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रामा मेडिकल कॉलेज में कोर कमेटी की बैठक आयोजित

  • डीटीओ का टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में सहयोग का आह्वान
  • कालेज प्रबंधन को शीघ्र डीआरटीबी सेंटर संचालित करने के निर्देश दिए
  • ओपीडी में आने वाले मरीजों की टीबी स्क्रीनिंग बढ़ाने पर दिया जोर
    गाजियाबाद।
    पिलखुवा स्थित रामा मेडिकल कॉलेज में जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) ने कोर कमेटी के साथ बैठक की और कॉलेज प्रबंधन का टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में आगे बढ़कर सहयोग करने का आह्वान किया। डीटीओ ने शीघ्र ही शासन के निर्देश के मुताबिक कॉलेज में डीआरटीबी सेंटर के संचालन के निर्देश दिए ताकि मेडिकल कॉलेज में आने वाले बिगड़ी टीबी ( ड्रग रेजिस्टेंट टीबी) के रोगियों को भर्ती कर उपचार दिया जा सके। बैठक में रामा मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डा. विनोद प्रेम सिंह, उप प्रधानाचार्य डा. अमित कुमार, वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डा. राजेंद्र सैनी, डा. नितिन कुमार पाठक, बाल रोग विशेषज्ञ डा. प्रियंका, डा. स्वीकृति, डा. सार्थक और डा. कपिल कुमार आदि मौजूद रहे। बैठक में जिला क्षय रोग अधिकारी डा. सिंह ने मेडिकल प्रबंधन से अपेक्षा की कि राज्यपाल की पहल पर राज्य में चल रहे क्षय रोगियों को गोद लेकर पुष्टाहार और भावनात्मक सहयोग उपलब्ध कराने के कार्यक्रम में हाथ बटाए। इसके साथ ही कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन कार्यक्रम के तहत छाती रोग विभाग अपने क्षेत्र में एक गांव चिन्हित कर उसे गोद ले और क्षय रोग विभाग की मदद से पूरे गांव की स्क्रीनिंग करे और यदि किसी ग्रामीण में टीबी के लक्षण मिले तो तत्काल उपचार उपलब्ध कराए और गांव को टीबी मुक्त करने तक यह मुहिम जारी रखे। इसके लिए क्षय रोग विभाग भी हर संभव मदद करेगा। 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने के प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने में कॉलेज की यह पहल मील का पत्थर साबित होगी।
    जिला पीपीएम कोआॅर्डिनेटर सुशील चौधरी ने बताया – कोर कमेटी की बैठक में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को जिला क्षय रोग अधिकारी की ओर से ओपीडी में आने वाले रोगियों की टीबी स्क्रीनिंग बढ़ाने और मिलते – जुलते लक्षण वालों की जांच बढ़ाने के भी निर्देश दिए गए हैं। सरकारी और निजी क्षेत्र संयुक्त रूप से टीबी की स्क्रीनिंग और जांच बढ़ाएगा तो कम समय में अधिक रोगियों की पहचान की जा सकेगी और कोविड की तरह संक्रमण पर काबू करने का यही बेहतर तरीका है। समय से उपचार शुरू होने पर क्षय रोगी अन्य लोगों को संक्रमण नहीं दे पाएंगे और सभी के सहयोग से टीबी मुक्त भारत का सपना साकार हो सकेगा।

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