खाड़ी में क्यों हो रहें हैं भारतीय जहाज़ों पर हमलें !

ईरान हमारा सदियों पुराना मित्र देश है और हम कई सौ सालो से उसके साथ व्यापार करते आ रहे हैं l ईरान और भारत के बीच व्यापार तब से होता चला आ रहा है जब से व्यापार की प्रणाली में वस्तुओं के आदान-प्रदान की प्रथा चलती थी l अमेरिका हमारा नया दोस्त बना है और वहां के राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रम्प हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे प्रिय मित्र हैं ऐसा हम दावा भी करते हैं l फिर जब ईरान और अमेरिका दोनों ही हमारे निकट के मित्र हैं तो फिर खाड़ी के समुंद्री क्षेत्र में उन जहाज़ों पर कौन हमले कर रहा है जिन्हें हमारे भारतीय नागरिक चला रहें हैं l बीते दिनों में लगातार तीन दिन तक अमेरिका की जल और वायु सेना ने मिलकर ऐसे तीन जहाज़ों पर हमला किया जिस पर हमारे मर्चेंट नेवी के लोग तैनात थे और वही स्वतन्त्र रूप से उन जहाज़ों को संचालित कर रहे थे l अमेरिका की सेना का कहना है की उन्होंने यह कार्वाही करने से पहले इन तीनो जहाज़ों को अलग-अलग समय पर रेडिओ पर सन्देश देकर चेतावनी दी थी लेकिन उन्होंने उन संदेशो को अनसुना कर दिया l जबकि भारतीय नाविकों का कहना था कि उन्हें कोई ऐसा रेडिओ सन्देश प्राप्त नहीं हुआ l अमेरिका सेना ने 11 जून को जिस जहाज़ पर हमला किया उस पर 24 भारतीय नाविक सवार थे जिन्हें निकट के ओमान तट पर तैनात वहाँ कि सेना ने तुरंत मदद दी और उनमें से 21 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया l लेकिन फिर भी 3 भारतीय नाविकों की इस घटना में मौत हो गयी l इससे पहले भी पश्चिम एशिया के इसी समुंद्री क्षेत्र में एक अन्य भारतीय जहाज़ पर ईरान ने हमला किया और इससे कुछ दिन पहले इसी क्षेत्र में अमेरिका ने एक और भारतीय जहाज़ को पूरी तरह नष्ट करके समुन्द्र में डुबो दिया l अब हमारे ये दोनों प्रिय मित्र देश हमारे साथ कर क्या रहें हैं और हम इनकी ऐसी नाजायज़ हरकतों पर अपना पुरज़ोर विरोध दर्ज़ क्यों नहीं कर रहें हैं l अब ये जो हमारे भारतीय नाविकों द्वारा संचालित 3 जहाज अमेरिका ने अपनी दबंगई दिखाते हुए जो हमले किये और जिसमें से एक में 3 भारतीय नागरिकों की मौत भी हो गयी तब भी हमनें कोई कठोर सन्देश अमेरिका को पहुंचा कर अपना विरोध दर्ज़ क्यों नहीं कराया l अगर ऐसा ही कोई हमला गलती से कहीं हमारी भारतीय सेना ने अमेरिका के किसी जहाज़ पर कर दिया होता और उसमें अमेरिका के 3 नहीं एक भी नागरिक मारा गया होता तो अमेरिका हमारे साथ कैसा व्यवहार करता l हमें यह सोच कर ही कम से कम कठोर शब्दों में निंदा करते हुए अपना विरोध दर्ज़ करना ही चाहिए l इस संबंध में एक और पीड़ा दायक जानकारी यह भी मिल रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल का कार्यकाल पूरा होने पर राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रम्प ने टेलीफोन पर मोदी जी को बधाई तो दी लेकिन जहाज़ पर हुए हमले में जो 3 भारतीय नागरिक मारे गए उस पर कोई खेद प्रकट नहीं किया l श्री मोदी ने भी बधाई स्वीकार करने के साथ इस पीड़ा जनक घटना पर अपना कोई विरोध दर्ज़ नहीं कराया l जबकि यह घटना उस टेलीफोन वार्ता से कई घंटे पहले की थी और शायद दोनों ही पक्षों को इसकी पूरी जानकारी थी यह स्प्ष्ट है की हम भले ही डोनॉल्ड ट्रम्प को अपना सबसे निकट और प्रिय मित्र बताते हों लेकिन श्री ट्रम्प की नज़र में भारत का महत्व सिर्फ और सिर्फ व्यावसायिक ही है और हमारे देश की 140 करोड़ की आबादी को अपनी खपत का सबसे बड़ा बाजार मानते हुए ही श्री ट्रम्प भारत को मुनासिब तर्जीह देता है l
