क्या भारत पर गहराएगा आर्थिक संकट!

क्या हमारा देश भारत निकट भविष्य में किसी गहरे आर्थिक संकट में घिरने जा रहा है या फिर अभी भी समय है कि हमारे राजनेता मिलकर आपसी सूझ-बूझ से कोई ऐसा रास्ता निकालने में सफल हो पाएँगे जिससे फिलहाल प्रारंभिक स्थिति में चल रहे इस आर्थिक संकट को यहीं कहीं रोका जा सके और इसके संभावित दुष्परिणामों के और अधिक फैलाव से देश को बचाया जा सके। हालांकि यह जानकारी मिली है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के स्वदेश लौटते ही कैबिनेट की विशेष बैठक बुलाई गई है जिसमें हो सकता है कि यह फैसला लिया जाए कि फिलहाल अविलंम प्रभाव से गैस, पैट्रोल और डीजल पर लगाई जा रही भारी डयूटी में कुछ कटौती कि जाए ताकि तेल कंपनियों को हो रहे नुक्सान में कुछ राहत मिलें और आम जनता को भी इस पर भारी किमत न चुकानी पड़े। हालांकि वर्तमान में समस्या जितनी तेल की दरों को लेकर है उससे अधिक गैस, पैट्रोल और डीजल की मात्रा देश मे अधिक उपलब्ध न होने के कारण बनी हुई है। खाड़ी के महायु़द्ध में हालांकि फिलहाल युद्ध विराम चल रहा है लेकिन तेल के जहाजों की समुद्र में आवा-जावी पर लगी रूकावटें अभी पहले जैसी ही बनी हुई है। हमनें अमेरिका के प्रभाव में आ कर अपने देश की तेल आयात नीति बदली और अपने निकट व मित्र देश रूस और ईरान से तेल लेना बन्द किया जो हमे अपेक्षाकृत काफी सस्ता पढ़ता था और झटपट से प्राप्त भी हो जाता था। देश की इतनी बढ़ी आबादी को देखते हुए हमारे देश में पैट्रोलियम की भण्डारण क्षमता ऊँट के मुँह में जीरे के बराबर ही है। हमने गत् माह एक लाख 38 हजार करोड मुल्य का तेल बाहरी देशो से आयात किया और उसमें से 58 हजार करोड का तेल वापिस अन्य बाहरी मुल्कों को निर्यात कर दिया। यह सम्भवतः हमारी नीति की खामियाँ थी। इसी तरह हमनें रूस से आया गैस का एक जहाज सिगांपुर से ही वापस लौटा दिया। ऐसा किसके कहने पर और क्यों किया इसका जवाब अभी तक नही मिल पाया। अब विपक्ष के कई नेतागण सार्वजनिक सभाओं में और अपने मीडिया के बयानों में मोदी सरकार पर दर्जनों आरोप लगाते हुए मोदी सरकार को देश में मंहगाई लाने का दोषी बता रहें हैं। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी अब हर मंच से मोदी सरकार को मंहगाई के गहरे संकट मे झोंकने के आरोप लगा रहें हैं और कह रहा हैं कि वो पिछले दो महीनो से कई बार केन्द्र की सरकार को आगाह कर चुकें हैं कि देश पर भारी अर्थिक संकट आने जा रहा है लेकिन मोदी सरकार को चुनाव जीतने और विदेशी यात्राऐं करने के अलावा देश के प्रति कोई चिन्ता नही है। इसमें दोराय नही है कि हमारा देश भारत एक बड़े आर्थिक संकट की ओर जा रहा है और अगले कुछ महिनों में यह संकट पूरी तरह से गहरा कर देश के हर परिवार को प्रभावित भी कर सकता है। कई अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अगर भारत पर आए मंहगाई का संकट यूँहि चलता रहा तो अगामी 10 जून तक हमारा देश एक गहरे आर्थिक संकट में फंस सकता है जिससे बाहर निकलने में उसे कई महिनें या साल भर का समय भी लग सकता है।



