चर्चा-ए-आमस्लाइडर

राहुल का एटम बम सत्य या भ्रम!

कमल सेखरी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कल जो प्रेस कान्फ्रेंस करके कर्नाटका के बैंगलुरु लोकसभा क्षेत्र की महादेवपुरा विधानसभा सीट पर बरती गई चुनावी आंकड़ों में गड़बड़ी को मीडिया के समक्ष सुबुतों के साथ रखा। राहुल ने पहले अंग्रेजी में फिर हिन्दी भाषा में लगभग 31 मिनट के अपने संबोधन में पर्दे पर प्रोजेक्टर के माध्यम से 40 हजार से अधिक मतों की हेराफेरी के सुबूत क्रमवार सामने रखे। राहुल गांधी का कहना था कि कर्नाटका लोकसभा चुनाव में बैंगलुरु की लोकसभा सीट हम चुनाव आयोग द्वारा की गई इसी वोट चोरी के कारण हारे। उनका कहना था कि बैंगलुरु लोकसभा सीट से जुड़ी 7 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस 6 सीटों पर चुनाव जीती लेकिन महादेवपुरा की सीट पर सवा लाख से अधिक मतों से चुनाव हारी जिसकी वजह से हमें बैंगलुरु की लोकसभा सीट नहीं मिल पाई। उन्होंने अपने सुबुतों के आंकड़े में फर्जी नाम और पते पर बनी हजारों वोट के कुछ सुबूत दिखाए इसके अलावा प्रपत्र 6 के माध्यम से युवा मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया में भी बरता गया फर्जीवाड़ा मीडिया के सामने रखा जिसमें पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं में कइयों की आयु 85 से 95 वर्ष के बीच थीं। इसके अलावा भी राहुल गांधी ने चुनाव आयोग द्वारा उन्हें सौंपी गई मतदाता सूची में और भी कई तरह के फर्जीवाड़े होने के साक्ष्य मीडिया के सामने पेश किए। जैसा अक्सर होता है वैसा ही हुआ। भाजपा के कई बड़े नेताओं ने राहुल गांधी के सभी आंकड़ों को एक सिरे से नकारते हुए उन सभी को फर्जी और मनगढ़ंत बताया। इसी दौरान जो चुनाव आयोग कई महीनों से चुनाव में बरती जा रही अनियमितताओं को लेकर विपक्ष की किसी बात को सुनने को तैयार नहीं था उसी चुनाव आयोग ने राहुल गांधी की प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान ही ट्वीट कर कांग्रेस के आंकड़ों को गलत बताया और एक शपथ पत्र सोशल मीडिया पर डालकर राहुल गांधी से कहा कि वो प्रेसवार्ता में लगाए गए अपने आरोपों को सत्यापित कर शपथ पत्र के साथ कल तक चुनाव आयोग में दाखिल कर दे। राहुल गांधी ने कहा मैंने अपनी बात जनता के दरबार में रख दी है अब चुनाव आयोग का दायित्च है कि वो मेरी बताई गई बातों को जांच कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करे। वैसे भी देश का कानून यह बात कहता है कि अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से बयान देकर गलत आंकड़े पेश करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई संभव है। चुनाव आयोग को भी चाहिए कि राहुल गांधी ने प्रेसवार्ता में जो सुबूतों के साथ आरोप लगाए हैं चुनाव आयोग उसकी तुरंत जांच कर उसके सही होने या गलत होने की रिपोर्ट देश की जनता के सामने सार्वजनिक करे। यह कैसे संभव है कि आप अपराध के किसी मामले को लेकर टेलीफोन पर या स्वयं थाने जाकर अपनी प्राथमिकी रिपोर्ट दर्ज कराते हैं तो आपसे यह कैसे कहा जा सकता है कि आप अपने आरोपों को शपथ पत्र के साथ सत्यापित करकर पुलिस में जमा कराएं। सूचना मिलने पर ही कार्रवाई आरंभ हो जानी चाहिए, अगर किसी ने शरारतन या फिजा खराब करने के लिए गलत आरोप लगाए हैं तो कानून में प्रावधान है कि उस व्यक्ति को छह महीने तक के लिए जेल भी भेजा जा सकता है। यह पूरे देश की जनता के हित का मामला है और लोकतंत्र के वजूद पर सवाल भी उठाता है कि हमारा चुनाव आयोग फर्जीवाड़ा करके वोटों की चोरी कर रहा है और फर्जी तरीके से देश की सरकारें बनवा रहा है। इससे गंभीर आरोप और कोई हो नहीं सकता अगर यह प्रमाणित हो जाता है तो लोकतंत्र ही खतरे में आ जाएगा। अगर आरोप झूठे लगाए जा रहे हैं तो देशद्रोह का मामला आरोप लगाने वाले नेता या उसके दल पर लगता है और उन्हें इस कुकृत्य के लिए दंडित किया ही जाना चाहिए। चुनाव आयोग को चाहिए कि जो भी मतदान होता है उसमें मतदान करने वाले मतदाताओं की सूची डिजिटल फारमेट पर देश के सामने रखी जाए ताकि आरोप लगाने वाला कोई भी नेता या दल गलत आरोप ना लगा सके। अब राहुल ने बैंगलुरु लोकसभा क्षेत्र की महादेवपुरा विधानसभा सीट के जो आंकड़े मीडिया के माध्यम से लोगों के सामने रखे हैं चुनाव आयोग को चाहिए कि वो महादेवपुरा विधानसभा सीट पर हुए मतदान में शामिल रहे मतदाताओं की डिजिटल सूची अपनी वेबसाइट पर तुरंत सार्वजनिक करे नहीं तो जो आरोप लगाए जा रहे हैं वो सत्य ही माने जाएंगे।

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