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बिस्मिल का बलिदान युवाओं के लिए सदैव प्रकाश पुंज रहेगा: अनिल आर्य

  • अमर शहीद प.रामप्रसाद बिस्मिल के 124 वें जन्मोत्सव पर कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि
  • बिस्मिल क्रांतिकारियों के सिरमौर थे: गायत्री मीना
    गाजियाबाद।
    केन्द्रीय आर्य युवक परिषद् के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद प. रामप्रसाद बिस्मिल के 124 वें जन्मोत्सव पर आॅनलाइन कार्यक्रम आयोजित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। आर्य समाज सेक्टर-33 नोएडा की मंत्री गायत्री मीना ने कहा कि पंडित रामप्रसाद बिस्मिल क्रांतिकारियों के सिरमौर रहे, उनसे प्रेरणा पाकर अनेकों नोजवान स्वतंत्रता-आंदोलन में कूद पड़े। अशफाक उल्ला खां और बिस्मिल की दोस्ती जगजाहिर थी एक कट्टर आर्य समाजी और एक कट्टर मुस्लिम, लेकिन राष्ट्र की बलिवेदी पर दोनों इकठ्ठे फांसी पर झूल गए इससे बड़ा सामाजिक समरसता का कोई और उदाहरण नहीं हो सकता। बिस्मिल ने देश की आजादी के लिए घर,परिवार सब छोड़ कर राष्ट्र के लिए सब कुछ होम कर दिया। अध्यक्षता करते हुए आर्य नेत्री आशा आर्या ने कहा कि बिस्मिल की जीवनी पढ़ कर रोंगटे खड़े हो जाते है,वास्तव मे उनके जीवन चरित्र को पाठ्यक्रम में पढ़ाने की आवश्यकता है जिससे नयी पीढ़ी उनके बलिदान से परिचित हो सके। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि बिस्मिल के जीवन का कण कण राष्ट्र के लिए समर्पित था,उनका जीवन युवाओं के लिए सदैव प्रकाश पुंज का कार्य करेगा। देश का दुर्भाग्य है कि बिस्मिल जैसे क्रांतिकारियों को इतिहास से विस्मृत करने का षडयंत्र किया गया और एक ही परिवार की पूजा अर्चना की गई, उनकी तुर्बत पे नहीं एक भी दीया,जिनके खून से जले थे चिरागे वतन। आज महकते हैं मकबरे उनके जिन्होंने बेचे थे शहीदों के कफन। अनिल आर्य ने जोर देकर कहा कि यदि आजादी की रक्षा करनी है तो नई पीढ़ी को उनके त्याग, समर्पण, बलिदान से परिचित कराना ही होगा, नोजवानों को बिस्मिल की फांसी से तीन दिन पहले लिखी आत्म कथा अवश्य पढ़नी चाहिए। डॉ. जयेन्द्र आचार्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्र की वर्तमान व भावी पीढ़ी को देश भक्त बनाने, स्वतंत्रता के महत्व को समझने तथा राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने के लिए यह आवश्यक है कि उन राष्ट्र भक्त शहीदों व क्रांतिकारियों का जीवन चरित्र शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए हंसते हंसते अपना जीवन बलिदान कर दिया। मुख्य अतिथि अंजू जावा ने सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रान्तीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि आज के दौर में देश के युवाओं में बिस्मिल जैसे शहीदों का जीवन नई ऊर्जा भरने का कार्य करेगा। पंडित राम प्रसाद बिस्मिल एक महान क्रांतिकारी, देशभक्त ही नहीं बल्कि एक उच्च कोटि के लेखक, कवि, शायर व साहित्यकार भी थे। इनकी लिखी हुई समस्त रचनाएं बहुत ही जोशीली, क्रांतिकारी होती थीं। देशभक्ति भावना से ओतप्रोत इस अमर बलिदानी का जन्म 11 जून सन 1897 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में हुआ था। सुप्रसिद्ध गायक नरेंद्र आर्य सुमन, दीप्ति सपरा, बिन्दु मदान, जनक अरोड़ा,आशा आर्या, रवीन्द्र गुप्ता, प्रतिभा कटारिया, मधु खेड़ा, विजय कपूर, प्रवीना ठक्कर, राजकुमार भंडारी के ओजस्वी गीतों ने उत्साह पैदा किया। प्रमुख रूप से आरपी सूरी, सौरभ गुप्ता, महेन्द्र भाई, राजेश मेंहदीरत्ता, ईश आर्य (हिसार), डॉ. कर्नल विपिन खेड़ा, प्रेम सचदेवा एवं वीना वोहरा आदि उपस्थित रहे।

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