उंगलियां काटो पर सीने भी छलनी करो

कमल सेखरी
पिछले दो दिनों में भारतीय सीमा में बाहरी आतंकियों को सहयोग कर रहे कश्मीर निवासी जिन्हें स्थानीय आतंकी के नाम से जाना जाता है उनके घरों को हमारी फौज ने बम के धमाकों के साथ उड़ा दिया। इससे दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार की एक जनसभा में बड़े खुले शब्दों में कहा था कि हम पहलगाम में नरसंहार करने वाले आतंकियों को छोड़ेंगे नहीं। उन्हें ऐसी सजा देंगे जो उनकी कल्पना से भी बाहर होगी। उनके ठिकानों को नेस्तानाबूद कर उनकी आखिरी निशानी को भी मिट्टी में मिला दिया जाएगा। अब हमारे प्रधानमंत्री ने जो घोषणा की उसके मुताबिक अगले दिन से ही आतंकियों के स्थानीय ठिकानों को बमों से उड़ा दिया गया। लेकिन आतंकवादियों को कठोर से कठोर सजा दे भी दी जाए तो उसका असर दुश्मन देश में आम आवाम पर क्या पड़ता है और वहां की राजनीति पर भी इस कठोर कार्रवाई से कोई लगाम कैसे लगाई जा सकती है। अब तक यह रहा है। चाहे वो पुलवामा में हमारे 40 सैनिकों को बमों के धमाकों से उड़ा दिया गया हो या फिर उरी में हमारे कई सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया गया हो और अब पहलगाम में हमारे 28 सैलानियों की नृशंसता से नरसंहार कर हत्या कर दी गई। आतंकियों ने अधिकांश हरकतें ऐसी की हैं जिससे हमारा पूरा देश दुखी हुआ है,उसे पीड़ा पहुंची है और सैकड़ों परिवार बिलखकर रोये हैं। हम अगर आतंकवादियों की ऐसी हैवानियतों वाली घटनाओं का केवल आतंकवादियों को ही नेस्तानाबूद करके उसे मुंहतोड़ जवाब बता रहे हैं लेकिन इन आतंकियों को मारने पर या उनके घरों को उड़ा देने पर पाकिस्तान के आम आवाम पर या वहां के राजनेताओं पर इसका कोई असर नहीं होता है। वो आतंकी चाहे कश्मीर से जुड़े हों या पाकिस्तान से, दोनों ही सूरत में उनको मारने पर तो उनके पीछे रोने वाला कोई एक व्यक्ति भी नहीं है, ना ही उनके पड़ोस में उनके मारे जाने का दुख किसी को होता है। क्योंकि इन आतंकियों को तो उनके परिवारों ने और समाज ने भी पहले ही बेदखल कर रखा है, लिहाजा हमें भी ऐसा ही कुछ करना चाहिए जिसके करने पर आतंकियों की रूह तो कांपे ही कांपे बकाया पाकिस्तान के आवाम को भी रोना पड़े जैसा हम रह रहकर हिन्दुस्तान में रोते रहे हैं। हमने सिंधु नदी के पानी को रोकने का जो फैसला किया है वो सबसे असरदार फैसला है। पाकिस्तान का आवाम और सियासत हमारे उस फैसले के अमल में आते ही आंसू बहा-बहाकर रोएगी। हम जो और कई पाबंदियां व्यवसायिक तौर पर, लोगों की आवाजाही पर और राजनायिक सेवाओं को बंद करने पर लगा रहे हैं वो भी कारगर कदम हैं। लेकिन अब हमें और सतर्क होकर अपनी फौजी ताकतों और हवाई क्षमताओं को बड़ी तेजी से मजबूत करना होगा क्योंकि दूसरी ओर चीन ने पाकिस्तान को कुछ लड़ाकू विमान और हथियार सप्लाई करने की सहमति दे दी है। अगले सप्ताह चीन और पाकिस्तान की फौजें मिलकर पाकिस्तान की सीमाओं के अंदर संयुक्त युद्ध अभ्यास की गतिविधियां आरंभ करने जा रही हैं, इससे स्पष्ट है कि चीन युद्ध होने की स्थिति में हमें अपनी सीमाओं पर तो तंग कर ही सकता है साथ ही पाकिस्तान को भी युद्ध में हर तरह की मदद दे सकता है। लिहाजा ऐसी स्थिति में पुरजोरता से पहल करने वाले की ही अंतिम जीत होती है। अभी तक आतंकियों के ठिकाने उड़ाकर हम केवल उंगलियां काटने का काम कर रहे हैं, जबकि हमें खुलकर उनके सीने छलनी करने होंगे। इसके साथ ही केन्द्र सरकार को अपने भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं की बयानबाजी पर अंकुश लगाना होगा जो रह रहकर ऐसे बयान दे रहे हैं जिससे देश में हिन्दू-मुस्लिम के बीच सौहार्द और बिगड़ सकता है। अगर यह आन्तरिक तनाव इन बड़बोले नेताओं के कारण बढ़कर सड़कों पर कोई संकट खड़ा करने की स्थिति में आ जाएगा तो हमें आन्तरिक सुरक्षा की भी बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे माहौल में जब सभी विपक्षी दल भेदभाव भुलाकर साथ खड़े होने का आश्वासन दे रहे हैं तो भाजपा को उनका स्वागत करते हुए अपने पुराने रवैये को भी बदलना पड़ेगा।


