चर्चा-ए-आम

इस बार खूब गर्माएगा शीतकालीन सत्र

कमल सेखरी

लोकसभा में आरंभ हुआ शीतकालीन सत्र का पहला दिन सत्ता दल और विपक्षी दलों के बीच छिड़े भारी हंगामे के कारण स्थगित करना पड़ा। इस बार का शीतकालीन सत्र पिछले मानसून सत्र से कहीं अधिक हंगामे वाला होने जा रहा है। इस बार के शीतकालीन सत्र में बकाया लगभग डेढ़ दर्जन सत्ता दल के प्रस्तावों के अलावा विपक्षी दलों के जो प्रमुख प्रस्ताव सदन में रखे जाने हैं उन पर अधिक शोर शराबा मचने के आसार अभी से नजर आ रहे हैं। विपक्षी दल एसआईआर और वोट चोरी के मामले को प्रमुखता से उठाना चाहता है जबकि सत्ता दल अपने 14 अन्य प्रस्तावों के साथ वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत की मंजूरी सदन में दिलवाने का पुरजोर प्रयास करने में जुटा है और वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल वंदेमातरम गीत को राष्ट्रीय गीत बनाए जाने का दमखम से विरोध करने के मूड में नजर आ रहे हैं। वंदेमातरम का प्रस्ताव जो सदन में रखा जाना है उस पर सदन में बहस शुरू होने से पहले ही देशभर में सियासी बहस शुरू हो गई है। बीते दिन जमीयत-उलेमा-ए हिन्द के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने भोपाल में उलेमाओं के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए वंदेमातरम गीत से परहेज रखने की पैरवी की है। मौलाना के इस संबोधन के बाद भाजपा के नेता पूरी तरह से भड़क उठे और उन्होंने मौलाना के खिलाफ कई तरह के आरोप लगाते हुए उन्हें राष्ट्रविरोधी करार दिया और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही। वंदेमातरम को लेकर जो सियासी सरगर्मियां पूरे देश में एक बहस बनकर चल पड़ी हैं उसका इम्तिहान भी इस बार के लोकसभा के शीतकालीन सत्र में होने जा रहा है। इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं में बहस पुरजोरता से होगी लेकिन सत्ता दल बहुमत के आधार पर जीत जाएगा। वहीं साथ-साथ एसआईआर, वोट चोरी और बीएलओ की आत्म हत्या और मौतों को लेकर विपक्ष जोरदार बहस करने के मूड में नजर आ रहा है लेकिन सत्ता पक्ष इस मामले को चुनाव आयोग जैसी स्वायत: संस्था से जुड़ा मामला बताकर इस पर बहस करने से बचना चाहता है। मुमकिन है विपक्ष एसआईआर का नाम बदलकर अपने पक्ष के प्रस्ताव को इलेक्ट्राल रिफार्म यानी चुनाव सुधार प्रक्रिया के नाम से सदन में रख सकता है। यह मामला यहां तक भी जा सकता है कि विपक्षी दल चुनाव सुधार प्रक्रिया के आधार पर वोट चोरी और ईवीएम तक के मामलों को गर्माकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सदन में महाभियोग भी लाने का प्रस्ताव रख दे। इस प्रस्ताव को लाने में मात्र 50 सांसदों की लिखित अपील होने का नियम है जो आराम से पूरा किया जा सकता है। हालांकि महाभियोग का यह प्रस्ताव सदन में गिरना तय है लेकिन अपनी बात को सदन के माध्यम से देश के अवाम तक पहुंचाने का विपक्ष पर एक यही विकल्प शेष है। इस बहाने ही चुनाव आयोग के खिलाफ सभी बातें सदन में रखी जा सकती हैं। इस बार की लोकसभा की कार्रवाई 19 दिसंबर तक चलनी है लेकिन हर दिन पूरी सरगर्मी से भरा होगा यह तय है।

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