शिक्षा

केआईईटी ने एनसीसी कैडेटों को किया सम्मानित किया

गाजियाबाद। केआईईटी ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस, गाजियाबाद के एनसीसी विंग ने अपने कैडेटों की उल्लेखनीय उपलब्धियों का जश्न मनाने और नए नामांकन का स्वागत करने के लिए 11 सितंबर, 2025 को परिसर में एक भव्य एनसीसी सम्मान और पुरस्कार समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में कर्नल पीयूष कुमार (आॅफिसर कमांडिंग, 35 यूपी बटालियन एनसीसी, मोदीनगर), सूबेदार मेजर परमानंद जी और पीआई स्टाफ विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें डॉ. मनोज गोयल (कार्यकारी निदेशक), डॉ. आदेश कुमार पांडे (निदेशक, शैक्षणिक), डॉ. अनुराग गुप्ता (डीन स्टूडेंट वेलफेयर) और डॉ. कपिल शर्मा (एनसीसी अधिकारी- काईट) शामिल थे, ने भी सभा को संबोधित किया और कैडेटों का उत्साहवर्धन किया। प्रतिष्ठित ‘सी’ और ‘बी’ सर्टिफिकेट परीक्षाएँ सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने वाले कैडेटों को उनके समर्पण और प्रतिबद्धता के लिए सम्मानित किया गया। संस्थान ने एनसीसी निदेशालय, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित इनोवेशन प्रोजेक्ट प्रतियोगिता (उत्तर प्रदेश स्तर) में छठा स्थान प्राप्त करने की अपनी गौरवपूर्ण उपलब्धि का भी जश्न मनाया। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय स्तर के पर्वतारोहण और ट्रैकिंग शिविरों में संस्थान का प्रतिनिधित्व करने वाले कैडेटों को उनके साहस के लिए सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में, डॉ. मनोज गोयल ने कैडेटों को अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और नेतृत्व के मूल्यों को जीवन के मार्गदर्शक सिद्धांतों के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। डॉ. आदेश कुमार पांडे ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे एनसीसी युवाओं को जिÞम्मेदार नागरिक बनाने और उन्हें राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उपलब्धियों की सराहना करते हुए, कर्नल पीयूष कुमार ने कैडेटों को शिक्षा, नवाचार और राष्ट्र सेवा में उत्कृष्टता के लिए प्रयास करते रहने के लिए प्रेरित किया। समारोह का समापन डॉ. कपिल शर्मा द्वारा हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने के लिए सभी गणमान्य व्यक्तियों, संकाय सदस्यों और कैडेटों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस समारोह में न केवल एनसीसी कैडेटों की उपलब्धियों को मान्यता दी गई, बल्कि नव नामांकित सदस्यों में अनुशासन, देशभक्ति और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता की नई भावना का संचार भी किया गया।

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