गाजियाबाद

आईटीएस एवं राधे श्याम चेरिटेबल फाउंडेशन के तत्वावधान में एसआईआर पर विशेष सत्र आयोजित

गाजियाबाद। आईटीएस गाजियाबाद और राधे श्याम चैरिटेबल फाउंडेशन के तत्वावधान में आई.टी.एस. मोहन नगर के द्रोणाचार्य आडिटोरियम में सभी शिक्षकों, पीजीडीएम (2025-27) और एमसीए छात्रों के लिए एस.आई.आर.: द स्पेशल इंटेंसिव रिविजन फॉर द करेक्ट लिस्ट एंड द राइट वोट शीर्षक से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम आई.टी.एस.द एजुकेशन ग्रुप के वाइस चेयरमैन अर्पित चड्ढा की उपस्थिति में और राधे श्याम चैरिटेबल फाउंडेशन के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य सभी प्रतिभागियों को शुद्ध एवं अद्यतन मतदाता सूची बनाए रखने तथा मतदान के संवैधानिक महत्व के प्रति जागरूक करना था। सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री कलराज मिश्र, सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय, डॉ. ख्याति मिश्र, आई.टी.एस. स्कूल आॅफ मैनेजमेंट के निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय कुमार तथा आई.टी.एस. गाजियाबाद के निदेशक डॉ. सुनील पांडे उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ, जिसमें एस. आई.आर. से संबंधित ज्ञान, प्रबुद्धता, उपयोगिता और प्रतीकात्मक वर्णन प्रस्तुत किया गया। इसके बाद पूरे सभागार ने एक स्वर में वंदे मातरम गाकर देशभक्ति और एकता का वातावरण प्रकट हुआ। तत्पश्चात अर्पित चड्ढा ने अतिथियों का पुष्प-गुच्छ एवं स्मृति-चिह्न देकर स्वागत किया। इसके बाद अतिथियों ने सभा को संबोधित करते हुए सत्र के मुख्य विषय भारत निर्वाचन आयोग द्वारा की जा रही राष्ट्रव्यापी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
सत्र में इसे एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया गया जिसका उद्देश्य देश की मतदाता सूची को अद्यतन व शुद्ध करना है, ताकि तीव्र जनसांख्यिकीय परिवर्तन, शहरीकरण और प्रवासन के कारण हुए बदलावों को इसमें समुचित रूप से शामिल किया जा सके। निर्वाचन आयोग का लक्ष्य नए योग्य मतदाताओं को शामिल करना, मौजूदा आंकड़ों में सुधार करना, डुप्लिकेट या अवैध प्रविष्टियों को हटाना तथा 2026 में होने वाले तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों की तैयारी को मजबूत करना है। इस प्रक्रिया में बूथ लेवल आॅफिसर्स अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे जमीनी स्तर पर सत्यापन और दस्तावेजी जांच सुनिश्चित करते हैं। हालाँकि निर्वाचन आयोग एस. आई. आर. को अपनी नियमित और संवैधानिक जिम्मेदारी बताता है, लेकिन यह प्रक्रिया राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय भी बन गई है। विपक्षी दलों इंडिया गठबंधन, टीएमसी, डीएमके आदि ने इस पर गंभीर चिंता जताई है कि यह अभियान अप्रत्यक्ष रूप से एन आर सी जैसा रूप ले सकता है, जिससे गरीब, अल्पसंख्यक, दलित और आदिवासी जैसे कमजोर समुदायों के वोट काटे जाने का खतरा बढ़ सकता है। उनका कहना है कि दस्तावेजी आवश्यकताओं के कारण हाशिए पर रहने वाले लोग सूची से बाहर भी हो सकते हैं। इसके जवाब में निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची संशोधन उसकी विशिष्ट संवैधानिक जिम्मेदारी है और वह चुनावी पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है।
आई.टी.एस. गाजियाबाद में आयोजित यह कार्यक्रम छात्रों के लिए प्रशासनिक, राजनीतिक और कानूनी सभी आयामों पर व्यापक जानकारी का माध्यम बना। इसने स्पष्ट किया कि पारदर्शी और सटीक मतदाता सूची स्वस्थ लोकतंत्र की नींव है। डॉ अजय कुमार ने कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों और प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापन किया। अंत में सामूहिक फोटो सत्र के साथ आयोजित किया गया, जिसने इस महत्वपूर्ण दिन के पलों को संजो कर रखाऔर समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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