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खेल की धारा अब मदरसों एवं संस्कृत पाठशालाओं की ओर भी

  • देश के विख्यात पूर्व ओलम्पिक खिलाड़ियों का 25 को लगेगा गाजियाबाद में जमावाड़ा
  • लोहियानगर स्थित हिन्दी भवन में सुबह 11 बजे से शुरू होगा कार्यक्रम
    गाजियाबाद।
    देश में खेल संस्कृति स्थापित हो, इसके लिए स्पोर्ट्स ए वे आॅफ लाईफ संस्था ने एक मुहिम चला रखी है। संस्था की फिलोस्फी है कि इसके लिए बच्चों और प्रारम्भिक स्कूलों से शुरूआत की जानी चाहिए। संस्था के अध्यक्ष एवं देश के विख्यात स्पोर्ट्स रिसर्चर डॉ. कनिष्क पांडेय ने अपने वैज्ञानिक शोध में संस्कृत और उर्दू स्कूलों, मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को खेल की धारा से कटा पाया है। इस सम्बंध में खेल सुविधाओं की उपलब्धता, खेल के लिए निर्धारित बजट, खेल शिक्षकों की तैनाती, खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन तथा जिला, राज्य एवं देश स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में इनके प्रतिनिधित्व के लिए बहुत ही रोचक अध्ययन किया है। 25 अगस्त को लोहियानगर स्थित हिन्दी भवन में इन सबके प्रस्तुतीकरण के साथ ही इन विद्यालयों को खेल की धारा में शामिल करने के लिए नींव में पहली ईंट भी रखी जायेगी। चलो खेल की धारा के इस कार्यक्रम में देश के विख्यात पूर्व ओलंपियन एवं होकी के जादूगर मेजर ध्यानचन्द के पुत्र अशोक ध्यानचन्द, पूर्व ओलंपियन एमपी सिंह, मध्यप्रदेश के पूर्व ओलंपियन जलालुद्दीन, जेएनयू के प्रोफेसर हरेराम मिश्र, राजस्थान के द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता आरडी सिंह सहित कई नामचीन खेल हस्तियां, विद्वान एवं पूर्व केन्द्रीय सचिव आदि उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की खासियत यह है कि इनमें वीआईपी अतिथियों के रूप में संस्कृत स्कूल एवं मदरसों के बच्चे होंगे। वे स्वयं अपने करकमलो से खेलों से परिचय कराने वाली उर्दू एवं संस्कृत की पुस्तकों का विमोचन करेंगे।

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