बिहार चुनाव में होगा महासंग्राम !

कमल सेखरी
समूचे देश में निरंतर और नियमित छिड़े राजनीतिक महाभारत के बीच अब जो बिहार का विधानसभा चुनाव अगले महीने होने जा रहा है वो देश में अब तक का सबसे बड़ा सियासी महासंग्राम बनकर सामने आएगा ऐसा अधिकांश राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है। अब जब तक हमारे ये विचार पाठकों तक पहुंचेंगे तब तक देश का चुनाव आयोग बिहार विधानसभा का चुनाव घोषित कर चुका होगा। आगामी 22 नवंबर 2025 से पहले बिहार में नई सरकार का गठन होना है लिहाजा चुनाव 15 नवंबर तक पूरे करा लिए जाएंगे। पिछले कुछ समय से बिहार के चुनावी माहौल में जो कुछ भी देखने को मिल रहा है वो निसंदेह अब तक देश में हुए अन्य सभी विधानसभा चुनाव से अलग हटकर तो है ही साथ ही परिस्थितियां कुछ ऐसी भी बना रहा है कि यह चुनाव देश का एक सबसे चर्चित और ऐतिहासिक चुनाव प्रमाणित होगा। चुनावी मैदान में उतर रहे लगभग सभी दल यह कहते नजर आ रहे हैं कि दिवाली से पहले वो कोई बहुत बड़ा बम विस्फोट करने जा रहे हैं। आरजेडी के बड़े नेता तेजस्वी यादव मीडिया में कह चुके हैं कि वो जल्द ही कोई बड़ा एटम बम छोड़ने वाले हैं। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी भी कहते नजर आ रहे हैं कि वो जल्द ही बड़े सबूतों के साथ सत्ता दल पर हाईड्रोजन बम से हमला करेंगे। वहीं इस चुनाव में तीसरी पार्टी बनकर उभर रहे जन स्वराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर जिन्होंने अभी हाल में भाजपा और जेडीयू के कुछ बड़े नेताओं को लेकर भ्रष्टाचार के कई बम विस्फोट किए हैं वो भी यह कहते नजर आ रहे हैं कि जल्द ही वो सत्ता दल के खिलाफ कोई बड़ा बम विस्फोट करेंगे। लिहाजा दिवाली से पहले होने जा रहे कुछ ऐसे कथित बम विस्फोटों का बिहार की राजनीति और देश के सियासी माहौल पर क्या असर पड़ेगा यह अगले कुछ दिनों में सामने आ जाएगा। लेकिन फिलहाल तो ये नजर आ रहा है कि बिहार में होने वाले इन चुनाव को लेकर सीट बंटवारे पर ही एनडीए और महागठबंधन के बीच भी सियासी आतिशबाजी होती नजर आ रही है। भाजपा और जेडीयू के बीच कहने और दिखाने को तो सबकुछ सामान्य चल रहा है लेकिन अंतरद्वंद सीट बंटवारे को लेकर चरमता पर पहुंचता नजर आ रहा है वहीं भाजपा की इच्छा और प्रयास इस बात को लेकर भी हैं कि अगर परिस्थितियां अनुकूल बनती हैं तो भाजपा बिहार में नीतीश कुमार को दरकिनार कर अपने दल का ही कोई मुख्यमंत्री बना दे। इसको लेकर भाजपा का पहला मन उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा को लेकर है क्योंकि वो आरएसएस की पृष्टभूमि से जुड़े हैं और भाजपा के सबसे विश्वसनीय पात्र हैं। कांग्रेसी नेताओं का यह भी आरोप है कि भाजपा के इशारे पर ही जेडीयू के वरिष्ठ मंत्री अशोक चौधरी, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मंत्री मंगल पांडेय के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगवाए गए हैं ताकि कल विजय सिन्हा का रास्ता सुगमता से साफ हो सके। नीतीश कुमार के खिलाफ जो और अन्य आरोप लगाए जा रहे हैं जिसमें उनके अस्वस्थ और अचेत होने की भी बातें की जा रही हैं वो भी एनडीए के अंदर से ही निकलकर आ रही हैं। एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर जीतनराम मांझी और चिराग पासवान भी असंतुष्ट नजर आ रहे हैं वो जितनी सीटें मांग रहे हैं उतनी एनडीए देने को तैयार नहीं हैं। महागठबंधन में भी कांग्रेस और राजद के बीच सीट बंटवारे को लेकर समन्वय भंग होने की संभावना भी बन सकती है। बिहार चुनाव को लेकर मतदाता पुनरीक्षण सूची भी जो तैयार की गई है उस पर भी विपक्षियों के गहरे आरोप बनकर सामने आ सकते हैं। कुल मिलाकर बिहार में मौजूदा सत्ता दल फिर से वापसी के जो मापदंड अपना रहा है और महागठबंधन के नेता सत्ता में आने के लिए जो जोर आजमाईश कर रहे हैं उन्हें देखते हुए ऐसा नजर आ रहा है कि बिहार विधानसभा के इस बार के चुनाव कोई बड़ा गुल खिला सकते हैं। मौजूदा हालात में ये चुनाव बड़ी हिंसा को भी जन्म दे दें तो उससे भी इनकार नहीं किया जा सकता।


