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बस अड्डों को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने की कार्यवाही तेज, मुख्य सचिव ने की समीक्षा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने प्रदेश के बस अड्डों को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने हेतु की गयी कार्यवाही की समीक्षा की। अपने संबोधन में मुख्य सचिव ने कहा कि 75 जिलों के सभी बस स्टेशनों की रुपरेखा तैयार करके सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर जल्द से जल्द सुंदरीकरण तथा विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ेगी, इसलिए उसी को ध्यान में रखते हुए बस स्टेशनों पर चार्जिंग प्वाइंट्स बनाये जाएं। इसके साथ ही बस स्टैंडों पर मानक के अनुसार रैंप बनाया जाए, जिससे यात्रियों को सामान लाने-जाने में असुविधा न हो।
उन्होंने कहा कि फेज-1 के अंतर्गत 16 जनपदों के 24 बस अड्डों-गाजियाबाद में तीन, आगरा में तीन, प्रयागराज में दो, लखनऊ में तीन (चारबाग, अमौसी और गोमती नगर), अयोध्या में दो तथा मथुरा, कानपुर नगर, वाराणसी, मेरठ, अलीगढ़, गोरखपुर,, बुलंदशहर, हापुड़, बरेली, रायबरेली, मिजार्पुर में एक-एक को विकसित किया जा रहा है। फेज-2 में 24 जनपदों-कासगंज, महोबा, बिजनौर, इटावा, फतेहपुर, श्रावस्ती, अमरोहा, उन्नाव, बलिया, मुरादाबाद, रामपुर, एटा, बलरामपुर, बस्ती, देवरिया, फिरोजाबाद, गोंडा, कन्नौज, पीलीभीत, अंबेडकरनगर, बदांयू, बागपत, मुजफ्फरनगर, संभल के 24 बस अड्डों का कायाकल्प किया जाएगा। इसके अतिरिक्त फेज-3 में 35 जिलों के 35 बस अड्डों को भी विकसित किये जाने का प्रस्ताव है। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम के अध्यक्ष श्री राजेंद्र कुमार तिवारी तथा परिवहन, वित्त, आवास एवं शहरी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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