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टीबी का एक भी लक्षण आने पर जांच जरूरी : डीटीओ

  • डब्ल्यूएचओ की स्वास्थ्य सलाहकार ने पीटीईआर बढ़ाने पर दिया जोर
  • सामान्य दिनों में पांच और विशेष दिनों पर 10 फीसदी रेफरल के निर्देश
  • सीएचसी गढ़मुक्तेश्वर पर हुआ चिकित्सा अधिकारियों का टीबी प्रशिक्षण
    हापुड़। शासन के निर्देश पर जिले में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम को लेकर चिकित्सा अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहे हैं। सोमवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), गढ़मुक्तेश्वर के अंतर्गत आने वाले चिकित्सा अधिकारियों का प्रशिक्षण सीएचसी सभागार में हुआ। जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डा. राजेश सिंह ने एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में गढ़मुक्तेश्वर ब्लॉक के चिकित्सा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि ओपीडी में आने वाले रोगी में यदि टीबी का एक भी लक्षण नजर आये तो उसकी जांच अवश्य कराएं। टीबी उन्मूलन के लिए अधिक से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग जरूरी है। कार्यशाला में पहुंचीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की स्वास्थ्य सलाहकार डॉ. रेणु डफे ने प्रिजप्टिव टीबी एग्जामिनेशन रेट (पीटीईआर) बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि शासन से 2023 के लिए प्रति लाख आबादी पर दो हजार लोगों की टीबी जांच का लक्ष्य निर्धारित किया है,जबकि वर्तमान में जनपद हापुड़ का पीटीईआर 1404 है। डीटीओ डॉ. राजेश सिंह ने कहा- टीबी उन्मूलन के लिए पीटीईआर और नोटिफिकेशन दो महत्वपूर्ण इंडिकेटर हैं। 2023 में 16 अगस्त तक जिले में 2382 नोटिफिकेशन हुए हैं। डीटीओ डा. सिंह ने चिकित्सा अधिकारियों को टीबी उन्मूलन कार्यक्रम और इसके उद्देश्यों के बारे में विस्तार से बताया और टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए ब्लॉक और जिले को टीबी मुक्त करने के लक्ष्य में जुट जाने का आह्वान किया। इसके साथ ही चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए कि सामान्य दिनों की ओपीडी में टीबी के लक्षण वाले पांच प्रतिशत रोगियों को टीबी जांच कराने के लिए रेफर करें। इसके साथ ही विशेष दिवसों (जैसे एकीकृत निक्षय दिवस) पर ओपीडी में आने वाले रोगियों में से कम से कम 10 प्रतिशत की टीबी जांच अवश्य कराएं। इस मौके पर सीएचसी प्रभारी डा. दिनेश भारती ने चिकित्सा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा – कोई भी रोगी सबसे पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में पहुंचता है और उनके (चिकित्सा अधिकारी) संपर्क में आता है, इसलिए क्षय रोगियों की पहचान तेज करने में सबसे पहली और महत्वपूर्ण भूमिका चिकित्सा अधिकारी की है। सर्दी, जुकाम और खांसी होने पर दवा लेने पहुंचने वाले रोगियों से मेडिकल हिस्ट्री जानें और दो सप्ताह से अधिक खांसी वाले सभी रोगियों की टीबी जांच अवश्य कराएं।
    जिला कार्यक्रम समन्वयक दीपक शर्मा और जिला पीपीएम समन्वयक सुशील चौधरी ने टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की टेक्निकल और आॅपरेशनल जानकारी देने के साथ ही क्षय रोगियों को प्रदान की जाने वाली सुविधाओं के बारे में बताया। प्रशिक्षण सत्र के दौरान वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक गजेंद्र पाल सिंह, वरिष्ठ प्रयोगशाला पर्यवेक्षक राम सेवक और एलटी महेंद्र यादव भी उपस्थित रहे।
    टीबी के लक्षण :
    दो सप्ताह से अधिक खांसी,
    वजन कम होना,
    सीने में दर्द रहना,
    शाम के समय बुखार होना,
    रात में सोते समय पसीना आना।
    एएनएम की छात्राओं को दी जानकारी
    गढ़मुक्तेश्वर में मेरठ रोड पर स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ एक्सीलेंस में एएनएम कोर्स की छात्राओं को जिला पीपीएम समन्वयक सुशील चौधरी, वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक गजेंद्र पाल सिंह और वरिष्ठ प्रयोगशाला पर्यवेक्षक राम सेवक ने टीबी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। श्री चौधरी ने टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत में टीबी संक्रमण के प्रसार का बहुत बड़ा कारण कुपोषण है, बेहतर खानपान से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जो तमाम बीमारियों से हमारी रक्षा करती है।

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