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मैदे से निर्मित चीज़ें सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है- मैदे या मैदे से बनी चीजें, हो सकती है कई तरह की बीमारियां

नई दिल्ली। आटा और मैदा, दोनों ही गेंहू से बनता है, बावजूद इसके आटा जहां शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है, वहीं मैदा सेहत के लिए नुकसानदेह है। ज्यादातर लोग अपने दिन की शुरुआत ब्रेड के साथ करते हैं। कुछ को तो पिज्जा-बर्गर बहुत पसंद होता है तो कुछ मोमोज, ब्रेड, बिस्किट, पिज्जा, बर्गर, कुलचा, भटूरा और नान के जबरदस्त शौकीन होते हैं। अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो ये चीजें रोज खाते हैं तो हम आपको बता दें कि मैदा सेहत के लिए अच्छा नहीं होता।

आटा बनाते समय गेहूं की ऊपरी गोल्डन पर्त को निकाला नहीं जाता है। ये गोल्डन पर्त डाइट्री फाइबर का सबसे अच्छा स्रोत है। इसके अलावा आटे को थोड़ा दरदरा पीसा जाता है, जिससे गेहूं में मौजूद पोषक तत्व ज्यादा मात्रा में नष्ट नहीं होते जबकि मैदा बनाने से पहले गेहूं की ऊपरी गोल्डन पर्त हटा ली जाती है। इसके बाद गेहूं के सफेद भाग को अच्छी तरह, खूब महीन पीस लिया जाता है, जिससे न तो मैदे में कोई पोषक तत्व बचते हैं और न ही डाइट्री फाइबर।

मैदे का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत हाई होता है तो जब आप मैदे से बनी चीज़ें खाते हैं तो बॉडी में ग्लूकोज़ का लेवल बढ़ जाता है। इसकी वजह से अग्नाशय एकदम से एक्टिव हो जाता है और काफी ज्यादा मात्रा में इंसुलिन रिलीज़ करने लगता है। तो मतलब अगर आपके खानपान में मैदे की बहुत ज्यादा मात्रा रहती है तो इसे बंद कर दें। क्योंकि इससे धीरे-धीरे इंसुलिन का प्रॉडक्शन कम होते जाएगा नतीजा आप डायबिटीज के मरीज बन सकते हैं।

मैदे से निर्मित चीज़ें हमारी आंतों में चिपक जाते हैं, जिससे डाइजेशन बिगड़ने लगता है और धीरे-धीरे कब्ज़, एसिडिटी, पेट दर्द जैसी समस्याएं घर करने लगती हैं। इसकी वजह ये है कि मैदा में फ़ाइबर की बिल्कुल भी मात्रा शामिल नहीं होती और इसी वजह से इसे पचने में बहुत ज्यादा वक्त लगता है। डाइजेशन पर तो असर डालता ही है साथ ही इससे मेटाबॉलिज़्म भी धीमा हो जाता है। जिससे मोटापा बढ़ने लगता है और कई लोगों में सिर दर्द की समस्या भी देखने को मिलती है।

समोसे, कचौरी, बिस्किट्स, भटूरे को खाते वक्त एक बार भी नहीं सोचते कि इससे बनाने में इस्तेमाल की गई चीज़ें और प्रक्रिया दोनों ही सेहत के लिए कितनी नुकसानदायक हैं। मैदे से बनी चीज़ों को खाने से वजन तो तेजी से बढ़ता ही है साथ ही दिल से जुड़ी कई तरह की बीमारियां भी हो सकती हैं।

मैदा बहुत ही ज्यादा चिकना होता है जिससे हमारा डाइजेस्टिव सिस्टम इसे ठीक से डाइजेस्ट नहीं कर पाता, जिसकी वजह से एसिडिटी होने के संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। एसिडिक फूड्स का सीधा असर हमारी हड्डियों पर पड़ता है। हड्डियों से कैल्शियम ख़त्म होने से हमारी बोन डेंसिटी कम होती जाती है, जो गठिया और सूजन जैसी बीमारियों की वजह बनती है।

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