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पीएम मोदी के नेतृत्व में ओमान यात्रा रही बेहद सफल , जार्डन- ओमान में स्वास्थ्य सेवाओं पर की गई चर्चा: डा.उपासना अरोड़ा

गाजियाबाद। यशोदा मेडिसिटी की प्रबंध निदेशक डा.उपासना अरोड़ा हाल ही में ओमान व जॉर्डन की यात्रा से भारत लौटी हैं। वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ गए डेलीगेट में शामिल थीं। बुधवार को उन्होंने ओमान व जॉर्डन यात्रा के प्रसंग मीडिया के साथ शेयर किए और इस यात्रा को पूरी तरह सफल बताया। उन्होंने कहा कि ओमान और भारत के संबंध और भी प्रगाढ़ हुए हैं। भारत से जाने वाले उत्पादों पर निर्यात शुल्क जहां 98 प्रतिशत तक फ्री हैं वहीं ओमान में मेडिकल सेवाओं को लेकर संवाद भी सकारात्मक रहा है। ओमान के साथ उत्पाद व्यापार के साथ-साथ मेडिकल सेवाओं पर भी पूरा फोकस रखा जा रहा है। यशोदा मेडिसिटी ओमान में भी अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हैं, यदि वहां की सरकार फाइनेंशियल सपोर्ट दे दे। उन्होंने कहा कि वहां वहां बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की बहुत आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक सहयोग के माध्यम से भारत को विश्वसनीय सेवा केंद्र के रूप में स्थापित करने के मददेनजर जॉर्डन और ओमान की यात्रा के दौरान डॉ. उपासना अरोड़ा ने स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल वैल्यू ट्रैवल और अंतरराष्ट्रीय मरीज देखभाल से जुड़े विषयों पर एक स्वास्थ्य सेवा लीडर के रूप में अपना दृष्टिकोण साझा किया।
इस यात्रा के दौरान हुए संवादों में भारत की उन्नत स्वास्थ्य क्षमताओं, मजबूत अस्पताल प्रणालियों और मरीज-केंद्रित देखभाल मॉडल पर विशेष रूप से चर्चा की गई। डॉ. अरोड़ा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को गुणवत्ता-आधारित और किफायती इलाज के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य के रूप में देखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज स्वास्थ्य सेवा सीमाओं से परे जा चुकी है। वैश्विक संवाद और सहयोग से न केवल ज्ञान का आदान-प्रदान होता है, बल्कि मरीजों के लिए बेहतर और निरंतर देखभाल के रास्ते भी बनते हैं। उन्होंने कहा कि चर्चाओं के दौरान मेडिकल वैल्यू ट्रैवल एक प्रमुख विषय रहा, जहाँ अंतरराष्ट्रीय मरीज भारत के विशेषज्ञ डॉक्टरों, उन्नत तकनीक और संगठित अस्पताल प्रणालियों पर भरोसा जता रहे हैं। डॉ. अरोड़ा के अनुसार, इन संवादों में अस्पताल-से-अस्पताल सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई, जिनमें क्लिनिकल ट्रेनिंग, सेकंड ओपिनियन, टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ और इलाज के बाद की देखभाल शामिल है। उन्होंने कहा कि इस तरह का सहयोग इलाज की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और उपचार परिणामों को और बेहतर बनाने में सहायक होता है।

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