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हापुड़ में टीबी से ग्रसित 56 बच्चों को लिया गोद

  • जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय में इन बच्चों को बांटा गया पोषाहार
    हापुड़।
    जनपद में टीबी पीड़ित 56 बच्चों को विभिन्न संस्थाओं और अधिकारियों ने गोद लिया है। दो बच्चों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. रेखा शर्मा ने गोद लिया है। इनमें से तीन बच्चे जो मल्टी ड्रग रजिस्टेंस (एमडीआर) टीबी से ग्रसित हैं, उन्हें खुद जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) राजेश कुमार सिंह ने गोद लिया है। बाकी बच्चों को आईएमए, रोटरी क्लब और मेडिकल कॉलेजों की ओर से गोद लिया गया है। गोद लेने का उद्देश्य इन बच्चों को सामाजिक, भावनात्मक और पोषण में सहयोग करना है। इसी क्रम में टीबी से ग्रसित बच्चों को मंगलवार को जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय में पोषाहार वितरित किया गया। डीटीओ डा. सिंह ने बताया टीबी का उपचार बीच में छोड़ देने पर टीबी पीड़ित को मल्टी ड्रग रजिस्टेंस (एमडीआर) टीबी हो जाती है। इसलिए कहा जाता है कि एक बार टीबी का उपचार शुरू होने पर बीच दवा खाना न छोड़ें। चिकित्सक की सलाह पर ही दवा लेना बंद करें। एमडीआर टीबी पीड़ितों का उपचार थोड़ा कठिन और लंबा हो जाता है, हालांकि आजकल स्वास्थ्य विभाग के पास एमडीआर का भी निशुल्क उपचार उपलब्ध है। ऐसे मरीजों को अतिरिक्त देखरेख की जरूरत होती है, इसलिए उन्होंने खुद एमडीआर टीबी से पीड़ित तीन बच्चों को गोद लिया है। उन्होंने बताया इस संबंध में विभिन्न संगठन सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं और टीबी से ग्रसित बच्चों को गोद ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि रोटरी क्लब पिलखुवा की ओर से टीबी से ग्रसित 14 बच्चों को गोद लिया गया है। आईएमए हापुड़ और आईएमए पिलखुवा द्वारा 10-10 बच्चों को गोद लिया गया है। इसके अलावा 17 बच्चे रामा मेडिकल कॉलेज और सरस्वती मेडिकल कॉलेज ने गोद लिए हैं।
    डीटीओ ने बताया कि उनके कार्यालय में इन बच्चों को पोषाहार का वितरण किया गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन प्रधानमंत्री की प्राथमिकता वाला कार्यक्रम है। सूबे की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा से टीबी से ग्रसित बच्चों को गोद लेकर उन्हें भावनात्मक सहयोग प्रदान करने की परंपरा इन बच्चों के लिए बहुत सुखद प्रयास है, इससे न केवल उनका मनोबल बढ़ता है बल्कि टीबी से लड़ने की शक्ति में भी इजाफा होता है। पोषाहार वितरण कार्यक्रम के दौरान जिला पीपीएम समन्वयक सुशील चौधरी, जिला पीएमडीटी समन्वयक मनोज कुमार, जिला कार्यक्रम समन्वयक दीपक शर्मा, टीबीएचवी हरीश चंद्र, सीनियर प्रयोगशाला पर्यवेक्षक बृजेश कुमार आदि उपस्थित रहे।

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