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एमडीआर टीबी के मरीजों को भी मिलेगी सुई से मुक्ति

वीडाकुलीन खाने से हो सकेगी बिगड़ी टीबी की छुट्टी

–          असहनीय होती है चार माह तक इंजेक्शन लगवाने की पीड़ा : डा. राजेश सिंह

हापुड़। एक बार टीबी का उपचार शुरू करने के बाद बीच दवा छोड़ने पर होने वाली मल्टी ड्रग रे‌जिस्टेंट टीबी (एमडीआर) के मरीजों को भी अब चार माह तक लगातार इंजेक्शन लगवाने की पीड़ा से मुक्ति मिलेगी। इंजेक्शन के स्थान पर मरीज को नौ से 11 माह तक ओरल दवा खानी पड़ेगी। जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डा. राजेश सिंह ने बताया एमडीआर टीबी के मरीजों को रोजाना इंजेक्शन लगवाने से असहनीय पीड़ा होती थी, इसलिए अब खाने वाली दवा से ही उपचार शुरू करने की तैयारी है।

डीटीओ ने बताया टीबी के उपचार को लगातार ज्यादा कारगर और कम कष्टप्रद बनाया जा रहा है। विभाग 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने के प्रयास में जुटा हुआ है। इसी कड़ी में इंजेक्शन के स्थान पर एमडीआर टीबी के ओरल उपचार के लिए जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) दीपक शर्मा और पीएमडीटी/ टीबी-एचआईवी को‌ऑर्डिनेटर मनोज कुमार गौतम आगरा में तीन दिन का प्रशिक्षण लेकर आए हैं। 25 से 27 अप्रैल तक चले प्रशिक्षण के बाद अब वह जनपद में क्षय रोग विभाग के स्टाफ को ट्रेनिंग देंगे।

पीएमडीटी कोर्डिनेटर मनोज कुमार गौतम ने बताया – एमडीआर टीबी के मरीजों को अब तक लगातार चार माह तक कैनामाइसीन के इंजेक्शन लगवाने पड़ते थे, यह काफी पीड़ादायक होता है। इसके साथ 24 से 11 माह तक ओरल उपचार देना होता था। अब इंजेक्शन के स्थान पर एमडीआर टीबी के सभी मरीजों को शार्टर ओरल वीडाकुलीन दी जाएगी। नौ से 11 माह‌ तक दवा खाने के बाद मरीज पूरी तरह ठीक हो जाएगा। पहले यह दवा केवल 18 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों को दी जाती थी।

क्या होती है एमडीआर टीबी :

सामान्य टीबी होने पर मरीज द्वारा उपचार शुरू कराने के बाद बीच में दवा छोड़ देने पर मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी हो जाती है। जिला पीपीएम कॉऑर्डिनेटर सुशील चौधरी ने बताया सीबीनॉट मशीन से स्पुटम (बलगम) जांच करने पर टीबी के वैक्टीरिया की मौजूदगी और सामान्य टीबी में दी जाने वाली चार दवाओं में से एक या उससे अधिक के प्रति वैक्टीरिया के रे‌‌सिस्टेंट होने पर मरीज को एमडीआर टीबी होती है। आम भाषा में इसे बिगड़ी टीबी भी कह‌ते हैं।

टीबी का उपचार बीच में कतई न छोड़ें : डीटीओ

जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डा. राजेश सिंह का कहना है कि टीबी के मरीज को एक बार उपचार शुरू करने पर बीच में कतई नहीं छोड़ना चाहिए। अधिकतर मामलों में छह माह तक नियमित दवा खाने पर टीबी ठीक हो जाती है, लेकिन फिर भी जांच के बाद चिकित्सक की राय के बिना दवा न छोड़ें। इस मामले में लापरवाही एमडीआर टीबी को बुलावा देने जैसी है।  

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