गाजियाबाद। स्मार्ट के तत्वावधान में हिंट रेडियो 90.4 एफएम के स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम ‘सेहत सही लाभ कई’ के विशेष कार्यक्रम में जिला क्षय रोग अधिकारी, गाजियाबाद डॉ. अनिल यादव से टीबी की बीमारी, इसके लक्षण, जांच, उपचार और बचाव को लेकर खास बातचीत की गई। बातचीत के दौरान डॉ. अनिल यादव ने बताया कि टीबी किसी को भी हो सकती है, लेकिन कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों, कुपोषित व्यक्तियों, मधुमेह से पीड़ित मरीजों और टीबी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में रहने वाले लोगों में इसका खतरा अधिक रहता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी रहती है, तो उसे इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सरकारी अस्पताल में जाकर टीबी की जांच करानी चाहिए। डॉ. यादव ने बताया कि टीबी की जांच आधुनिक जांच सुविधाओं के माध्यम से की जाती है और सरकार द्वारा सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों एवं अस्पतालों में टीबी की जांच और उपचार की सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीबी एक पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है। मरीज को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से दवा लेनी चाहिए और इलाज का पूरा कोर्स पूरा करना चाहिए। इलाज के दौरान दवा बीच में छोड़ना बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे बीमारी दोबारा उभर सकती है और दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने के कारण दवा-प्रतिरोधी टीबी का खतरा बढ़ सकता है, जिसका इलाज अधिक कठिन और लंबा हो सकता है। टीबी से बचाव के लिए उन्होंने लोगों से पौष्टिक भोजन लेने, साफ-सफाई का ध्यान रखने, खांसते और छींकते समय मुंह ढकने, घर और कार्यस्थल में पर्याप्त वेंटिलेशन रखने तथा लंबे समय तक रहने वाली खांसी को नजरअंदाज न करने की अपील की। समाज में टीबी को लेकर फैली भ्रांतियों पर डॉ. अनिल यादव ने कहा कि टीबी कोई छिपाने या शर्म की बीमारी नहीं है। समय पर जांच और नियमित इलाज से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि टीबी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच कराएं और मरीज का सहयोग करें, ताकि टीबी को समाप्त करने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। यह विशेष बातचीत ‘सेहत सही लाभ कई’ कार्यक्रम के माध्यम से लोगों तक पहुंचाई गई, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियों को सरल भाषा में आमजन तक पहुंचाना और लोगों को समय पर जांच एवं उपचार के लिए जागरूक करना है।



