित्र का हनन कब, कैसे हो जाता है, पता नहीं चलता।देश का आवाम, जिन्होंने इन्हें वोट दिया, इन पर विश्वास रखा वो अचानक टूट जाता है।स्वार्थ के लिए, लाभ के लिए कि सबसे ताकतवर पार्टी है, और उसमें जाकर ये सदस्यता ले रहे हैं तो स्वार्थ तो होगा। किसी को ED का डर है, किसी को CBI का डर है, किसी को इनकम टैक्स का डर है। कोई डर से जा रहा है, किसी को लाभ दिया जा रहा है।किसी को किसी कॉर्पोरेट का चेयरमैन बना दिया जाएगा, किसी को कोई बड़ा पद पार्टी में दिलवा दिया जाएगा। आने वाले चुनावों में पंजाब में उनकी प्रमुख भूमिका रखी जाएगी। ये भी हो सकता है कि कह दिया गया हो कि राघव चड्ढा और संदीप पाठक को कोई बड़ा पद दे दिया जाएगा सरकार बनेगी तो।लालच और स्वार्थ यही सब रातों-रात राजनीति के सारे समीकरण बदल रहे हैं।लेकिन देश परेशान है इन राजनेताओं के आचरण को हो क्या रहा है? कि रातों-रात देश के लोगों का विश्वास तोड़ देते हैं, अपनी मूल पार्टी का विश्वास तोड़ देते हैं, और अपने स्वार्थों के लिए कहीं से कहीं जाकर बैठ जाते हैं।आम आदमी को सोचना होगा, देश के नागरिकों को सोचना होगा, मतदाता को देखना होगा कि ऐसे लोगों के साथ किस तरह का व्यवहार जनता को करना चाहिए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button