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बिहार में कहां से आए लाखों फर्जी वोट !

कमल सेखर

आने वाला बिहार विधानसभा का चुनाव एक ऐसी शक्ल लेगा जो ना तो देश के लोगों ने इससे पहले कभी देखा होगा और ना ही पूर्व के किसी चुनाव में ऐसा अनुभव किया होगा। अब मीडिया में खबरें आनी शुरू हो गई हैं कि अब तक की गई मतदाता पुनरीक्षण जांच में बड़ी संख्या में फर्जी मतदाता पाए जा रहे हैं। भाजपा के नेताओं ने दो कदम और आगे जाकर मीडिया में यह बयान भी देना शुरू कर दिया है कि जो फर्जी मतदाता निकलकर सामने आ रहे हैं उनकी संख्या लाखों में है और वो बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार के मूल निवासी हैं और पिछले कुछ वर्षों में देश की सीमा पार करके बिहार के सीमांचल और कृष्णानगर आदि क्षेत्रों में आकर बस गए हैं। इन सभी ने फर्जी आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड बनवा लिये हैं और ये लोग आने वाले विधानसभा चुनाव को भी प्रभावित कर सकते हैं। अब इस मामले में कई प्रश्न निकलकर सामने आ रहे हैं। एक तो यह कि पिछले बीस वर्षों में बिहार में नीतीश कुमार की ही सरकार है लिहाजा पिछले दिनों जो भी गड़बड़झाला हुआ है वो इस सरकार के रहते हुए ही हुआ है। दूसरी बात यह है कि अगर इन तथाकथित फर्जी मतदाताओं के पास आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड एक लंबे समय से उनके पास हैं तो फिर पूर्व की सरकारों में जिसमें 2020 की विधानसभा में रही सरकार और 2024 में चुनी गई केन्द्र की भाजपा सरकार भी फर्जी मतदाताओं की वोटों से बनी है। 2016 में केन्द्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने राज्यसभा में एक बयान देकर कहा था कि देश में दो करोड़ से अधिक बांग्लादेशी गैर कानूनी तरीके से अंदर घुस आए हैं जिन्हें हम जल्द ही वापस भेजने की व्यवस्था करेंगे। लेकिन वास्तविकता यह रही है कि हमने 2016 से अब तक केवल 3200 विदेशी नागरिकों को ही वापस भेजा है जिनमें वर्ष 2023 व वर्ष 2024 में कुल 411 घुसपैठिये ही वापस भेजे जा सके हैं। अब बिहार चुनाव के लिए चल रही मतदाता पुनरीक्षण के माध्यम से चुनाव आयोग का कहना है कि उन्होंने अब तक 83 फीसदी मतदाताओं के फार्म भरकर अपलोड कर दिये हैं। इसका मतलब मौजूदा आठ करोड़ मतदाताओं की सूची में से पुनरीक्षण करके लगभग 6.80 करोड़ फार्म भरे जा चुके हैं और इनमें यह पाया गया है कि लाखों की संख्या में फर्जी घुसपैठियों की वोट पहले से ही बनी हुई हैं। मतदाता जांच का यह कार्य 25 जुलाई तक पूरा किया जाना है जिसे चुनाव आयोग निर्धारित समय से काफी पहले ही पूरा करने का दावा कर रहा है। क्योंकि 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई है जिससे पहले चुनाव आयोग यह काम पूरा करके दिखाना चाहता है। मीडिया के कई कर्मी जो बिहार के अलग-अलग जिलों में जाकर मतदाताओं से बातचीत कर रहे हैं उनका कहना है कि अभी संख्या से आधे फार्म भी जमा नहीं हुए हैं। इसी तरह विपक्षी दलों ने भी हर बीएलओ के साथ अपने कार्यकर्ता छोड़ रखे हैं,उनका भी कहना है कि फार्म बहुत कम संख्या में भरे गए हैं। बीएलओ मतदातओं के घर जाए बिना एक जगह बैठकर ये फार्म भरने का कार्य कर रहे हैं और कई फार्म तो मतदाता से बात किए बिना ही बीएलओ ने खुद अपने पास से ही भर दिए हैं ताकि संख्या समय से पूरी हो सके। इस संबंध में मौके पर जा रहे मीडियाकर्मियों और विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब तक भरे गए फार्मों में मुश्किल से हजार या दो हजार मतदाता ही घुसपैठिये पाए गए हैं शेष सभी बिहार के मूल नागरिक हैं। बिहार प्रशासन ने बेगुसराये थाने में पत्रकार राजीव रंजन व कुछ अन्य पत्रकारों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने और अफवाहें फैलाने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। महागठबंधन के दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग गलत नीतियां अपनाकर, बार-बार प्रक्रिया बदलकर और फर्जी मतदाता होने की गलत खबरें अपुष्ट सूत्रों से फैलाकर बिहार विधानसभा चुनाव में सत्ता दल को लाभ पहुंचाने का एक बड़ा खेल खेल रहा है।

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