स्वास्थ्य

तकनीक के युग में हृदय की देखभाल करना हुआ और आसान: खन्ना

  • विश्व हृदय दिवस पर यशोदा अस्पताल में जांच शिविर आयोजित
    गाजियाबाद।
    विश्व ह्रदय दिवस के अवसर पर कौशांबी स्थित यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में निशुल्क ह्रदय रोग जांच शिविर आयोजित किया गया। शिविर में लगभग सौ लोगों ने अपने हृदय की जांच कराई। हॉस्पिटल के प्रिंसिपल इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. असित खन्ना एवं वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. धीरेन्द्र सिंघानिया ने शिविर में आये मरीजों को देखा एवं ह्रदय रोगों से बचाव के लिए जागरूक किया। शिविर में विभिन्न आरडब्ल्यूए के अध्यक्षों ने भी भाग लिया। शिविर के बाद आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में डॉ.असित खन्ना ने बताया कि 2021 की वर्ल्ड हार्ट डे की थीम यूज हार्ट टू कनेक्ट यानि अपने साथ साथ अपने ह्रदय को भी जुड़ा हुआ रखें। डॉ. खन्ना ने बताया कि अब सरकार ने वैधानिक तरीकों से बहुत सारे डिजिटल एप को मान्यता दे दी है जिनके माध्यम से डॉक्टर एवं मरीज दोनों ह्रदय की देखभाल कर सकते हैं और ह्रदय के रोगों से उपचार में मदद पा सकते है। डॉ सिंघानिया ने बताया कि डिजिटल एप एवं प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से हम विश्व के किसी भी कोने या किसी भी सुदूर गांव में रहकर भी अपने ह्रदय की देखभाल कर सकते हैं और अपने ह्रदय रोग चिकित्सक से संपर्क में रह सकते हैं। डॉक्टरों ने बताया कि ह्रदय को ई-कनेक्ट या डिजिटली कनेक्ट रखने के अनेकों फायदे हैं, जैसे कि हार्ट रेट (ह्रदय गति ) बढ़ने की निगरानी आसानी से की जा सकती है। डॉक्टरों ने बताया कि हार्ट अटैक को अमूमन गैस की परेशानी समझा जाता रहा है लेकिन डिजिटल और इंटरनेट के माध्यम से लोग अब जागरूक हो रहे हैं और वे अपने लक्षणों को डिजिटल एप पर मिलाकर यह निर्णय ले सकते हैं कि उन्हें कार्डियोलॉजिस्ट के पास जाना चाहिए या नहीं। डॉ. सिंघानिया ने कहा यह एक क्रांतिकारी परिवर्तन है जिससे मरीजों को बहुत फायदा पहुंच रहा है। डॉ. असित खन्ना ने कहा कि हमें हृदयाघात से बचने हेतु इमरजेंसी दवाएं और एप, हमेशा पाने पास रखनी चाहिए। यदि हृदयाघात की समस्या लगे तो हमेशा मदद के लिए पुकारना चाहिए और खुद कोई भी जोर जबरदस्ती या भारी काम, ड्राइविंग नहीं करनी चाहिए। जागरूकता व्याख्यान में डॉक्टरों ने बताया कि अव्यवस्थित जीवनशैली, खराब खानपान, चिंता, मोटापे से कई बीमारियां होती हैं। मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल, यूरिक एसिड के साथ ही दिल की बीमारियों का खतरा भी बहुत बढ़ गया है। बदलते समय के साथ युवाओं को भी यह बीमारी अपनी चपेट में ले रही है।

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