बच्चों को ये कैसी शिक्षा दे रहे हैं भाजपा के नेता

कमल सेखरी
आज के आधुनिक और विकासशील भारत में हम अपने स्कूली बच्चों को और वो भी ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूली बच्चों को कैसी शिक्षा देना चाहते हैं। माना हमारी आज की राजनीतिक नीतियां पौराणिक और परंपरागत धार्मिक आस्थाओं से जुड़ी हैं तो क्या हम देश को उसी नीति के आधार पर आगे ले जाना चाहते हैं लेकिन हम छोटे मासूम स्कूली बच्चों को क्या बता और सिखा रहे हैं जो आज के आधुनिक भारत का दावा करने वाली सत्ता से एकदम विमुख और विपरीत है। अभी बीते दिन भाजपा के चार बार के सांसद केन्द्र में मंत्री रह चुके अनुराग ठाकुर ने अपने संसदीय क्षेत्र हमीरपुर के एक स्कूल में बच्चों को जो भाषण दिया वो चर्चा का विषय तो बना ही हुआ है साथ ही विकसित राष्ट्र की ओर बढ़ने के हमारे सियासी दावों पर भी प्रश्न चिन्ह लगा देता है। अनुराग ठाकुर ने हिन्दी माध्यम के उस स्कूल के बच्चों से जब यह पूछा कि बच्चों बताओ अंतरिक्ष में पहुंचने वाले कौन लोग हैं। बच्चों ने हाल ही में अंतरिक्ष से लौटे सुधांशु शुक्ला का नाम बताया और एक अध्यापक ने उसमें राकेश शर्मा का नाम भी जोड़ दिया। लेकिन अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह गलत है अंतरिक्ष में पहुंचने वाले सबसे पहले अंतरिक्ष यात्री हनुमान जी थे। बच्चे यह सुनकर हैरान हुए लेकिन अनुराग ठाकुर ने हनुमान जी की अंतरिक्ष यात्रा के संबंध में पूरी व्याख्या बच्चों को सुना दी। अब अगर कल इन बच्चों की परीक्षा में ऐसा कोई प्रश्न आ गया तो क्या बच्चे अंतरिक्ष में पहुंचने वालों में हनुमान जी का नाम उत्तर पुस्तिका में लिखकर आएंगे। क्या उन्हें ऐसा लिखने पर अंक दिए जाएंगे? इतना ही नहीं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐसे ही स्कूली बच्चों से संवाद करते हुए उन्हें यह जानकारी दी कि पूरे विश्व में विमान बनाने वालों में सबसे प्रथम नाम लंकाधीश रावण का है। रावण ने हजारों साल पहले पुष्पक विमान का इस्तेमाल कर सीता का हरण किया। आज के भारत में क्या यह बच्चों को जानकारी देना उचित होगा कि विमानों का निर्माण भारत में या विश्व में आधुनिक विज्ञान की कड़ी से ही जुड़ा नहीं है विमान का निर्माण तो हजारों साल पहले लंकापति रावण ने कर दिया था। इसी के साथ ही श्री चौहान ने यह भी बताया कि वो जो ब्रह्Þमास्त्र मिसाइल और अन्य मिसाइलें जिससे हमने अभी हाल ही में पाकिस्तान के आतंकी अड्डों को उड़ाया है वैसी मिसाइलों का निर्माण और चलन राम राज्य के दौरान महाभारत के युद्ध में भी हुआ था, उस समय ऐसी शक्तिशाली मिसाइलें तीरकमान से तीर के रूप में छोड़ी जाती थीं जो दुश्मनों पर भारी प्रहार करने के साथ लौटकर भी वापस आ जाती थीं। ऐसे ही एक अन्य भाजपा के बड़े नेता ने अपने एक सार्वजनिक बयान में यह कहा कि आज का विज्ञान कितना भी विकसित हो जाए लेकिन हमारी देवी देवताओं के चमत्कार के समक्ष वह छोटा ही पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी भले ही विश्व के बड़े-बड़े सर्जन कर रहे हों लेकिन हमारे शिव शंकर सबसे बड़े सर्जन थे। शिव भोले ने तो मानव शरीर पर हाथी का सिर मय सूंड के लगाकर सबसे बड़ी कारगर सर्जरी की मिसाल बनाई है।
हमें इन उपरोक्त सभी विषयों पर भाजपा के बड़े नेताओं ने जो बयान दिये और मासूम स्कूली बच्चों को शिक्षा के रूप में ज्ञान की बात बताई उन पर गंभीरता से सोचना चाहिए। हमारी सरकार जो पिछले एक दशक में आधुनिक विज्ञान और डिजिटल की दुनिया में सबसे अधिक और तीव्र गति से आगे बढ़कर काम करने का दावा कर रही है तो क्या उनके नेताओं के ऐसे बयानों से उन सभी दावों पर प्रश्न चिन्ह नहीं लग जाता। हमारी पौराणिक परंपरागत इतिहास से जुड़ी धार्मिक आस्थाओं का मनन एक अलग विषय और बदलते युग में समूचे विश्व और भारत में जो वैज्ञानिक अविष्कार हुए हैं वो एक अलग क्षेत्र है। हम आस्थाओं के जुड़ाव को परिवर्तित आधुनिक वैज्ञानिक युग से जोड़कर कैसे तुलना कर सकते हैं। क्या हम अपनी एनसीआरटी की किताबों में बच्चों को वही पढ़ाने जा रहे हैं जो हमारे नेता अपने उपदेशों में बच्चों को समझा रहे हैं। हम अगर भारत को विकसित देशों की कतार में खड़ा करके दुनिया की एक बड़ी आर्थिक शक्ति बनाना चाहते हैं तो हम आस्थाओं के काल्पनिक पौराणिक इतिहास में अपने बच्चों और नवयुवकों को कैसे लेकर जा सकते हैं। भारत बदल रहा है तो सत्ता से जुड़े नेताओं को अपने बयान भी बदलने पड़ेंगे। सभी सियासी नेताओं के बच्चे देश के अंग्रेजी स्कूलों में और दुनियाभर के प्रख्यात कालेजों में पढ़ेंगे और हम ग्रामीण स्कूलों में बच्चों को ऐसी शिक्षा देंगे तो भारत कैसे बदलेगा। हमें जो शिक्षा और ज्ञान सियासी नेताओं के बच्चे अपनी शिक्षा में ले रहे हैं हमें वही शिक्षा और ज्ञान अपने गरीब ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूली बच्चों को देना भी होगा। तभी भारत एकजुट होगा, शक्तिशाली होगा और विश्व में अगली कतार में खड़ा होगा।

