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मुख्यमंत्री ने भारतेन्दु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयन्ती नाट्य समारोह का शुभारम्भ किया

अकादमी के सम्पूर्ण भवन एवं 02 प्रेक्षागृहां का 22 करोड़ रु0 से अधिक की लागत से हुए जीर्णाद्धार कार्यां का लोकार्पण, कलाविद्ों तथा अकादमी के पूर्व विद्यार्थियों को सम्मानित किया तथा अकादमी की पत्रिका ‘रंगवेद’ का विमोचन किया

रंगमंच समाज का दर्पण, यह समाज की दिशा तय करता, रंगमंच के माध्यम से भावनाएँ शब्द बनती और शब्द अभिनय बनते, यही अभिनय जन चेतना बनकर समाज को एक नई दिशा प्रदान करता : मुख्यमंत्री

साहित्यिक कृतियाँ समाज की चेतना को जागरूक करतीं, ‘आनन्दमठ के वन्दे मातरम् गीत ने हमें बताया कि राष्ट्र भक्ति क्या होती, स्वराज्य का महत्व क्या होता है तथा पराधीनता क्या होती

भारतेन्दु नाट्य अकादमी को प्रत्येक जनपद में वन्दे मातरम् पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत करने चाहिए

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने सांस्कृतिक पुनर्जागरण करते हुए राष्ट्रीय चेतना को मजबूत बनाने का कार्य किया

भारतीय समाज अपनी संस्कृति, परम्परा और विरासत को सम्मान देना जानता

अकादमी में 20 विद्यार्थियों के लिए चल रहे डिप्लोमा कोर्स को 20-20 विद्यार्थियों के 02 बैचों में चलाए जाने के कार्य में सरकार पूरा सहयोग प्रदान करेगी उ0प्र0 कला की विभिन्न विधाओं में बहुत समृद्ध

संवेदनशील सरकार अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करती, इस भावना को आज अभिनय के रंगमंच ने अभिव्यक्ति दी

स्कूलों व कॉलेजों में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, महाराजा सुहेलदेव सहित अन्य विभूतियों पर आधारित मंचन होने चाहिए

प्रधानमंत्री की प्रेरणा से डबल इंजन सरकार ने जनपद बहराइच में महाराजा सुहेलदेव का भव्य स्मारक बनाया

नाट्य अकादमियों का दायित्व कि महाराजा सुहेलदेव, वीरांगना अवन्तीबाई, वीरांगना ऊदा देवी, वीरांगना झलकारी बाई, महाराजा बिजली पासी जैसे वीरों पर लघु नाटक बनाये, मंचन के माध्यम से ऐसे नायकों के जीवनवृत्त को प्रस्तुत करें

सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों पर आधारित नाट्य श्रृंखला प्रारम्भ कर स्थानीय कलाकारों को प्रेरित करना चाहिए

