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विश्व स्वास्थ्य दिवस 7 अप्रैल पर विशेष: स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है भरपूर नींद व नियमित व्यायाम

  • इस बार “हमारा ग्रह, हमारा स्वास्थ्य” है विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम
    गाजियाबाद।
    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का जन्मदिवस यानि सात अप्रैल, हर साल विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। हर साल इस दिवस का आयोजन समसामयिक थीम पर आधारित होता है। एक तरह से कहा जाए तो विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम, विश्व स्वास्थ्य दिवस की अगले एक साल की कार्ययोजना को भी इंगित करती है। वर्तमान में पूरा विश्व कोविड से जूझ रहा है तो उसी के मद्देनजर इस बार डब्ल्यूएचओ की ओर से विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम “हमारा ग्रह, हमारा स्वास्थ्य” है।
    इस खास दिवस पर बात करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. भवतोष शंखधर ने कहा – बेहतर जीवन शैली ही बहुत हद तक अच्छे स्वास्थ्य का आधार होती है। बेहतर जीवन शैली में खानपान और रहन सहन सब शामिल है। सीधे शब्दों में कहें तो पौष्टिक और संतुलित भोजन करने के ?साथ ही स्वस्थ रहने के लिए भरपूर नींद और नियमित व्यायाम जरूरी है। फाइबर युक्त भोजन, जिसमें प्रोटीन, विटामिन और काबोर्हाईड्रेट जैसे सभी अवयव शामिल हों वही संतुलित आहार होता है। नियमित व्यायाम से हमारी मासपेशियां और कोशिकाओं की सक्रियता बनी रहती है और शरीर में रक्त व आॅक्सीजन का संचार बेहतर बना रहता है।
    सीएमओ ने कहा कोविड संक्रमण से लड़कर लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हुए हैं लेकिन इस जागरूकता को बनाए रखने की जरूरत है। अच्छी सेहत के लिए रोजाना सात से आठ घंटे की नींद लेना आवश्यक है। अच्छी नींद के लिए समय का भी बड़ा महत्व होता है। ह्लअर्ली टू बेड अर्ली टू राइज, मेक ए मैन हेल्थी वेल्दी एंड वाइज,ह्व यह बड़ी पुरानी कहावत है लेकिन आज भी उतनी ही सटीक है। शाम को जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है और आप कोई भी काम पूरे मनोयोग से कर पाते हैं। दूसरी ओर नींद पूरी न होने पर हमारे शरीर की कोशिकाओं को रिपेयर का वक्त नहीं मिलता और मानसिक व शारीरिक दिक्कतें आने लगती हैं।
    नियमित व्यायाम करने से चिंता दूर होती है। हृदय स्वस्थ रहता है। वजन नियंत्रित रहता है और मधुमेह व रक्तचाप संबंधी दिक्कतें नहीं आतीं। शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता मजबूत होती है। इतना ही नहीं, नियमित व्यायाम का बौद्धिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान रहता है और सहन शक्ति भी बेहतर होती है।

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