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तंबाकू का सेवन करने वाले चार लोगों के काटे गए चालान

  • विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर जिला अस्पताल में हुई गोष्ठी
  • स्वास्थ्य और पर्यावरण पर तंबाकू के दुष्प्रभावों पर हुई चर्चा
    गाजियाबाद।
    विश्व तंबाकू निषेध दिवस (31 मई) के मौके पर जिला एमएमजी अस्पताल परिसर को पूरी तरह तंबाकू मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया है। जिला अस्पताल परिसर में यदि कोई तंबाकू का सेवन करते पाया जाता है तो उसका चालान काटकर जुर्माना वसूला जाएगा। मंगलवार को चार लोगों के चालान काटकर अभियान की शुरूआत कर दी गई है। तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एसीएमओ डा. राकेश कुमार गुप्ता ने बताया- कोटपा अधिनियम की धारा- चार के तहत सार्वजनिक स्थान पर तंबाकू का सेवन करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई के लिए एक फार्मासिस्ट की ड्यूटी लगाई गई है। जिला अस्पताल स्थित गैर संचारी रोग (एनसीडी) विभाग स्थित सभागार में स्वास्थ्य और पर्यावरण पर तंबाकू के सेवन के दुष्प्रभाव विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता जिला एमएमजी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डा. मनोज चतुर्वेदी ने की।
    तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डा. राकेश गुप्ता ने गोष्ठी में सभी का स्वागत करते हुए तंबाकू से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डा. गुप्ता ने बताया भारत में कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू का सेवन है। पुरुषों में सबसे ज्यादा मामले मुंह और फेफड़ों के कैंसर के आते हैं और इन दोनों के लिए तंबाकू का सेवन जिम्मेदार है। तंबाकू, पान, सुपारी, पान मसाले एवं गुटके के सेवन से अग्नाशय (पेनक्रियाज), गुर्दे, पेट, मुंह, जीभ और खाने की नली का कैंसर होता है, जबकि बीड़ी या सिगरेट से फेफड़ों और शराब के सेवन से सांस की नली और खाने की नली के कैंसर का खतरा होता है।
    डा. गुप्ता ने बताया तंबाकू उत्पादों के सेवन ने गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को बढ़ा दिया है। इतना ही नहीं तंबाकू उद्योग का कचरा पर्यावरण को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। गोष्ठी में उपस्थित लोगों को तंबाकू के इस्तेमाल से पर्यावरण पर होने वाले खतरे के बारे में बताया गया।
    विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े बताते हैं कि हर वर्ष सिगरेट उत्पादन के लिए दुनिया भर में 60 करोड़ से अधिक पेड़ काटे जाते हैं। इस संबंध में हमें लोगों को जागरूक करना है ताकि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम कम होने के साथ ही पर्यावरण को भी बचाया जा सके। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को तंबाकू का इस्तेमाल न करने के लिए शपथ भी दिलाई गई और चिकित्सालय में विभिन्न स्थानों पर हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया। तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के जिला सलाहकार डा. आशुतोष गौतम ने भी तंबाकू के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी।

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