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रंगमंच समाज का दर्पण है। यह समाज की दिशा तय करता है। रंगमंच के माध्यम से भावनाएँ शब्द बनती हैं और शब्द अभिनय बनते हैं। यही अभिनय जन चेतना बनकर समाज को एक नई दिशा प्रदान करता है। आज यहां भारतेन्दु नाट्य अकादमी के पुराने विद्यार्थियों और रंग कर्मियों को सम्मानित किया गया है। यह अच्छा प्रयास है।
मुख्यमंत्री यहाँ कला संस्कृति के संवर्धन केन्द्र भारतेन्दु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयन्ती नाट्य समारोह (05 से 12 अप्रैल, 2026) का शुभारम्भ करने के उपरान्त आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने भारतेन्दु नाट्य अकादमी के सम्पूर्ण भवन एवं 02 प्रेक्षागृहां का 22 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हुए जीर्णाद्धार कार्यां का लोकार्पण भी किया। उन्होंने कलाविद्ों तथा अकादमी के पूर्व विद्यार्थियों को सम्मानित किया तथा अकादमी की पत्रिका ‘रंगवेद’ का विमोचन किया। कार्यक्रम में श्री बंकिम चन्द्र चटोपाध्याय की कृति ‘आनन्द मठ’ पर आधारित नाटक का मंचन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतेन्दु नाट्य अकादमी की यात्रा निरन्तर आगे बढ़नी चाहिए। प्रदेश भर में राष्ट्रभक्ति से जुड़े हुए कार्यक्रमों तथा नाटकों की प्रस्तुति की जानी चाहिए। इनसे स्थानीय नागरिकों को जोड़ा जाना चाहिए। अच्छे संगीत और संवाद के साथ इन कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना चाहिए। अकादमी ने अपनी नींव के पत्थरों को टटोलने व सम्मानित करने का काम किया है। अकादमी नई और पुरातन पीढ़ी को जोड़कर आगे बढ़ेगी, तो अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। यह यात्रा निरन्तर आगे बढ़नी चाहिए। मुख्यमंत्री ने भारतेन्दु नाट्य अकादमी की 50 वर्षां की शानदार यात्रा के लिए बधाई देते हुए कहा कि आज यहाँ ‘आनन्दमठ’ पर आधारित प्रस्तुति की गयी है। इस उपन्यास की रचना श्री बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने बंगाल के अकाल की त्रासदी को लेकर की थी। ‘आनन्दमठ’ के वन्दे मातरम् गीत ने हमें बताया कि राष्ट्र भक्ति क्या होती है, स्वराज्य का महत्व क्या होता है तथा पराधीनता क्या होती है। बंगाल के तत्कालीन अकाल को विदेशी हुकूमत ने बहुत हल्के से लिया था। लोग भूख से मर रहे थे तथा स्पेनिश फ्लू का शिकार हो रहे थे, लेकिन अंग्रेज सरकार के कान पर जू तक नहीं रेंग रही थी। संवेदनशील सरकार अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करती है। संवेदना शून्य सरकार होने पर वही दृश्य होता है, जो हम श्री बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनन्दमठ’ में तत्कालीन भारत के विषय में पढ़ते हैं। यह उपन्यास विदेशी हुकूमत की संवेदनहीनता की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करता है। इस भावना को आज अभिनय के रंगमंच ने अभिव्यक्ति दी है और यह देश को राष्ट्रभक्ति के साथ जोड़ने में सफल हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पूरे देश में समारोह आयोजित किये जा रहे हैं। भारतेन्दु नाट्य अकादमी को प्रत्येक जनपद में वन्दे मातरम् पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत करने चाहिए। संस्कृति विभाग को इसके लिए धनराशि उपलब्ध करानी चाहिए। इससे लोग बंगाल की त्रासदी और ब्रिटिश सरकार की क्रूरता के बारे में जान सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने 1921 की जनगणना के आंकड़े देखे, जो रोंगटे खड़े करने वाले हैं। वह दशक ऐसा था, जब भारत की आबादी बढ़ने के स्थान पर घट गयी थी। एक अनुमान के अनुसार बंगाल के अकाल और स्पेनिश फ्लू के कारण भारत की लगभग 30 करोड़ आबादी में से 03 करोड़ से भी अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी। ऐसे समय में भी विदेशी हुकूमत लगान ले रही थी, लूट कर रही थी तथा यहां के नागरिकों पर अत्याचार