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लापरवाही से साइलेंट किलर का रूप ले लेता है थायराइड अंसतुलन: रेखा शर्मा

हापुड़। महिलाओं में हार्मोनल अंसतुलन होने का खतरा ज्यादा रहता है, इसके अलावा महिलाओं का शरीर ज्यादा संवेदनशील भी होता है। इसलिए पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में थायराइड असंतुलन की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डा. रेखा शर्मा का। खानपान में जंक फूड की अधिकता, अनियमित जीवन शैली, तनाव और हार्मोनल असंतुलन महिलाओं में थायराइड के असंतुलन के बड़े कारण है। जागरूकता और थोड़ी सी सतर्कता से इस दिक्कत से बचा जा सकता है। थायराइड के बारे में लोग जाने और समय रहते सतर्क हो जाएं, इसी उद्देश्य से हर वर्ष 25 मई को विश्व थायराइड दिवस मनाया जाता है।
सीएमओ डा. रेखा शर्मा ने बताया हमारे गले में सामने की ओर थायराइड एक ग्रंथि होती है, जो हमारे शरीर में उपापचय (मेटाबॉलिज्म) को नियंत्रित करती है। दरअसल उपापचय, जीवनयापन के लिए जरूरी रसायनिक प्रतिक्रियाओं को कहा जाता है। भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करना इनमें मुख्य है। इसके अलावा थायराइड हृदय, मांसपेशियों, हड्डियों और कोलेस्ट्रॉल का भी प्रभावित करती है। उन्होंने बताया पेट में सूजन, थायराइड असंतुलन का शुरूआती लक्षण हो सकता है। उन्होंने कहा महिलाओं के शरीर में हार्मोनल असंतुलन होने का खतरा ज्यादा रहता है, इसलिए उनमें थायराइड असंतुलन की आशंका भी ज्यादा रहती है। इसे ह्लसाइलेंट किलरह्व भी कहा जाता है। इसके लिए महिलाओं को समय – समय पर प्रशिक्षित चिकित्सक की निगरानी और टीएसएच स्तर की जांच की जरूरत होती है।
सीएमओ ने कहा- गर्भधारण के लिए योजना बनाने से पहले महिलाओं को थायराइड स्क्रीनिंग अवश्य करानी चाहिए, इतना ही नहीं गर्भ की पुष्टि होने के बाद भी यह जांच जरूरी है। थायराइड असंतुलन की समस्या सामान्यत: आयोडीन की संतुलित मात्रा न लेने, दवाओं के अत्याधिक सेवन, तनाव और अनियमित जीवनशैली व खानपान के चलते होती है। गर्भ और मोनोपॉज के समय थायराइड असंतुलन का खतरा ज्यादा रहता है, और यदि किसी के परिवार में थायराइड की हिस्ट्री रही हो तो उसे विशेष तौर पर सावधान रहने की जरूरत होती है।
थायराइड असंतुलन के लक्षणों की बात करें तो अचानक वजन कम या ज्यादा होना। गर्मी ज्यादा लगना, बार-बार पेट खराब होना, घबराहट और चिड़चिड़ापन, इसके लक्षण हो सकते हैं। थायराइड अंसतुलन होने पर तला-भुना खाने से परहेज करें। इसके अलावा कॉफी और अधिक चीनी के इस्तेमाल से भी बचें। सलाद, हरी सब्जियां और मौसमी फलों का सेवन अधिक करें।

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