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दिल्ली में वैक्सीन खत्म, टीकाकरण सेंटर किए गए बंद, केजरीवाल ने केन्द्र सरकार को दिए कई सुझाव

नई दिल्ली। दिल्ली में कोरोना रोधी टीका खत्म होने के बाद वैक्सीनेशन का काम रोक दिया गया है। टीकाकरण के कई सेंटर बदल दिए गए हैं। यह जानकारी खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मीडिया को दी। उन्होंने कहा कि टीके की जो डोज केन्द्र सरकार ने दी थीं वे खत्म हो गई हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि इसका यह कतई मतलब नहीं है कि हम सावधानियां बरतनी छोड़ दें। कुछ डोज बचे हुए हैं जो आज शाम तक खत्म हो जाएंगे। कल से युवाओं के वैक्सीनेशन के सभी सेंटर बंद हो जाएंगे। केजरीवाल ने कहा कि हमने केंद्र सरकार से और वैक्सीन के डोज की मांग की है। जैसे ही ये डोज हमें मिलते हैं, दिल्ली में फिर से युवाओं का टीकाकरण शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली को हर महीने 80 लाख वैक्सीन की जरूरत है। इसके मुकाबले मई में हमें केवल 16 लाख वैक्सीन मिली। जून के लिए केंद्र ने इस कोटे को कम करके आठ लाख कर दिया है। अभी तक हम दिल्ली में 50 लाख वैक्सीन लगा चुके हैं। दिल्ली के सभी युवाओं के लिए हमें ढाई करोड़ वैक्सीन की जरूरत है। अगर इसी रफ्तार से हमें वैक्सीन मिली तो केवल दिल्ली के युवाओं को वैक्सीन लगाने में 30 महीने लग जाएंगे। इतने दिनों में तो न जाने कितनी लहरें आएंगी और कितने लोग मर जाएंगे। अस्पताल, बेड, आईसीयू और वेंटिलेटर जैसी सुविधाओं की व्यवस्था तो हम कर ही रहे हैं लेकिन कोरोना के घातक परिणाम से बचाने में वैक्सीन ही सबसे असरदार है। वैक्सीन की कमी केवल सरकार की चिंता नहीं है, बल्कि आम आदमी भी इससे डरा हुआ है। कोरोना की चपेट से देश को बचाने के लिए हमें वैक्सीन की उपलब्धता को तुरंत बढ़ानी पड़ेगी। इसके लिए केंद्र सरकार को उन्होंने चार सुझाव भी दिए। पहला यह कि भारतीय बायोटेक कंपनी जो कोवैक्सीन बनाती है, वह अपना फॉर्मूला दूसरी कंपनियों को देने के लिए तैयार है। केंद्र सरकार देश में वैक्सीन बनाने वाली अन्य सभी कंपनियों को बुलाकर आदेश दे कि युद्धस्तर पर इस फॉर्मूले से वैक्सीन बनाई जाए। दूसरा यह कि सभी विदेशी वैक्सीन को भारत में इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए और विदेशी वैक्सीन के निर्माताओं से केंद्र सरकार खुद बात करे। यह काम राज्य सरकारों पर नहीं छोड़नी चाहिए। कई राज्य जो अपनी जनसंख्या के मुकाबले अत्यधिक वैक्सीन जमा कर रहे हैं उनसे केंद्र को बात करनी चाहिए और ऐसा करने से मना करना चाहिए। विदेशी वैक्सीन की कंपनियों को भारत में भी उत्पादन की अनुमति दी जाए। अगर ऐसा होता है कि देश के किसी राज्य में वैक्सीन की कोई कमी नहीं होगी और टीकाकरण का कार्य बदस्तूर चलता रहेगा।

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