कर रही थी। ठीक इसके विपरीत कोरोना जैसी महामारी के दौरान सरकार ने बेहतर प्रबन्धन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी की चपेट में पूरी दुनिया आई। लोगों को बचाने के लिए भारत सहित दुनिया के देशों में लॉकडाउन लगा, क्योंकि संक्रमण से यह बीमारी फैल रही थी। बचाव करने के लिए अनेक प्रयास किए गए। उस समय प्रवासी कामगार और श्रमिक अपने घरों की ओर आए। सरकार ने उन्हें लाने के लिए वाहन लगाए। उन्हें क्वॉरण्टाइन सेण्टरों में भेजा गया। उनके लिए भोजन की व्यवस्था की गई और उनके घर तक राशन पहुंचाने के साथ ही परमानेण्ट राशन कार्ड उपलब्ध करवाए गए। यदि सरकार में संवेदना हो, तो सरकार बीमारी से फ्रण्ट फुट पर आकर लड़ती है और बीमारी को भगाने का कार्य करती है। कोरोना महामारी के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में भारत में विकसित दो वैक्सीन दुनिया के लिए नजीर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 02 दिन पूर्व उन्हें वाराणसी में मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा प्रस्तुत ‘विक्रमादित्य’ महानाट्य देखने का अवसर मिला। संवाद, संगीत, शब्दों का चयन तथा वाक्य विन्यास इतना प्रभावी होना चाहिए कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित कर सके। एक समय ऐसा था, जब हमारे संस्थानों पर ऐसे लोगों का कब्जा हो गया था, जो गुण्डों और माफियाओं को नायक के रूप में प्रस्तुत करते थे। लोगों को जैसा परोसा जाएगा, वह उसे उसी रूप में स्वीकार करेंगे। आज जब सिनेमा व रंग-मंच कुछ अच्छा प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं, तो समाज भी उसे अच्छाई के रूप में देखता है। रामायण दुनिया का सबसे लोकप्रिय सीरियल रहा है। भारतीय समाज अपनी संस्कृति, परम्परा और विरासत को सम्मान देना जानता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामायण व महाभारत, भारत के जीवन की दिनचर्या और सांस्कृतिक प्रवाह का हिस्सा है। प्रत्येक भारतीय परिवार इन्हें अपने जीवन का अभिन्न अंग मानता है। स्कूलों व कॉलेजों में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, महाराजा सुहेलदेव सहित अन्य विभूतियों पर आधारित मंचन होने चाहिए। 1,000 वर्ष पूर्व महाराजा सुहेलदेव ने अपने साहस और शौर्य के माध्यम से सोमनाथ मन्दिर को बार-बार तोड़ने वाले विदेशी आक्रान्ता का वध किया था। इस घटना के डेढ़ सौ वर्षां के बाद तक कोई भी विदेशी आक्रान्ता भारत पर हमला करने का दुस्साहस नहीं कर सका। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से डबल इंजन सरकार ने जनपद बहराइच में महाराजा सुहेलदेव का भव्य स्मारक बनाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराजा सुहेलदेव के नाम पर कोई भी नाट्य श्रृंखला तथा गीत-संगीत नहीं है। अवधी व भोजपुरी में लोकगीतों के माध्यम से थोड़ा बहुत सुनने को मिलता है। हमारी नाट्य अकादमियों का दायित्व बनता है कि महाराजा सुहेलदेव, वीरांगना अवन्तीबाई, वीरांगना ऊदा देवी, वीरांगना झलकारी बाई, महाराजा बिजली पासी जैसे वीरों पर लघु नाटक बनाये। 02 घण्टे का मंचन करें तथा बच्चों के समक्ष इन वीरों को नायक के रूप में प्रस्तुत करें। इसके साथ ही, देश पर प्रहार करने वालों तथा देश की संस्कृति को रौंदने वाले खलनायकों का सम्मान कभी नहीं होना चाहिए। उनको उसी रूप में प्रस्तुत करना चाहिए, जिस रूप में प्रस्तुत करने का साहसिक कदम ‘आनन्दमठ’ ने उठाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराजा सुहेलदेव शौर्य व पराक्रम की पराकाष्ठा थे। एक काव्य पाठ्य के माध्यम से हमने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य को देखा है। अगर यह नाटक के माध्यम से रंगमंच पर प्रस्तुत किया जाए, तो इसे और प्रभावी बनाया जा सकता है। 