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हिन्दी हमारी पहचान के साथ एकता की अनुपम परंपरा है : डॉ. माला कपूर

  • सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल के छात्रों ने पोस्टर के माध्यम से दिया जागरूक का संदेश
    गाजियाबाद।
    हिन्दी दिवस के अवसर पर सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में छात्रों द्वारा विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन किया गया। बच्चों ने हिन्दी दिवस पर आधारित कविताओं, दोहों एवं नारों पर आधारित रंग-बिरंगे पोस्टर साझा किए। अपने वक्तव्य में प्रधानाचार्या डॉ. माला कपूर ने कहा कि हिन्दी ने हमें एक नई पहचान दिलाई है। यह संपूर्ण विश्व में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं में से एक है। हिन्दी विश्व की सबसे प्राचीन, सरल और समृद्ध भाषा मानी जाती है। संवैधानिक तौर पर हिन्दी भले ही राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई, लेकिन हम भारतीय हिन्दी को ही अपनी राष्ट्रभाषा मानते हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दी हर हिंदुस्तानी की पहचान के साथ एकता की अनुपम परंपरा है। नेहरू नगर स्थित शाखा में आयोजित कार्यक्रम में कक्षा एक से पांच तक के छात्रों ने पोस्टर पर अपने उद्गार राष्ट्रभाषा राष्ट्र का सम्मान है। भारती का चिह्न भी है, प्राण है! है यही संस्कृति का आधार भी, यह हमारा आचरण, व्यवहार भी इन पंक्तियों के माध्यम से प्रस्तुत किए।

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