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लेखपालों का उत्पीड़न नहीं किया जाएगा बर्दाश्त: राममूरत यादव

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की मेरठ मंडल इकाई की बैठक गाजियाबाद सदर तहसील में आयोजित की गई। लेखपाल संवर्ग की दिशा और दशा की समक्षा के साथ-साथ कई ज्वलंत मुद्दे बैठक में रखे गए। मेरठ मंडल के खंडमंत्री सिद्धार्थ कौशिक के आह्वान पर आहुत बैठक में जनपद गाजियाबाद के अलावा मेरठ, बुलंदशहर, मेरठ, हापुड़, बागपत से उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष, जिला मंत्री, तहसील अध्यक्ष व तहसील मंत्रियों ने भाग लिया। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में लेखपालों के स्वीकृत पदों के सापेक्ष के एक तिहाई लेखपाल कार्यरत हैं जिस कारण प्रत्येक लेखपाल पर शासन, अधिकारियों द्वारा कई-कई हलकों का भार थोप दिया गया है। वर्तमान समय में प्रत्येक लेखपाल औसत 15 से 20 ग्रामों का कार्य देख रहा है। इस कार्य अधिकता की स्थिति को दृष्टिगत न रखकर प्रत्येक कार्य को तत्काल ही कर देने का दबाव दिनरात अधिकारियों द्वारा बनाया जाता है। वक्ताओं ने कहा कि किसान भाइयों को मिलने वाली किसान सम्मान निधि योजना मूलत: कृषि विभाग का कार्य था, शासन ने श्रेय भी इसका कृषि विभाग को दिया परंतु वास्तविकता यह है कि किसान सम्मान निधि का सारा कार्य लेखपालों से कराया गया, किसी अन्य विभाग का कोई सहयोग प्राप्त नहीं हुआ। इसी प्रकार घरौनी, स्वामित्व योजना का कार्य पंचायत विभाग का है परंतु पूरे प्रदेशभर में स्वामित्व योजना का कार्य, कार्य के बोझ से दबे लेखपालों द्वारा ही किया गया। शासन द्वारा नाममात्र के लिए दूसरे विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है, सारा कार्य येन-केन प्रकरण एवं लेखपालों के अनुशासित कर्मचारी होने के कारण अर्नगल दबाव बनाकर लेखपालों से ही लिया जाता है।
वक्ताओं ने कहा कि सैद्धांतिक रूप से लेखपाल कोई तकनीकी पद नहीं है परंतु आज इस डिजीटल के दौर में खसरा आनलाइन फीडिंग, रियल टाइम खतौनी, क्राप कटिंग के आनलाइन प्रयोग, ई-डिस्ट्रिक योजना के तकनीकी कुशलता की अपेक्षापूर्ण कार्य लेखपाल संवर्ग द्वारा संपादित किए जा रहे हैं। अब शासन एग्री ऐप के माध्यम से आनलाइन फसल पड़ताल कराने की तैयारी में है जिसे लेखपालों की कम संख्या एवं कार्यक्षेत्र की अधिकता के कारण पूर्ण किया जाना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। वक्ताओं द्वारा इतने परिश्रम से कार्य करने के उपरांत भी अधिकारियों द्वारा लेखपाल संवर्ग को अपेक्षित सम्मान, सहयोग न दिए जाने पर रोष भी प्रकट किया। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि लेखपाल संवर्ग की समस्याओं पर स्थानीय अधिकारियों एवं शासन द्वारा अपेक्षित संज्ञान न लिए जाने के कारण लेखपाल संवर्ग में आक्रोश व्याप्त है। बैठक में विभिन्न जनपदों से आए पदाधिकारियों ने संगठन की मजबूती को लेकर भी अपने-अपने विचार रखे। संघ के प्रदेश अध्यक्ष राममूरत यादव एवं महामंत्री विनोद कश्यप ने सभी पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए आश्वस्त किया कि किसी भी लेखपाल का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। अन्य विभागों की योजनाओं के लिए लेखपालों के खिलाफ जो कार्यवाही की जा रही है उसको शीघ्र ही प्रदेश कार्यकारिणी में रखा जाएगा और बड़ा निर्णय लिया जाएगा। बैठक में गाजियाबाद जिलाध्यक्ष सुबोध कुमार शर्मा, प्रदेश महामंत्री विनोद कश्यप, सुधीर चौधरी, सचिन गर्ग जिला अध्यक्ष बुलंदशहर, राकेश शर्मा तहसील अध्यक्ष गाजियाबाद, सुजीत कुमार तहसील अध्यक्ष लोनी, मोहित शर्मा तहसील सचिव मोदीनगर आदि बड़ी संख्या में संघ के पदाधिकारियों व सदस्यों ने भाग लिया।

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