उत्तर प्रदेश

भारत सरकार के टीबी मुक्त भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा उत्तर प्रदेश: घोष

  • प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री के संकल्प और मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में अपना रही एक व्यापक रणनीति
  • टीबी उन्मूलन पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी
  • 7 दिसंबर 2024 से चल रहे व्यापक स्क्रीनिंग अभियान में 3 करोड़ 28 लाख से अधिक लोगों की हुई जांच
  • विगत वर्षों में टीबी जांच और उपचार सुविधाओं के विस्तार में हुई उल्लेखनीय प्रगति
  • लक्षणहीन संभावित मरीजों की पहचान पर भी दिया जा रहा विशेष ध्यान
  • टीबी मरीजों को उपचार के दौरान 1000 प्रतिमाह सीधे बैंक खाते में किये जाते हैं स्थानान्तरित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग अमित कुमार घोष ने कहा कि भारत सरकार के टीबी मुक्त भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा में उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस वर्ष का वैश्विक थीम “Yes! We can end TB! Led by countries. Powered by people. एक सशक्त आह्वान है जो बताता है कि देशों के नेतृत्व और लोगों की सामूहिक शक्ति से टीबी का अंत संभव है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष 24 मार्च को मनाया जाने वाला विश्व क्षय रोग दिवस हमें याद दिलाता है कि टीबी आज भी दुनिया की प्रमुख संक्रामक बीमारियों में से एक है लेकिन जागरूकता बढ़ाना, समय पर जांच कराना, पूर्ण उपचार सुनिश्चित करना और सामूहिक प्रयासों को मजबूत करना इसे समाप्त करने की कुंजी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार माननीय प्रधानमंत्री के संकल्प और माननीय मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में एक व्यापक रणनीति अपना रही है जिसमें सक्रिय खोज अभियान, आधुनिक जांच तकनीकें जैसे नैट और एआई आधारित हैंड-हेल्ड चेस्ट एक्स-रे, डिजिटल निगरानी प्रणाली निक्षय पोर्टल, पोषण सहयोग तथा सामुदायिक भागीदारी प्रमुख स्तंभ हैं। यह समन्वित दृष्टिकोण टीबी के विरुद्ध लड़ाई को अधिक प्रभावी बना रहा है। अपर मुख्य सचिव ने अपील की कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्य नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। जागरूकता फैलाकर, समय पर जांच कराकर, उपचार पूरा करके और सामुदायिक सहयोग से हम टीबी मुक्त उत्तर प्रदेश तथा टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य साकार कर सकते हैं। विश्व क्षय रोग दिवस हमें यही संदेश देता है कि यदि सरकार और समाज मिलकर संकल्प लें तो टीबी को इतिहास का हिस्सा बनाया जा सकता है। 7 दिसंबर 2024 से अभी तक चले व्यापक स्क्रीनिंग अभियान में 3 करोड़ 28 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गयी तथा प्रदेश में कुल जांचों में से लगभग 64 प्रतिशत नैट तकनीक से की गईं जिससे रोग की शीघ्र और सटीक पहचान संभव हुई। अभियान के दौरान 2 करोड़ 99 लाख मरीजों की अधिसूचना की गई, तथा लाखों मरीजों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया और निक्षय पोषण योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की गई। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में टीबी के मामले अधिक होना स्वाभाविक है लेकिन पिछले वर्षों में जांच और उपचार सुविधाओं के विस्तार में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्तमान में प्रदेश में 1004 नैट जांच मशीनें कार्यरत हैं जिनकी संख्या पिछले आठ वर्षों में 141 से बढ़कर 1004 हो गई है जो लगभग 612 प्रतिशत की वृद्धि दशार्ती है। पहले जांच मुख्य रूप से अस्पतालों तक सीमित थी लेकिन अब मोबाइल हेल्थ वैन और स्क्रीनिंग यूनिट्स के माध्यम से यह सुविधा गांव-गांव तक पहुंच गई है। लक्षणहीन संभावित मरीजों की पहचान पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि बीमारी को शुरूआती चरण में ही रोका जा सके। पोषण टीबी उन्मूलन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि कुपोषण इस रोग का प्रमुख जोखिम कारक है। निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत टीबी मरीजों को उपचार के दौरान ?1000 प्रतिमाह सीधे बैंक खाते में दिए जाते हैं। पिछले सात वर्षों में 32 लाख से अधिक रोगियों को 1022 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की गई है जो न केवल आर्थिक सहारा देती है बल्कि उपचार पूरा करने के लिए प्रेरित भी करती है।सामाजिक भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। निक्षय मित्र अभियान की शुरूआत 2019 में माननीय राज्यपाल द्वारा की गई थी जिसमें नागरिक, संस्थाएं और स्वयंसेवी संगठन टीबी रोगियों को पोषण सहायता प्रदान करते हैं। निक्षय पोर्टल के अनुसार 2022 से अभी तक 98938 निक्षय मित्रों ने 1036215 पोषण पोटलियां उपलब्ध कराने की सहमति दी है। टीबी मुक्त ग्राम पंचायत अभियान के तहत ग्राम पंचायतें जागरूकता, स्क्रीनिंग और उपचार अनुपालन में सक्रिय हैं। वर्ष 2023 में 1372, 2024 में 7191 और 2025 में 7577 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित हुईं।7 दिसंबर 2024 को शुरू हुए 100 दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया जिसके लिए 24 मार्च 2025 को माननीय केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा सम्मानित किया गया। पिछले दस वर्षों में टीबी की घटना दर और मृत्यु दर में लगभग 17 प्रतिशत की गिरावट आई है। वर्ष 2025 में 6.93 लाख टीबी रोगियों की पहचान और अधिसूचना हुई जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है तथा ड्रग सेंसिटिव टीबी की उपचार सफलता दर 92 प्रतिशत तक पहुंच गई है। पिछले आठ वर्षों में 32 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग से 1.71 लाख मरीजों की पहचान हुई। वर्तमान में जोखिम वाले समूहों जैसे वृद्ध, कुपोषित, संपर्क में रहने वाले, नशा करने वाले, एचआईवी संक्रमित, मधुमेह रोगी तथा मलिन बस्तियों के निवासियों पर विशेष ध्यान है। एआई आधारित 87 हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनों का उपयोग हो रहा है तथा जनवरी 2026 में लखनऊ में आयोजित रीजनल एआई इंपैक्ट कॉन्फ्रेंस में टीबी जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर जोर दिया गया। टीबी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ पंचायती राज, ग्राम्य विकास, शिक्षा, आयुष, महिला एवं बाल विकास, श्रम, गृह, नगर विकास, परिवहन तथा उद्योग जैसे कई विभाग जुड़े हैं ताकि प्रयास समाज के हर स्तर तक पहुंचें।

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