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जनचेतना केन्द्र में धूमधाम से मनाई गई ईद, परशुराम जयंती व अक्षय तृतीय

  • एनसीआर व उत्तराखंड के कई प्रसिद्ध कवियों ने किया काव्य पाठ
    देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित सहस्त्रधारा रोड के निकट गुजराड़ा गांव में ईद, परशुराम जयंती और अक्षय तृतीय के त्योहार संयुक्त रूप से बड़े ही धूमधाम के साथ मनाए गए। जनचेतना केन्द्र परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में यहां चल रहे पठन-पाठन कार्यक्रम में आ रहे बच्चों ने इस आयोजन में बड़े ही उल्लहास के साथ भागेदारी की। इस अवसर पर एक कवि सम्मेलन भी आयोजित किया गया जिसमें दिल्ली एनसीआर के चार कवियों व देहरादून के आठ कवियों ने मिलकर इस आयोजन में अपना काव्य पाठ किया और वहां उपस्थित ग्रामवासियों को अपनी साहित्यक क्षमता से आनंदित किया। जनचेतना केन्द्र के बच्चों ने मिलकर केन्द्र में आए कविजनों का स्वागत किया और उनके अभिनंदन में स्वागत गीत भी गाया। इस मौके पर बच्चों को मिष्ठान व उपहार वितरित किए गए और वहां उपस्थित सभी मेहमानों को केन्द्र की ओर से जलपान भी कराया गया।
    देश की सुप्रसिद्ध साहित्यिक संस्था अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के उत्तराखण्ड प्रतिनिधि सुभाष सैनी और उनकी धर्म पत्नी सुमन सैनी ने निर्धन बच्चों को मिठाई और पाठ्य सामग्री वितरित कर कार्यक्रम का आरंभ किया। इन बच्चों ने स्वागत गीत का गायन किया। संस्था के ग्लोबल अध्यक्ष पंडित सुरेश नीरव और श्रीमती मधु मिश्रा का सुप्रसिद्ध शायर अंबर खरबंदा ने सारस्वत सम्मान किया। स्वागत वक्तव्य के साथ कवियों को रचना पाठ हेतु संचालक सुरेश नीरव ने किया और प्रथम कवि के रूप में रुढ़की से आए कवि नवीन शरण को आमंत्रित किया। इसके बाद देहरादून के कवि डॉक्टर राकेश बलूनी, सुरेन्द्र कुमार सैनी ( रुढ़की) , नीरज नैथानी (श्रीनगर), राकेश जुगराण (देहरादून), बीएल बत्रा अमित्र ( गाजिÞयाबाद), मधु मिश्रा (गाजिÞयाबाद), आभा सक्सेना दूनवी (देहरादून), शायर अंबर खरबंदा, सुभाष सैनी (देहरादून) जनचेतना केन्द्र संस्था के अध्यक्ष कमल सेखरी और अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के ग्लोबल अध्यक्ष पंडित सुरेश नीरव ने सरस काव्य पाठ किया। इस अवसर पर देहरादून से प्रकाशित साहित्यिक समाचार पत्र नवोदित प्रवाह के संपादक रजनीश त्रिवेदी ने नवोदित प्रवाह का वार्षिक अंक पंडित सुरेश नीरव को भेंट किया। उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम का अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के प्रतिष्ठित वैश्विक पटल से लाइव प्रसारण भी किया गया जिसका विश्वभर के श्रोताओं ने भरपूर आनंद लिया।

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