चर्चा-ए-आमस्लाइडर

नौ जुलाई को बिहार में होगा बड़ा आंदोलन

  • आंदोलन के आगे झुक भी सकता है चुनाव आयोग
  • बिहार से खड़े होते रहे हैं देश के बड़े आंदोलन
  • चुनाव आयोग ने यू टर्न लिया तो उसे पड़ेगा महंगा

कमल सेखरी
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले कराए जा रहे मतदाता पुनरीक्षण कार्य का विपक्षी दलों द्वारा किया जा रहा विरोध रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इंडिया महागठबंधन से जुड़े तीनों दल कांग्रेस, आरजेडी और लेफ्ट पार्टी जो मिलकर महागठबंधन के तहत चुनाव लड़ रहे हैं वो सभी मुख्य चुनाव आयोग के खिलाफ पुरजोरता से लामबंद हो रहे हैं। आरजेडी ने नौ जुलाई को बिहार में चक्का जाम आंदोलन की घोषणा की है। तेजस्वी यादव का कहना है कि उस दिन पटना सहित बिहार के सभी बड़े शहरों में महागठबंधन के कार्यकर्ता सड़कों पर चक्का जाम करेंगे और वाहनों की आवाजाही को रोकेंगे। तेजस्वी का कहना है कि अब मतदाता पुनरीक्षण कार्य को पूरा करने में केवल तीन सप्ताह का समय बाकी रह गया है और साढ़े तीन करोड़ से अधिक मतदाताओं की जांच होनी है और लगभग आठ करोड़ मतदाताओं को नया वोटर आईडी फार्म भरना अनिवार्य होगा जो तीन सप्ताह में होना संभव ही नहीं है। विपक्षी दलों का कहना है कि जांच जो किसी सूरत में पूरी हो ही नहीं सकती उसे पूरा करने की प्रक्रिया महज दिखावा है और चुनाव आयोग का सत्ता दल के पक्ष में मतदाताओं के साथ एक खुला षडयंत्र है। महागठबंधन के नेताओं का आरोप है कि जांच का लक्ष्य पहले से निर्धारित हैऔर किन मतदाताओं को मतदाता सूची से अलग करना है यह भी पहले से तय है। तेजस्वी यादव ने मीडिया को बताया कि नौ जुलाई को महागठबंधन के सभी दल पूरा जोर लगाकर ऐसी स्थिति पैदा करने की कोशिश करेंगे जिससे मजबूर होकर चुनाव आयोग को अपना यह फैसला वापस लेना पड़े। बिहार वैसे भी देश के बड़े-बड़े आंदोलनकारियों की धरती माना जाता रहा है, गौतमबुद्धा और महावीर प्रसाद की इस धरती पर जहां से शांति का संदेश पूरे विश्व को जाता है बिहार की उसी धरती से कर्पूरी ठाकुर, राममनोहर लोहिया, जय प्रकाश नरायण, चन्द्रशेखर, रामविलास पासवान, शरद यादव जैसे आंदोलनकारी भी निकलकर आए हैं जिन्होंने इन्दिरागांधी जैसी प्रधानमंत्री की कुर्सी हिलाकर उन्हें आपात स्थिति लागू करने पर मजबूर किया, अब नौ जुलाई का यह आंदोलन क्या रूप लेता है यह अलग बात है लेकिन अभी कुछ दिन पहले वक्फ बोर्ड कानून के खिलाफ पटना के गांधी मैदान में आरजेडी के आह्वान पर बुलाए गए आंदोलन में 5 लाख से अधिक लोग उपस्थित थे। यदि महागठबंधन के सभी दलों की पूरी शक्ति मिलाकर 9 जुलाई का आंदोलन कोई बड़ी शक्ल लेता है तो संभावना है कि चुनाव आयोग को अपना यह मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम का आदेश भी वापस लेना पड़ जाए।

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