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हिंदी भाषा हमारी धरोहर है, सर्वस्व है : अरुण कुमार शर्मा

  • नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति की अर्द्धवार्षिक बैठक आयोजित
    गाजियाबाद।
    अल्ट सेंटर में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम) गाजियाबाद की अर्द्धवार्षिक बैठक का आयोजन किया गया। केंद्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला-बीईएल के सहयोग से नराकास (उपक्रम) की यह अर्द्धवार्षिक बैठक एएलटी सेंटर के मुख्य महाप्रबंधक अरुण कुमार शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में नरेंद्र सिंह मेहरा, सहायक निदेशक-राजभाषा विभाग (क्षेत्रीय राजभाषा कार्यान्वयन कार्यालय), जयदीप मजुमदार, कार्यपालक निदेशक-भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, अनूप कुमार राय, मुख्य वैज्ञानिक-केंद्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला, देवी प्रसाद, पी.एन.दोहरे, मोहन सिंह, महाप्रबंधक, एएलटी सेंटर, पी.सी. अवस्थी, महाप्रबंधक- सैंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लि., अनुराग दुबे, स्टील अथॉरिटी आफ इंडिया, एसएन शर्मा, मुख्य संयंत्र प्रबंधक-इंडियन आॅॅयल तथा नराकास (उपक्रम) के सदस्य सचिव ललित भूषण उपस्थित रहे।
    इस बैठक में राजभाषा हिंदी में उत्कृष्ट कार्य के लिए वर्ष 2019-20 के लिए राजभाषा शील्ड पुरस्कार भी वितरित किए गए। प्रथम पुरस्कार भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, द्वितीय पुरस्कार-सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड व केंद्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला तथा तृतीय पुरस्कार-पॉवरग्रिड कॉरपोरेशन आॅॅफ इंडिया को दिया गया है।
    नराकास अध्यक्ष एवं मुख्य महाप्रबंधक अरुण कुमार शर्मा ने कहा कि हिंदी हमारी धरोहर है, हिंदी भारतीय संस्कृति का प्रतिबिंब है। भाषा के रूप में यह एक हीरा है, जिस पर सभी भारतवासियों को गर्व है। हिंदी समन्वय की भाषा है। यह भाषा संपूर्ण भारत को एकता के सूत्र में जोड़ती है। नराकास एक आपसी समन्वय का मंच है जिसके माध्यम से हम आपसी समन्वय स्थापित करके राजभाषा नीतियों की सम्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
    केंद्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला के मुख्य वैज्ञानिक अनूप कुमार राय ने कहा कि हिंदी में वह सार्मथ्य है कि वह आज की तकनीकी के साथ अपना सामंजस्य बैठा रही है। यही कारण है कि हिंदी भाषा हर क्षेत्र में अपना प्रभाव जमा रही है। सरकारी कामकाज में भी हमें हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करना है। राजभाषा के प्रचार-प्रसार हेतु किए जाने वाले प्रत्येक कार्य को करने के लिए तत्पर रहते हैं तथा राजभाषा हिंदी को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए भी कृत-संकल्प हैं।
    राजभाषा विभाग के नियमानुसार नराकास (उपक्रम) की वर्ष में दो बैठकें की जाती हैं। कार्यक्रम का संचालन ललित भूषण, सदस्य सचिव नराकास द्वारा किया गया।

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