चर्चा-ए-आम

खाड़ी का युद्ध फिर हुआ तो विश्व युद्ध बनेगा

कमल सेखरी

जैसा कहा और सुना जा रहा है और यकीन ना होने पर भी विश्वास किया जा रहा है कि खाड़ी में पिछले 40 दिनों से चल रहे महायुद्ध में फिलहाल अस्थाई विराम हो गया है और इस युद्ध में शामिल तीनों मुल्क अमेरिका, इजराइल और ईरान अगले दो सप्ताह तक एक दूसरे पर कोई हमला नहीं करेंगे। पूरे विश्व के लिए फोरी तौर पर यह सबसे सुखद समाचार है और दुनिया इस महायुद्ध के यकायक रुकने पर राहत की सांस ले रही है। इस युद्ध में शामिल इन तीनों देशों ने क्या खोया, क्या पाया इसका अनुमान लगाने में कई बड़े-बड़े विशेषज्ञ घंटों घंटों तक बहस कर रहे हैं लेकिन अंतत: कहीं कोई निष्कर्ष ऐसा निकलकर नहीं आया कि अमेरिका, इजराइल और ईरान ने इस महायुद्ध में क्या पाया है। अमेरिका जो दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत होने के साथ-साथ सबसे मजबूत सैन्य शक्ति भी है उसको क्या मिला ये तो पता नहीं लेकिन उसने निसंदेह पूरी दुनिया में अपनी साख तो खोई है साथ ही उसके मान सम्मान को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी ठेस भी पहुंची है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस महायुद्ध के दौरान अपने जिस व्यक्तिगत व्यवहार का प्रदर्शन किया वो निसंदेह काफी शर्मनाक था और उससे उनकी अपनी व्यक्तिगत छवि और देश के सम्मान को भी गहरी चोट पहुंची है। युद्ध के इन 40 दिनों में घटित घटनाओं का अगर क्रमवार उल्लेख किया जाए तो संभवत: 4 हजार से अधिक पृष्ठों का एक पूरा ग्रंथ इस महायुद्ध पर लिखा जा सकता है। बरहाल सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि यह महायुद्ध जो तेजी से विश्व युद्ध की ओर बढ़ने के संकेत दे रहा था उस पर फिलहाल विराम लगा है लेकिन यह अस्थाई विराम है। अमेरिका की ओर से दिये गए 15 बिन्दुओं के समझौता पत्र और ईरान के द्वारा दिये गए 10 बिन्दुओं के समझौता पत्र पर 10 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक समझौता बैठक होने जा रही है, उस इस्लामाबाद समझौता बैठक में क्या निकलकर आएगा यह बाद की बात है फिलहाल पाकिस्तान उछल उछलकर अपनी पीठ थप थपा रहा है कि उसकी मध्यस्थता से सदी के इस महायुद्ध में उसके माध्यम से समझौता हो रहा है और वो विश्व में खुद को सबसे बड़ा शांतिदूत कहते हुए फूला नहीं समा रहा है। भारत जो 145 करोड़ आबादी का एक बड़ा मुल्क है और जो खुद को जल्द ही विश्व गुरु बनने के दावे कर रहा है उसने यह मौका अपने हाथ से खो दिया, इस महायुद्ध के पहले दिन से लेकर इस कथित अस्थाई विराम तक भारत ने जो चुप्पी साधे रखी उससे हमारे बड़ेपन और विश्व गुरु के दावों को गहरी चोट पहुंची है। अब हम अपने पुराने दुश्मन मुल्क जो अब तक आतंकी मुल्क के नाम से हमारे सभी प्रचारों में शामिल रहा है वो अब खुद को विश्व का सबसे बड़ा शांतिदूत होने का दावा करके हमारे आरोपों को गलत साबित करने का प्रयास करेगा। हमें दुआ तो यही करनी चाहिए कि अमेरिका और ईरान की मजबूरियों से अस्थाई रुप में रुका यह युद्ध अब और रुका ही रहे तो बेहतर है। अगर यह स्टेट आफ हार्मोन के प्रमुख विवाद को लेकर हल ना हो पाया और तानाशाह शासकों की दिमागी गर्मी और जिदबाजी को लेकर फिर से छिड़ गया तो फिर कोई और विकल्प नहीं रहेगा। और दोबारा शुरू हुआ यह युद्ध महायुद्ध ही नहीं बल्कि विश्व युद्ध बन ही जाएगा।

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