26 वर्ष की आयु में उस वीरांगना ने विदेशी हुकूमत को चुनौती दी और सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया। सन् 1858 में धोखे से झाँसी की रानी को शहीद कर दिया गया। इसी प्रकार सन् 1857 में वीरांगना अवन्तीबाई के सामने अंग्रेजों को पीछे हटना पड़ा और सन् 1858 में उन्हें भी अंग्रेजों ने धोखे से मारा था। उस समय उनकी आयु 26 वर्ष थी। हम मंचन के माध्यम से ऐसे नायकों के जीवनवृत्त को प्रस्तुत करें। भारतेन्दु नाट्य अकादमी को इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पं. राम प्रसाद बिस्मिल, चन्द्रशेखर आजाद, ठा. रोशन सिंह जैसे नायकों को सम्मान देने की आवश्यकता है। पं. राम प्रसाद बिस्मिल आर्य समाज के प्रचारक थे। आजीवन भारतीय परम्परा और संस्कृति के लिए समर्पित रहे। शाहजहांपुर उनकी कर्मभूमि थी। आर्य समाज की शिक्षाओं का प्रचार करने, भारत की स्वाधीनता के लिए नौजवानों की फौज खड़ी करने, स्वदेशी एवं स्वावलम्बन के लिए वह सदैव प्रयासरत रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतेन्दु हरिश्चन्द्र आधुनिक हिन्दी के प्रणेता के रूप में जाने जाते हैं। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने काशी नागरी प्रचारणी सभा के माध्यम से जन चेतना को जाग्रत करने का अद्भुत कार्य किया था। काशी नागरी प्रचारणी सभा स्वदेशी भाषा और स्वदेशी का वास्तविक अर्थ समझाने का माध्यम बनी थी। उनकी स्मृति को जीवन्त बनाए रखने के लिए किये जा रहे कार्यां में प्रदेश सरकार पूर्ण सहयोग के लिए तत्पर है। काशी नागरी प्रचारणी सभा आधुनिक हिन्दी की जननी रही है। काशी की नागरी प्रचारिणी सभा की क्या स्थिति है और उसे कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है, इसे बेहतर बनाये जाने के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना चाहिए। मातृ भाषा हिन्दी तथा भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के अविस्मरणीय योगदान व परम्परा को आगे बढ़ाने के लिए यह हमारा दायित्व भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा सांस्कृतिक पुनर्जागरण करते हुए राष्ट्रीय चेतना को मजबूत बनाने का कार्य किया गया था। उनके द्वारा सन् 1881 में लिखा गया ‘अंधेर नगरी’ नाटक ब्रिटिश हुकूमत की क्रूरता और संवेदनहीता का प्रमाण है। इससे पूर्व, उन्होंने सन् 1875 में ‘भारत दुर्दशा’ नाटक लिखा था। उन्होंने अपनी साहित्यिक कृतियों के माध्यम से स्वाधीनता की अलख जगायी थी। मंचों पर भाषण देने और केवल नारे से ही नहीं, बल्कि मंचन व रंगमंच के माध्यम से भी हम जनचेतना को जाग्रत कर सकते हैं। यह उदाहरण भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने प्रस्तुत किया था।
अकादमी के अध्यक्ष डॉ. रति शंकर त्रिपाठी यहाँ 20 विद्यार्थियों के लिए चल रहे डिप्लोमा कोर्स को 20-20 विद्यार्थियों के 2 बैचों में चलाना चाहते हैं। सरकार इस कार्य में उन्हें पूरा सहयोग प्रदान करेगी। श्री त्रिपाठी द्वारा दिये गये प्रस्तावों को संस्कृति विभाग सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाने का काम करे। विभाग के अपर मुख्य सचिव से कहा गया है कि छात्रावास बनाकर भारतेन्दु नाट्य अकादमी को हैण्डओवर किया जाए। छात्रावास का संचालन अकादमी के अन्तर्गत किया जाए। अकादमी के स्वयं के केन्द्र में इन कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना चाहिए। गोरखपुर में कुछ कलाकार वर्ष 1975 से लगातार प्रत्येक मौसम में एक बरगद के पेड़ के नीचे मंचन करते थे। मुझे वहाँ दो-तीन बार मंचन देखने का अवसर प्राप्त हुआ। कलाकारों की माँग पर वहां प्रेक्षागृह का निर्माण कराया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जयशंकर प्रसाद के ऐतिहासिक नाटक स्कंदगुप्त तथा चन्द्रगुप्त सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भावनाओं को जागृत करने के सशक्त माध्यम बने। चन्द्रगुप्त नाटक में लिखित प्रसिद्ध गीत ‘अरुण यह मधुमय देश हमारा’ प्रत्येक भारतीय आज भी गाता है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने