चर्चा-ए-आम

पहले जेल में डालो फिर लगाओ आरोप!

कमल सेखरी

पहले पकड़ो और जेल में डालो फिर बाद में लगाओ आरोप। भारत में अंग्रेजी काल से लेकर अब तक जो ताकतें भी सत्ता से जुड़ी रहीं उसने अपने विरोधियों के खिलाफ यही चलन अपनाया। आजादी से पहले अंग्रेजी हुकमरान भारत को आजाद कराने के लिए आंदोलन कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों के विरुद्ध यही प्रक्रिया अपनाते थे। उन दिनों अंग्रेजों का एक यह कथन बड़ा मशहूर था कि ‘गिव द डॉग बेड नेम एंड हैंग हिम अप’ उस समय यह डॉग शब्द अंग्रेज भारत के आंदोलनकारियों के लिए इस्तेमाल करते थे। उनके इस तरीके में उनकी मनमर्जीे का यह फार्मेूला जुड़ा होता था कि पहले पकड़ो फिर जेल में डालो, सुबूत मिल जाएं तो ठीक है नहीं तो बिना सुबूतों के ही तब तक जेल में रखो जब तक उन आजादी के मतवालों का नशा ना उतर जाए। ऐसा ही कुछ इन दिनों सत्ताधारी व्यवस्था करती नजर आ रही है। विपक्षी दल के वो नेता जो व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो उन्हें दो टूक कहा जाता है कि खामोश रहो या तो हमारे दल में आ मिलो वरना कुछ भी आरोप लगाकर तुम्हें जेल में ठूस दिया जाएगा। इस सियासी सोच के चलते जो विपक्षी नेता भ्रष्टाचारी थे वो तो सत्ता की वाशिंग मशीन में पहुंच गए और जो दिल के मजबूत बेदाग थे वो डरे बिना खड़े रहे जिनमें से कइयों को भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर जेल में डाल दिया गया। अब कानून भी कुछ ऐसा बना जिसमें आर्थिक अपराध का दोष लगाकर पीएमएलए कानून के तहत जेल में डाला गया जिसमें 2 साल तक ना तो सुनवाई का कोई प्रावधान है और ना ही जमानत आसानी से मिलती है। आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा उनकी पार्टी के कई सहयोगी मंत्रियों को इसी कानून के तहत भ्रष्टाचारी बताकर जेल में डाल दिया गया। इस दौरान दिल्ली के चुनाव सिर पर थे और उद्देश्य आम आदमी पार्टी की छवि खराब करना था जिसमें सत्ताधारी दल सफल रहा और दिल्ली की सत्ता उन्हें बदनाम करके अपने कब्जे में ले ली। लेकिन झूठ तो कहीं टिकता नहीं और सच रोके नहीं रुकता लिहाजा सीबीआई अदालत ने एक समय सीमा निकल जाने के बाद अंतत: अपना फैसला दिया और केजरीवाल, मनीष शिशोदिया व उनके सभी साथियों को दोष मुक्त पाते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया यह कहते हुए कि यह मुकदमा अर्थहीन है इसमें आरोपियों के खिलाफ कोई सुबूत नहीं हैं और सीबीआई ने अनुमान के आधार पर फर्जी आरोप लगाए हैं लिहाजा यह वाद सुनने और आगे चलाने योग्य ही नहीं है इसलिए इसे डिस्चार्ज किया जाता है। इतना ही नहीं माननीय अदालत ने सीबीआई के संबंधित जांच अधिकारी को फर्जी मुकदमा दायर करने का दोषी पाते हुए उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई किए जाने के निर्देश भी दिए।
अब केजरीवाल, मनीष शिशोदिया और उनके सभी साथी दोषमुक्त तो हो गए लेकिन केजरीवाल के 180 दिन कारावास में रहने और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष शिशोदिया के लगभग पौने तीन साल जेल में उत्पीड़न झेलने का असली दोषी कौन होगा। केजरीवाल ने बीते दिन प्रेसवार्ता करके देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर खुले शब्दों में आरोप लगाया कि उनकी सरकार गिराने की नजर से बदनीयती के साथ यह षडयंत्र रचा था। ऐसा केवल अरविंद केजरीवाल के साथ ही नहीं हुआ बल्कि देश के और भी कई बड़े सियासी नेताओं को चुनाव के दौरान उनकी अपनी छवि और उनकी पार्टी की छवि खराब करने की नीयत से उन्हें फर्जी आरोप लगाकर गिरफ्तार किया गया और वो सभी बाद में अदालत से बाईज्जत बरी हुए। ऐसी मिसालों की एक लंबी फेहरिस्त है। सीबीआई और ईडी ने पिछले 10 वर्षों में जितने भी विपक्षी नेताओं के खिलाफ इस तरह के फर्जी मुकदमे डालकर बदनाम किया है उनमें से अभी तक एक प्रतिशत की संख्या में भी किसी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सका है। भारत में इन दिनों जो द्वेषपूर्ण निम्न स्तर की राजनीति चल रही है उसे देखते हुए लग रहा है कि जल्द ही देश किसी ऐसी स्थिति में आ घिरेगा जिसके चलते गृहयुद्ध की संभावनाएं बढ़Þेंगी और देश एक गहरे संकट में पड़ जाएगा। भारत ही नहीं दुनिया के अन्य कई और देशों में भी कुछ इस तरह की परिस्थितियां बन रही हैं जिनमें सर्वोच्च पदों पर बैठे राजनेता संविधान और कानून से अलग हटकर अपनी मर्जी चलाते हुए तानाशाह से बन गए हैं। इनमें अमेरिका के राष्टÑपति डोनाल्ड ट्रंप, रूस के सर्वोच्च नेता व्लादिमीर पुतिन, उत्तरी कोरिया के नेता किमजांगउन, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, ईरान के मुखिया अली खामेनेई , पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिफ मुनीर जैसे कुछ ऐसे नेता हैं जो विश्व को कभी भी तीसरे विश्वयुद्ध में झौंक सकते हैं। ऐसी स्थिति में हमारे देश भारत को भी कहीं एक तरफ खड़े होकर अपना स्टैंड लेना होगा। कुल मिलाकर अगर परिस्थितियां ऐसी ही चलती रहीं तो भारत में गृहयुद्ध और दुनिया में विश्वयुद्ध को टालना शायद संभव नहीं हो पाएगा।

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