चर्चा-ए-आमस्लाइडर

राहुल के खिलाफ खड़े हुए 176 बुद्धिजीवी !

कमल सेखरी

देश के 176 बुद्धिजीवियों ने एक संयुक्त पत्र लिखकर केन्द्र सरकार से मांग की है कि वो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के प्रमुख नेता राहुल गांधी के खिलाफ तुरंत कोई कार्रवाई करें क्योंकि उनके व्यवहार और सार्वजनिक रूप से लगाए जा रहे आरोपों से देश के लोकतंत्र को खतरा पैदा हो रहा है। इस पत्र में यह भी लिखा गया कि राहुल गांधी देश के मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ रह रहकर जो आरोप लगा रहे हैं उससे देश की चुनाव प्रणाली के प्रति जनविश्वास खंडित हो रहा है जो देश के लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है। इस पत्र को लेकर कांग्रेस के विरोधी दल काफी उत्साहित हैं और यह आरोप लगा रहे हैं कि देश का बुद्धिजीवी वर्ग राहुल गांधी के ऐसे राजनीतिक आचरण के खिलाफ है जिसके चलते देश की फिजा खराब हो रही है लिहाजा राहुल गांधी को तुरंत ही अपने इस तरह के राजनीतिक व्यवहार पर अंकुश लगाना चाहिए और देश के लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने के प्रयासों से बचना चाहिए। इन 176 बुद्धिजीवियों में कई सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त जज हैं इसके अलावा रॉ के कई अधिकारियों व कई पूर्व आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं और इनमें कुछ साहित्यकार तथा कई वरिष्ठ पत्रकार भी शामिल हैं। ये शिकायतकर्ता जो देश में लोकतंत्र को बचाने के लिए इतनी गंभीरता से चिंतित नजर आ रहे हैं उन्होंने अपने इस संयुक्त हस्ताक्षरों वाले पत्र में कहीं यह नहीं लिखा कि राहुल गांधी जो आरोप लगा रहे हैं वो गंभीर हैं और उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि ये आरोप झूठे पाए जाते हैं तो आरोप लगाने वाले राहुल गांधी पर
गंभीर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। यदि ये 176 राष्टÑभक्त अपने इस शिकायत पत्र में मात्र एक लाइन भी ऐसी लिख देते कि मामले की जांच होनी चाहिए तो उनकी यह गंभीरता और चिंता निष्पक्ष मानी जाती और उनके राष्टÑप्रेम पर कोई प्रश्नचिन्ह भी नहीं लगता। हालांकि यह मामला गंभीर है और देश के हर चिंतनशील नागरिक को इस पर चिंता भी प्रकट करनी ही चाहिए लेकिन निष्पक्षता इसी में है कि आरोपों की जांच हो और आरोप गलत पाए जाने पर आरोप लगाने वाले के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो। परंतु दूसरी ओर यह भी एक सत्य है कि यदि आरोप सही हैं तो चुनाव आयोग को भी कानूनी दायरे के कठघरे में खड़ा किया जाना चाहिए। यह न्याय संगत नहीं माना जा सकता कि मुख्य चुनाव आयोग एक स्वायत:संस्था है और इसे स्वतंत्रता अनुसार हर तरह के फैसले लेने का स्वतंत्र अधिकार है जिसे चुनौती नहीं दी जा सकती। देश में प्राकृतिक न्याय को भी जीवित रख्रने का प्रावधान है जिसे हम दरकिनार नहीं कर सकते लिहाजा उसके तहत देश के किसी भी नागरिक को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और मुख्य चुनाव आयुक्त या फिर देश के अन्य जांच एजेंसियों के खिलाफ आरोप लगाने की स्वतंत्रता है, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए तभी देश में जनतंत्र जीवित नजर आएगा। लिहाजा उन 176 देश के प्रमुख लोगों की शिकायत पर गौर तो करना ही चाहिए लेकिन उनके आरोपों पर कोई भी कार्रवाई करने से पहले लगाए गए आरोपों के आधार की प्रमाणिकता की भी निष्पक्षता से जांच की जानी चाहिए। वरना कांग्रेस का यह पक्ष भी सही माना जा सकता है कि इन 176 बुद्धिजीवियों में अधिकांश वो रिटायर्ड अंकल हैं जिन्हें मोटी पेंशन की रकम से सरकार से मिल रही है और ऐसे साहित्यकार और पत्रकार भी आवाज मिला रहे हैं जिन्हें आवास सहित अन्य कई सरकारी सुविधाएं नियमित प्राप्त हो रही हैं।

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