सांप्रदायिकता जीती-खेल भावना हारी

कमल सेखरी
विश्व में आपसी सौहार्द, समनव्य, परस्पर प्रेम, मित्रता और निष्पक्षता जैसी भावनाओं को प्रेरित करने का अगर कोई सबसे प्रबल माध्यम माना जाता है तो उसे खेल भावना का नाम दिया जाता है। हम शर्मिंदा हैं कि हमारे देश में वो खेल भावना वर्तमान सियासी माहौल के चलते सांप्रदायिक भावनाओं के समक्ष ना केवल छोटी पड़ गई बल्कि उस खेल भावना में सांप्रदायिकता के आगे दम ही तोड़ दिया। बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने निर्देश जारी कर बांग्लादेश के उस क्रिकेट खिलाड़ी को प्रतियोगिता से बाहर निकाल दिया जिसे आईपीएल की बोली में केकेआर क्लब नौ करोड़ बीस लाख में खरीदा था। यह बोली दो करोड़ से आरंभ हुई और इसमें शाहरुख खान के क्लब के अलावा नीता अंबानी, प्रीती जिंटा और शिल्पा शेट्टी के क्लबों ने भी बोली लगाई थी। हर साल इस प्रतियोगिता के लिए लगने वाली क्रिकेट खिलाड़ियों की बोली में दुनिया के कई देशों से सौ से अधिक क्रिकेटर भाग लेने भारत आते हैं और इस बार भी उन खिलाड़ियों के बीच बांग्लादेश से आठ क्रिकेट खिलाड़ियों को इस बोली में शामिल करने के निर्देश बीसीसीआई ने दिये थे। क्योंकि अभी तक बीसीसीआई के पास ऐसे कोई सरकारी आदेश नहीं हैं कि बांग्लादेश हमारा दुश्मन मुल्क है और उसके खिलाड़ियों को इस प्रतियोगिता में भाग नहीं लेने दिया जाना चाहिए। बांग्लादेश का वो खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान जिसके नाम से विवाद खड़ा हुआ और वो इस हद तक इसलिए पहुंच गया क्योंकि उसकी बोली लगाने वाले क्लब केकेआर में फिल्म अभिनेता शाहरुख खान 55 फीसदी के भागीदार हैें। विवाद किस सीमा तक पहुंचा यह हम सबने देखा और इस विवाद को कुछ हिन्दू संगठनों और भाजपा नेताओं ने मिलकर शाहरुख खान की वजह से हिन्दू-मुस्लिम का विवाद बना दिया। अगर हम बांग्लादेश को हिन्दू विरोधी मानते हुए अपना दुश्मन देश मान रहे हैं तो हमने बांग्लादेश में छिड़ी हिंसक जंग की मूल जड़ वहां की अपदस्त राष्टÑपति शेख हसीना को इतने लंबे समय से भारत में पनाह दे ही क्यों रखी है। बांग्लादेश में जो लोग हिंसा कर रहे हैं वो शेख हसीना को वापस चाहते हैं तो हमें वहां के हिन्दुओं की रक्षा करने की खातिर शेख हसीना को उन्हें सौंप देना चाहिए या फिर भारत से कहीं ओर भेज देना चाहिए। ऐसे ही अगर बांग्लादेश हमारा दुश्मन मुल्क है और हिन्दुओं को प्रताड़ित कर रहा है तो हमें अडानी समूह से कहकर उन्हें जो बिजली सप्लाई दी जा रही है उसे रुकवा देना चाहिए। जब वहां बिजली की तंगी आ जाएगी तो अपने आप ही वहां के लोगों के दिमाग ठिकाने लग जाएंगे। हम अभी तक सिर्फ पाकिस्तान को ही अपना दुश्मन देश करार देते आ रहे हैं लेकिन उसी पाकिस्तान के साथ पिछले छह माह में हमने उनकी पुरुष क्रिकेट टीम के साथ कई मैच खेले हैं। महिला विश्वकप में भी हमने पाकिस्तान की महिला टीम से कई लीग मैच खेले हैं और हमने विश्वकप अंडर-19 में पाकिस्तान की युवा क्रिकेट टीम के साथ लीग के 5 मैच और फाइनल मैच अभी हाल में ही खेले हैं। अब जब हम अपने दशकों पुराने दुश्मन देश के साथ छह महीने में ही इतने सारे क्रिकेट मैच खेल सकते हैं तो बांग्लादेश के एक मात्र खिलाड़ी को भारत की धरती पर खेलने की अनुमति क्यों नहीं दे सकते। क्योंकि खेलने वाला खिलाड़ी मुस्लिम है और उसे खिलाने वाला भी मुस्लिम है इसलिए यह मामला हमारे लिए एक बड़ा सांप्रदायिक मामला बन गया। बीसीसीआई को अब यह स्थिति भी स्पष्ट करनी चाहिए कि आगामी सितंबर माह में भारतीय क्रिकेट टीम का जो दौरा बांग्लादेश का प्रस्तावित है और जिसमें सभी फारमेट के खेल खेले जाने हैं उसमें भाग लेने भारतीय टीम जाएगी या नहीं जाएगी। या फिर आर्थिक नुकसान ना हो तो हम अपनी क्रिकेट टीम को वहां भेजेंगे और तब बांग्लादेश हमारा एक मित्र मुल्क बनकर हमारे सामने खड़ा होगा। पूरे विश्व में खेल जगत ही एक ऐसी अलग दुनिया है जिसमें ना तो कोई विवाद होता है, ना कोई आपसी बैर और ना ही कोई आपसी मतभेद। इसलिए खेल भावना को विश्व की सबसे श्रेष्ठ मानव भावना माना जाता है। हमने अपने सियासी स्वार्थों के चलते विश्व की उस सच्ची, ईमानदार, निष्पक्ष, निर्विरोध खेल भावना की हत्या की है। विश्व का खेल जगत हमारे देश के इन सियासी नेताओं को कभी माफ नहीं कर पाएगा और इन्होंने जो काला धब्बा अपने दामन पर लगा लिया है वो कभी धुल भी नहीं पाएगा।

