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चुनाव से जरूरी है देश का संकट!

कमल सेखरी

जैसा कि एक लंबे समय से अपेक्षित था कि 5 राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनाव और खासतौर पर पश्चिम बंगाल में होने वाले धमाका विधान सभा चुनाव के पूरा होते ही देश में गैस, पेट्रोल, डीजल और खाद के दामों में अचानक बड़ी तेजी आएगी वैसा ही कुछ शुक्रवार सुबह को होता ही नजर आया है। इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच विगत 28 फरवरी को जो युद्ध आरंभ हुआ उसके चलते ऐसा लगने ही लगा था कि दुनियाभर में और खासतौर पर दक्षिण-पूर्वी एशिया में गैस, तेल और खाद का बड़ा अभाव हो जाएगा और ये सभी अनिवार्य वस्तुएं धीरे-धीरे महंगी होती चली जाएंगी। हमारी सरकार ने इस ओर गंभीरता से कदम नहीं उठाया और शुक्रवार सुबह अव्यवसायिक गैस सिलेंडर पर अचानक 993 रुपये बढ़ा दिए।पिछले डेढ़ महीने में व्यावसायिक गैस पर यह तीसरी बार बढ़ोतरी की गई है। अब व्यावसायिक गैस का सिलेंडर 3078 रुपये का मिलेगा। निःसंदेह इसका दुष्परिणाम खाने-पीने का व्यवसाय कर रहे छोटे रेड़ी-ठेले वालों पर पड़ेगा ही, साथ ही मध्यम वर्ग व बड़े होटलों और भोजनालयों पर भी बुरा असर पड़ेगा।खासतौर पर देश के जो अधिकांश औद्योगिक कारखाने हैं वो भी बुरी तरह से प्रभावित होंगे। महंगाई तो बेतहासा बढ़नी ही है। लाखों की संख्या में लोग बेरोजगार भी होंगे। हमारे देश में गैस, तेल और खाद भंडारण बहुत ही सीमित मात्रा में हैं, जो और आने वाले कुछ ही दिनों में पूरे देश को भारी संकट और पीड़ा में डाल सकते हैं। हालांकि खाड़ी में चल रहे महायुद्ध में 40 दिन की मारामारी के बाद अस्थायी युद्ध विराम की घोषणा कर दी गई है लेकिन अभी भी होर्मुज स्ट्रेट पर चल रही नाकेबंदी के चलते अभी भी होर्मुज गलियारे से गैस और तेल लेकर आने वाले हजारों जहाज वहीं समुद्र में फंसे खड़े हैं और अभी उनका रास्ता साफ होने की कोई सूरत नजर नहीं आ रही है। भारत क्योंकि प्रभावी देशों में ऐसा देश है जिसकी गैस, तेल और खाद की खपत विश्व में सबसे ज्यादा है और भंडारण ऊँट के मुँह में जीरे से भी कम है। अतः आने वाले दिनों में निश्चित ही घरेलू गैस और पेट्रोल डीजल का एक बड़ा अभाव हमे नजर आ सकता है और इनकी दरों में भी खासा उछाल होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इस साल कई बार मौसम के बदले मिजाज से हमारे किसानों की खेती भी बुरी तरह से प्रभावित हुई है और साथ ही निकट भविष्य में रासायनिक खाद की कमी और बढ़ते दाम हमारे किसानों की कमर तोड़ देंगे। हमारी केंद्र सरकार को अब चेत जाना चाहिए और इस संभावित भयंकर संकट को गंभीरता से लेना चाहिए। अपनी पूरी शक्ति विभिन्न राज्यों के चुनाव जीतने में झोंकने से कई अधिक जरूरी है देश को आने वाले इस भयंकर संकट से उभारना।प्रदेश के चुनाव तो आते-जाते रहते हैं, इस तरह के संकट देश पर आना दुर्भाग्यपूर्ण ही माना जाना है। सरकार को चुनाव जीतने से पहले ऐसे संकट से निपटना चाहिए।

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