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शिक्षकों को फ्रन्टलाईन वॉरियर्स घोषित करने की उठी मांग, कोरोना का शिकार हुए टीचरों के परिजनों को मुआवजा व नौकरी देने की मांग

नई दिल्ली। कोरोना महामारी से मरने वालों की संख्या हाल के महीनों में तेजी से बढ़ी है, हर दिन हजारों लोग मर रहे हैं। इस पर आॅल इंडिया आइडियल टीचर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेख अब्दुल रहीम ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों का गैरजिम्मेदाराना व्यवहार इस स्थिति का एक कारण है वहीं दूसरी ओर सरकारों की अव्यवस्था इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है। प्रेस को दी विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस अभूतपूर्व स्थिति से निपटने के लिए कई एनजीओ भी आगे आए हैं। साथ ही, सरकार ने इस संबंध में अपने कर्मचारियों को कई जिम्मेदारियां दी हैं। शिक्षकों को सौंपी गई जिम्मेदारियों के कारण उन पर काम का अधिक भार बढ़ा है। भले ही शिक्षकों को फ्रन्टलाइन योद्धाओं की श्रेणी में नहीं रखा गया है, लेकिन वे अपनी जान की परवा किये बगैर फ्रन्टलाईन वॉरियर्स के कंधों से कंधा मिलाकर उन्हे दी गई जिम्मेदारी भलीभांती रूप से निभा रहे हैं। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों में कई शिक्षक कोविड -19 का शिकार हुए हैं। अकेले उत्तर प्रदेश राज्य में 500 से अधिक शिक्षक इस महामारी से मर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद योगी सरकार पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। इससे यह साबित होता है कि सरकार ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है। उनका संगठन इस गैरजिम्मेदाराना व्यवहार की निंदा करता है और सभी राज्य सरकारों, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करती है कि मृतक शिक्षकों को फ्रंटलाइन वॉरियर्स घोषित कर उनके परिवारों को तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान की जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। इसके अलावा आयटा ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से शिक्षकों को इस अतिरिक्त काम से छूट देने का आग्रह किया है ताकि वे अपने क्षेत्र की जिम्मेदारी को ठीक से और प्रभावी ढंग से पूरा कर सकें। क्योंकि देश का भविष्य उनके हाथ में है। देश में शिक्षा तभी अच्छी रह सकती है जब उनका स्वास्थ्य अच्छा हो। इस तरह देश के उज्जवल भविष्य के लिये शिक्षकों के स्वास्थ्य का हमें विशेष ध्यान रखना होगा।

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