आपातकाल के दौरान अपनी रचनाओं के माध्यम से शासन-सत्ता पर प्रहार किया था। उनका ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ का आह्वान जनचेतना का सशक्त माध्यम है। साहित्यिक कृतियाँ समाज की चेतना को जागरूक करती हैं। पूरा समाज उनसे तारतम्य बैठाकर आगे बढ़ता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आगामी दिनों में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कृति ‘रश्मिरथी’ पर आधारित मंचन का तीन दिवसीय कार्यक्रम लखनऊ में आयोजित किया जाएगा। इस मंचन से युवाओं को जोड़ने से उनमें राष्ट्रीयता का भाव उत्पन्न होगा। यहाँ अटल जी की साहित्यिक कृतियों पर आधारित मंचन का कार्यक्रम भी होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे नाट्य जगत में बहुत कुछ है, इस दिशा में वर्तमान पीढ़ी को तैयार करना होगा। इस उद्देश्य के लिए अभी से कार्य प्रारम्भ करें। यदि मध्य प्रदेश सरकार के स्तर पर सम्राट विक्रमादित्य का मंचन महानाट्य के रूप में पूरे देश में हो सकता है, तो हम भी महाराजा सुहेलदेव, रानी लक्ष्मीबाई तथा राजा महेन्द्र प्रताप सिंह आदि महापुरुषों पर आधारित कार्यक्रम को प्रस्तुत कर सकते हैं। राजा महेन्द्र प्रताप सिंह ने ब्रिटिश हुकूमत के दौरान अफगानिस्तान में भारत की समानान्तर सरकार चलायी थी। हमें इन नायकां व वीरांगनाओं को सम्मान देना होगा। स्कूलों व विद्यालयों में इन विभूतियों पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए समय तय किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों पर आधारित नाट्य श्रृंखला प्रारम्भ कर स्थानीय कलाकारों को प्रेरित करना चाहिए। अच्छी स्क्रिप्ट व संवाद लिखे जाने चाहिए। यह सभी कार्यक्रम समाज को जोड़ते हुए नई दिशा प्रदान करेंगे तथा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को ऊंचाइयों तक आगे बढ़ाएंगे। इस कार्य के लिए संस्कृति विभाग को आगे आना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने कहा था कि ‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल’। अर्थात प्रगति के मूल में अपनी भाषा व बोली होती है। गोस्वामी तुलसीदास जी वैदिक विद्वान थे। वह संस्कृत में अपनी रचना लिखना चाहते थे। उन्हें लोकभाषा ‘अवधी’ में रचना करने की ईश्वरीय प्रेरणा प्राप्त हुई। उनके द्वारा लिखा गया ‘श्रीरामचरितमानस’ ग्रन्थ आज घर-घर में पूजा जा रहा है। मॉरीशस में भारतीय मूल के लोग भोजपुरी बोलते हैं, लेकिन पढ़ नहीं सकते। उनके पास विरासत के रूप में ‘श्रीरामचरितमानस’ का गुटका है। ‘श्रीरामचरितमानस’ में रामायण है, जिसकी वह पूजा करते हैं। हम सभी को इस पर विचार करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश कला की विभिन्न विधाओं में बहुत समृद्ध है। आजमगढ़ के छोटे से गाँव हरिहरपुर में बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक संगीत से जुड़े हुए हैं। वहाँ गायन, वादन तथा नृत्य की तीनों विधाएँ प्रचलित हैं। प्रदेश सरकार ने वहाँ संगीत विद्यालय प्रारम्भ किया। विभाग को इस संगीत विद्यालय को और अच्छे ढंग से आगे बढ़ाना चाहिए। मगहर में संत कबीर एकेडमी बनी है। संत कबीर की साखी, सबद तथा रमैनी पर आधारित शोध एवं अन्य कार्यक्रम आगे बढ़ाए जाने चाहिए।
कार्यक्रम को पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह तथा भारतेन्दु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. रति शंकर त्रिपाठी ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, विधायक श्री योगेश शुक्ल, लखनऊ की महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल, अपर मुख्य सचिव पर्यटन एवं संस्कृति अमृत अभिजात, भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. माण्डवी सिंह, भारतेन्दु नाट्य अकादमी के निदेशक बिपिन कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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