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ओजोन लेयर के पतला होने से संपूर्ण मानव जाति व पर्यावरण को खतरा: आनंद शर्मा

  • विश्व ओजोन दिवस पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन
  • जीव-जंतुओं पर हानिकारण प्रभाव पड़ेंगे: जावेद अहमद
  • उद्योगों के साथ अव्यवस्थित ट्रैफिक सिस्टम है जिम्मेदार: डा.जितेन्द्र नागर
    गाजियाबाद।
    आज विश्व ओजोन दिवस के उपलक्ष्य में राजकुमार गोयल इंस्टीट्यूट आफ टैक्नोलॉजी एवं मैनेजमेंट के सभागार में नेशनल एन्वाइरन्मेंटल साइंस एकडेमी, एन्वाइरन्मेंट एंड सोशल डेवेलपमेंट एसोसिएशन, राजकुमार गोयल इंस्टीट्यूट आफ टैक्नोलॉजी तथा अन्य संस्थाओं द्वारा एन्वाइरन्मेंटल पोलुशन एंड ओजोन लेयर के विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।
    उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि भारत मौसम विभाग दिल्ली के एडिशनल डाइरेक्टर जनरल आनंद शर्मा ने कहा कि मानव क्रिया कलापों से ओजोन लेयर बहुत पतली हो गयी है जिससे सम्पूर्ण मानव जाति एव प्रकृति को खतरा है एवं विनाश के कगार पर है। अगर ओजोन परत अधिक पतली हो गयी तो हानिकारक सूर्य की किरणें पृथ्वी पर आएंगी और जीवन को समाप्त करेंगी। अब समय आ गया है जब हमें अपनी जीवन प्रणाली को बदलना होगा और सतत विकास को अपनाना होगा।
    एनईएसए के अध्यक्ष प्रोफेसर जावेद अहमद ने कहा कि उद्योगों, एयर कंडीशनर एव रेफ्रिजरेटर से निकालनी वाली क्लोरो फ्लोरो कार्बन गैस ओजोन परत का क्षय कर रही है जो अंटार्टिका के ऊपर काफी पतली हो गयी हैं। जिसके सभी जीव जंतुओं पर हानिकारक प्रभाव होंगे।
    ईएसडीए के महासचिव डॉ. जितेंद्र नागर ने दिल्ली- एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर तथा मानव समाज एवं वातावरण पर प्रभाव पर अपना वक्तव्य दिया। डॉ. नागर ने बताया कि गाजियाबाद अनेक बार विश्व रैंकिग में दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर में शुमार रहता है और यहां सर्दियों में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। वायु प्रदूषण में अनेक जहरीले कण होते हैं जो हमारे श्वांस के साथ फेफड़ों मे चले जाते हैं और दमा एव कैंसर जैसी बीमारियों को जन्म देते हैं। गाजियाबाद में प्रदूषण का मुख्य कारण उद्योगों के साथ अव्यवस्थित ट्रैफिक सिस्टम है।
    आरकेजीईटीएम के निदेशक डॉ. राकेश गोयल ने सभी अतिथियों एवं वक्ताओं का स्वागत किया और कहा कि हमारा ऐसे आयोजन करने का उद्देश्य छात्रों को पर्यावरण की समस्याओं से अवगत कराना है।
    कान्फ्रेंस में जेएनयू के प्रोफेसर उमेश चंद्रा कुलश्रेष्ठता, इग्नू से प्रोफेसर बोयीना रूपाणी, डॉ. डी. आर. सौमशेखर, डॉ. बृजेन्द्र पटेरिया, डॉ. अनीता जैन, डॉ. अलका रानी, डॉ. सूरज त्रिपाठी आदि ने अपना वक्तव्य दिया।

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